रेत माफिया बेखौफ: अवैध रेत परिवहन रोकने पहुंचे हेड कॉन्स्टेबल को ट्रैक्टर से कुचला, पसलियां टूटीं; बालाघाट में VIDEO बनाते समय हमला
बालाघाट में रेत माफियाओं ने कार्रवाई के लिए पहुंचे हेड कॉन्स्टेबल पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया है। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इसके बाद इलाज के लिए गोदिंया रेफर किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सर्जिकल स्पेशलिस्ट डॉ शुभम लिल्हारे ने बताया कि हेड कांस्टेबल राजेश्वर राहंगडाले की पसलियां टूट गई हैं. उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी. हालांकि सीटी स्कैन में इंटरनल ब्लीडिंग न होने की पुष्टि के बाद प्राथमिक उपचार देकर हालत स्थिर की गई और उन्हें बेहतर इलाज के लिए महाराष्ट्र के गोंदिया रेफर कर दिया गया.
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से अवैध रेत खनन और परिवहन से जुड़ी एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर प्रदेश में सक्रिय रेत माफियाओं के दुस्साहस और प्रशासन के सामने मौजूद चुनौती को उजागर कर दिया है। जिले के पलाकामथी क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन रोकने पहुंचे पुलिसकर्मियों पर कथित रूप से रेत माफिया ने हमला कर दिया। इस दौरान एक ट्रैक्टर चालक ने हेड कॉन्स्टेबल पर वाहन चढ़ा दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना में उनकी दो पसलियां टूट गईं और उन्हें तत्काल इलाज के लिए रेफर करना पड़ा।
यह घटना सिर्फ एक पुलिसकर्मी पर हमला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था को खुली चुनौती मानी जा रही है। जिस तरीके से अवैध रेत परिवहन रोकने पहुंचे पुलिस दल पर हमला हुआ, उसने खनन माफिया के बढ़ते हौसलों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची थी पुलिस टीम
जानकारी के अनुसार मंगलवार देर शाम पुलिस को पलाकामथी इलाके में अवैध रेत परिवहन की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर प्रधान आरक्षक राजेश्वर राहंगडाले और आरक्षक सुनील विश्वकर्मा मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम कथित रूप से अवैध तरीके से रेत ले जा रहे ट्रैक्टर की जांच करने और उसके परिवहन की पुष्टि करने पहुंची थी।
मौके पर पहुंचकर प्रधान आरक्षक राजेश्वर राहंगडाले ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान वे ट्रैक्टर और अवैध परिवहन का वीडियो भी रिकॉर्ड कर रहे थे ताकि साक्ष्य जुटाए जा सकें। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसी समय अचानक स्थिति बिगड़ गई।
बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर चालक ने वाहन रोकने के बजाय तेजी से आगे बढ़ा दिया और हेड कॉन्स्टेबल को अपनी चपेट में ले लिया। घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग और पुलिसकर्मी संभल भी नहीं सके।
ट्रैक्टर से कुचलने के बाद मचा हड़कंप
जैसे ही प्रधान आरक्षक ट्रैक्टर की चपेट में आए, मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल पुलिसकर्मी दर्द से तड़प उठे। साथ मौजूद पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें संभाला और अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने तत्काल अतिरिक्त बल बुलाया और इलाके में घेराबंदी शुरू कर दी ताकि आरोपी मौके से फरार न हो सके।
सूत्रों के मुताबिक, हमला सुनियोजित था या घबराहट में हुआ, इसकी जांच अभी जारी है। हालांकि पुलिस इसे गंभीर आपराधिक घटना मानते हुए कार्रवाई कर रही है।
दो पसलियां टूटीं, अंदरूनी चोटें भी आईं
गंभीर रूप से घायल प्रधान आरक्षक राजेश्वर राहंगडाले को पहले बालाघाट जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार किया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उनकी हालत गंभीर बताते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया।
इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र के गोंदिया स्थित यूनाइटेड अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार उनकी दो पसलियां फ्रैक्चर हुई हैं और शरीर में अंदरूनी चोटें भी हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंदरूनी रक्तस्राव और फेफड़ों पर असर का खतरा बना रहता है, इसलिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
इलाज के लिए पुलिस ने बनाया विशेष कॉरिडोर
घायल पुलिसकर्मी को समय पर इलाज दिलाने के लिए पुलिस प्रशासन ने त्वरित व्यवस्था की। बालाघाट से गोंदिया तक विशेष ट्रैफिक कॉरिडोर बनाया गया ताकि एंबुलेंस बिना बाधा अस्पताल पहुंच सके।
इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहे। बताया गया कि पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी घायल प्रधान आरक्षक के साथ रवाना हुए और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की।
प्रशासन की इस तत्परता की स्थानीय स्तर पर सराहना भी की जा रही है क्योंकि गंभीर हालत में हर मिनट महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
अगले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण
सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप के अनुसार घायल पुलिसकर्मी की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन चोटों की प्रकृति को देखते हुए अगले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार पसलियों में फ्रैक्चर होने के साथ अंदरूनी चोटें भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में श्वसन संबंधी जटिलताओं और अन्य जोखिमों पर लगातार नजर रखनी पड़ती है।
अस्पताल की मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त विशेषज्ञों की मदद भी ली जा सकती है।
पुलिस की घेराबंदी, आरोपी चालक गिरफ्तार
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने इलाके में नाकाबंदी कर दी और ट्रैक्टर चालक की तलाश शुरू कर दी। कुछ ही समय में आरोपी को पकड़ लिया गया।
लालबर्रा थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसमें अवैध उत्खनन, शासकीय कार्य में बाधा डालना, जानलेवा हमला और अन्य संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि ट्रैक्टर में रेत कहां से लाई जा रही थी, परिवहन के दस्तावेज वैध थे या नहीं और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।
अवैध रेत खनन फिर बना बड़ा सवाल
मध्यप्रदेश के कई जिलों में अवैध रेत खनन लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। नदियों से अवैध उत्खनन, बिना अनुमति परिवहन और कार्रवाई करने वाली टीमों पर हमले जैसी घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन केवल राजस्व हानि का मामला नहीं है, बल्कि इससे पर्यावरण, नदी तंत्र और स्थानीय संसाधनों पर भी गंभीर असर पड़ता है।
बालाघाट की यह घटना बताती है कि जब कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मी भी निशाने पर आने लगें, तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि अवैध खनन रोकने वाली टीमों को पर्याप्त सुरक्षा, अतिरिक्त बल और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियानों में बॉडी कैमरा, ड्रोन निगरानी और संयुक्त कार्रवाई मॉडल अपनाने की जरूरत है ताकि जोखिम कम किया जा सके।
फिलहाल घायल प्रधान आरक्षक का इलाज जारी है, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। वहीं इस घटना ने प्रदेश में सक्रिय अवैध रेत कारोबार और उससे जुड़े नेटवर्क पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस