दतिया से दिल्ली तक सियासी भूकंप: राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होते ही बदला राज्यसभा का गणित, MP कांग्रेस को दोहरा झटका
मध्य प्रदेश में मई-जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में भाजपा अपना तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है.
दतिया से कांग्रेस विधायक की सदस्यता खत्म करने का विधानसभा सचिवालय का फैसला जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर बीजेपी की सियासी बिसात का हिस्सा माना जा रहा है।
MP Politics News: मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए मई से जून के बीच चुनाव होने की संभावना है. अप्रैल में बीजेपी के 2 और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जिसके लिए चुनाव होगा. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को विधायकों की संख्या बल के हिसाब से 2 सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को अपनी सीट बचाने में अब मशक्कत करनी पड़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस के 3 विधायकों का मामला पूरी तरह से फंस चुका है. जिसमें विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. वहीं दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
मतदान के लिए 63 विधायक ही बचेंगे
दतिया सीट का रिक्त होना और विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा का वोट न डाल पाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। इससे पहले कांग्रेस के पास 65 विधायक थे।
विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा चुनाव नामांकन फॉर्म में गलत जानकारी देने के कारण सदस्यता खत्म होने के दायरे में आ गए थे। हालांकि, कोर्ट से राहत मिलने के चलते उनकी सदस्यता बच गई, लेकिन कोर्ट के आदेश अनुसार वे चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे। इसके चलते राज्यसभा चुनाव में मतदान के लिए अब कांग्रेस के पास 64 विधायक ही रह गए थे।
अब विधायक राजेंद्र भारती को एफडी मामले में तीन साल की सजा हो चुकी है और विधानसभा ने उनकी सदस्यता भी समाप्त कर दी है। ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट में अपील पर भारती को राहत नहीं मिलती तो कांग्रेस का एक और विधायक कम हो जाएगा। इस स्थिति में राज्यसभा चुनाव में मतदान के लिए कांग्रेस के पास केवल 63 विधायक ही बचेंगे।
इसके अलावा बीना विधायक निर्मला सप्रे ने हाईकोर्ट में भले ही यह कहा है कि वह कांग्रेस की विधायक हैं, लेकिन वे 2024 से लगातार बीजेपी की बैठकों और मंचों पर नजर आती रही हैं।
क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रखने की रणनीति
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास अभी भी विधायक ज्यादा हैं। ऐसे में बीजेपी को सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस विधायकों की संख्या 58 से कम करनी होगी।
इस स्थिति को देखते हुए बीजेपी कांग्रेस के चार से पांच विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इसके अलावा इन विधायकों को सदन में अनुपस्थित रखकर भी सीट अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है।
खास बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश स्तर के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी कांग्रेस में और तोड़फोड़ कर विधायकों को अलग करने का प्रयास कर सकती है।
ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि वे कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान न कर बीजेपी के समर्थन में वोट कर सकती हैं। इस स्थिति में वोटिंग के लिहाज से कांग्रेस के कुल विधायकों की संख्या 62 तक सिमटती दिख रही है।
बीजेपी इस नेता को बना सकती है उम्मीदवार
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में किसी ब्राह्मण चेहरे को उतार सकती है. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में आया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं, जहां भाजपा उन्हें अपना समर्थन दे सकती है. पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. जिससे अगर कांग्रेस के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोटिंग करते हैं तो वह मामला बन सकता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी सीट को लेकर अब पूरी तरह एक्टिव है. कांग्रेस ने सभी विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया है. जबकि पार्टी किसी ओबीसी नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है. जिसमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. ताकि विधायकों को एकजुट रखा जा सके और राज्यसभा की सीट को जीता जा सके.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस