AAP को झटका, राघव चड्ढा समेत 7 बागी सांसदों की बीजेपी में एंट्री को मिली राज्यसभा सभापति से मंजूरी
AAP MP in BJP: राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को सोमवार (27 अप्रैल) को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया। अससे उच्च सदन में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सदस्यों की संख्या 10 से घटकर तीन रह गई। साथ ही राज्यसभा में BJP सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है
AAP की राज्यसभा में संख्या घटकर 3 रह गई अरविंद केजरीवाल की पार्टी को बड़ा नुकसान।
सांसदों का आरोप—पार्टी मूल्यों से भटकी आप बागी नेताओं ने फैसले को वैचारिक बताया।
नई दिल्ली: देश की राजनीति में सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जिसने संसद के उच्च सदन राज्यसभा की ताकत का संतुलन बदल दिया। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में मर्जर को राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद न केवल AAP को बड़ा झटका लगा है, बल्कि केंद्र की राजनीति में BJP की स्थिति और मजबूत हो गई है।
AAP की ताकत घटी, BJP और मजबूत
इस फैसले के बाद राज्यसभा में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी की संख्या घटकर सिर्फ 3 सांसदों तक रह गई है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जो उच्च सदन में उसकी स्थिति को पहले से ज्यादा प्रभावशाली बनाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले विधायी फैसलों और बिल पास कराने में BJP को और मजबूती देगा।
???? किन सांसदों ने बदला पाला
AAP छोड़कर BJP में शामिल होने वाले सात सांसदों में प्रमुख नाम शामिल हैं:
राघव चड्ढा
अशोक मित्तल
हरभजन सिंह
संदीप पाठक
विक्रमजीत साहनी
स्वाति मालीवाल
राजिंदर गुप्ता
राज्यसभा की आधिकारिक सूची के अनुसार, ये सभी अब BJP के सांसद के रूप में दर्ज किए जा चुके हैं।
AAP की आपत्ति और कानूनी पहल
इस घटनाक्रम के बाद AAP ने इसे चुनौती देने की कोशिश की। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने राज्यसभा सभापति को याचिका सौंपते हुए इन सातों सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी।
AAP का तर्क था कि यह दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) का उल्लंघन है और ऐसे में इन सांसदों की सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए। हालांकि, सभापति ने मर्जर को वैध मानते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
मर्जर के पीछे क्या वजह बताई गई?
इन सातों सांसदों ने AAP छोड़ते समय पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि:
पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों से भटक गई है
पारदर्शिता और ईमानदारी जैसे मूल मूल्य अब कमजोर पड़ गए हैं
निर्णय लेने की प्रक्रिया में लोकतांत्रिक भावना की कमी है
इन आरोपों के आधार पर उन्होंने BJP में शामिल होने का फैसला लिया।
संवैधानिक और राजनीतिक पहलू
भारत में दल-बदल कानून के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो उसे “मर्जर” माना जाता है और उन पर अयोग्यता लागू नहीं होती।
माना जा रहा है कि AAP के इन सात सांसदों का कदम इसी प्रावधान के तहत वैध ठहराया गया है, जिसके कारण राज्यसभा सभापति ने इसे मंजूरी दी।
राजनीतिक असर और संभावित परिणाम
इस पूरे घटनाक्रम के कई बड़े राजनीतिक असर सामने आ सकते हैं:
1. BJP की बढ़ती ताकत:
राज्यसभा में संख्या बढ़ने से BJP को महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराने में आसानी होगी।
2. AAP की साख पर असर:
राष्ट्रीय स्तर पर AAP की छवि और संगठनात्मक मजबूती पर सवाल उठ सकते हैं।
3. विपक्षी एकता पर असर:
यह घटनाक्रम विपक्षी दलों के बीच अविश्वास को बढ़ा सकता है और गठबंधन की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
4. भविष्य के राजनीतिक समीकरण:
अन्य दलों में भी टूट-फूट की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे आने वाले चुनावों में नए समीकरण बन सकते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
हालांकि इस फैसले के बाद BJP की ओर से इसे “स्वागत योग्य कदम” बताया जा रहा है, वहीं AAP इसे लोकतंत्र के खिलाफ करार दे रही है।
AAP नेताओं का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं और इसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
क्या आगे होगा?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है।
AAP अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है
संसद में इस मुद्दे पर बहस हो सकती है
अन्य विपक्षी दल भी इस पर अपनी रणनीति तय करेंगे
AAP के सात राज्यसभा सांसदों का BJP में शामिल होना केवल एक दल-बदल नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में एक बड़ा संकेत है। यह न केवल पार्टियों की आंतरिक स्थिति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण कितनी तेजी से बदल सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं है और परिस्थितियों के अनुसार समीकरण बदलते रहते हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस