पोस्टर पर घमासान: भोपाल में भाजपा कार्यालय के सामने दिग्विजय सिंह का बैनर फाड़ा, कांग्रेस-भाजपा में जोरदार टकराव, सियासी तनाव बढ़ा
भाजपा कार्यकर्ताओं ने भोपाल स्थित बीजेपी दफ्तर के पास दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh ) पर तंज कस्ते हुए एक पोस्टर लगाया था। इस पोस्टर को लेकर रविवार को बवाल हो गया।
मीनाक्षी नटराज को लेकर मध्य प्रदेश में हुए सियासी घटनाक्रम के बाद पोस्टर वॉर देखने को मिल रहा है. भाजपा कार्यालय के सामने लगे दिग्विजय सिंह के पोस्टर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया.
भोपाल में BJP कार्यालय के सामने लगे दिग्विजय सिंह के पोस्टर को लेकर बवाल, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फाड़ा, सियासी घमासान तेज
भोपाल, मध्य प्रदेश। राज्यसभा नामांकन विवाद के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में सियासी तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब सड़क से लेकर पोस्टर वार तक पहुंच गया है। भोपाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय के सामने लगाए गए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ एक विवादित पोस्टर को लेकर बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। इस पोस्टर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया, जिसके बाद मौके पर जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन हुआ।
पोस्टर में क्या लिखा था, जिससे मचा विवाद?
भोपाल में भाजपा कार्यालय के सामने लगाए गए पोस्टर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की तस्वीर के साथ तीखे शब्दों में हमला किया गया था। पोस्टर में लिखा था—
“जब फैसला मन का न हो तो अदालत भी कटघरे में, सुप्रीम कोर्ट चोर है, EVM गलत है, चुनाव आयोग गलत है, सरकार गलत है और अब सुप्रीम कोर्ट भी गलत।”
इस पोस्टर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए हटाने की मांग की थी। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पोस्टर को फाड़ दिया गया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी हुई और कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।
कांग्रेस का आरोप और विरोध प्रदर्शन
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पोस्टर जानबूझकर राजनीतिक माहौल को खराब करने और दिग्विजय सिंह की छवि धूमिल करने के लिए लगाया गया था। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा की “पोस्टर पॉलिटिक्स” करार दिया और आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब है कि यह विवाद उस समय और गहरा गया जब कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव में लिया गया, जबकि भाजपा ने इसे पूरी तरह नियमों के अनुसार बताया है।
दिग्विजय सिंह का बयान बना विवाद की जड़
इस पूरे विवाद की शुरुआत दिग्विजय सिंह के उस बयान से मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि “सीट चोरी” के मामले में कई संवैधानिक संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा था कि इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी संदिग्ध है।
उनके इसी बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। भाजपा नेताओं ने इसे न्यायपालिका की अवमानना और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बताया, जबकि कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह के बयान को राजनीतिक प्रतिक्रिया करार दिया।
भाजपा का पलटवार, पोस्टर को बताया जनभावना
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि पोस्टर जनता की भावना को दर्शाता है। उनका आरोप है कि कांग्रेस नेता लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
भाजपा ने यह भी कहा कि जब सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणी की जाती है, तो उसका जवाब राजनीतिक तरीके से देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
कानूनी कार्रवाई की मांग, मामला पहुंचा दिल्ली तक
इस विवाद को लेकर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जैसे संवैधानिक संस्थान पर इस तरह की टिप्पणी गंभीर मामला है और इसके खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने इस संबंध में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ अवमानना का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। उनके इस कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री का समर्थन और राजनीतिक प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हैं और इन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है ताकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।
भोपाल में राजनीतिक माहौल गर्म
भोपाल में इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया है। एक ओर कांग्रेस लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे अपने खिलाफ दिए गए बयानों का जवाब बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल पोस्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है। राज्यसभा नामांकन विवाद पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है और ऐसे में दोनों दलों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है।
आगे क्या?
फिलहाल प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है और इस मुद्दे के शांत होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
भोपाल का यह पोस्टर विवाद अब सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी टकराव बनकर उभर रहा है, जिसका असर आने वाले समय में और गहराने की संभावना है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस