सब-इंस्पेक्टर मुनेश्वर भगत! घायल फरियादी को दी धमकियां वर्दी की दबंगई या न्याय का गला घोंटने की साजिश?
शाजापुर जिले के कालापीपल थाना क्षेत्र में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जानलेवा हमले में घायल फरियादी ने सब-इंस्पेक्टर मुनेश्वर भगत पर धमकाने के आरोप लगाए हैं। फरियादी का कहना है कि उसे मीडिया से दूरी बनाने और मामला वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है। आरोप है कि पुलिस ने हमले में सख्त धाराएं लगाने में भी लापरवाही बरती। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश है और लोगों ने निष्पक्ष जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अजय राज केवट माही
कालापीपल थाने से सामने आया चौंकाने वाला मामला
घायल फरियादी ने सब-इंस्पेक्टर पर लगाए गंभीर आरोप
“मामला वापस लो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा” — धमकी का दावा
जानलेवा हमले के बाद भी नहीं लगी सख्त धाराएं
इंसाफ के बजाय पुलिसिया दबाव का आरोप
शाजापुर जिले के कालापीपल थाना क्षेत्र से कानून और व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। खबर के प्रकाशन के बाद सब-इंस्पेक्टर मुनेश्वर भगत इस कदर बौखला गए कि अब वह खुद ही फरियादी को धमकाने पर उतर आए हैं।
जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल फरियादी इस समय अस्पताल के पीपुल्स हॉस्पिटल में जिंदगी और दर्द से जूझ रहा है, लेकिन उसे इंसाफ देने के बजाय पुलिसिया दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
“चुप रहो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा मुनेश्वर भगत पर आरोप
वही, फरियादी का आरोप है की मुझे साफ तौर पर धमकाया जा रहा है कि मीडिया व पत्रकारों से मामला वापस ले ले, नहीं तो उसे और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सवाल यह है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो आम आदमी जाए तो जाए कहां?
हमला झेला, अब पुलिस का डर!
फरियादी पहले ही चाकू से हुए जानलेवा हमले में घायल हो चुका है। हाथ में गंभीर चोटों के बावजूद पुलिस ने सख्त धाराएं लगाने में लापरवाही दिखाई। और अब जब सच्चाई उजागर हुई, तो उसी फरियादी को डराकर मामला दबाने की कोशिश की जा रही है।
वर्दी की आड़ में ‘तानाशाही’?क्या यही है कानून का राज?
क्या पुलिस अब अपराधियों की ढाल बनकर पीड़ितों को ही कुचलने में लगी है?
मुनेश्वर भगत पर फरियादी द्वारा गलाए गए आरोप पुलिस विभाग की साख पर सीधा हमला हैं
वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी मिलीभगत या मजबूरी
अब तक इस पूरे मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह चुप्पी किसी बड़ी मिलीभगत का संकेत है? या फिर सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है?
जनता में उबाल कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। लोगों का साफ कहना है कि अगर घायल फरियादी भी सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा? शेष खबर अगले अंक में लगातार,,,,
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस