ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे MLA, पुलिस से झूमाझटकी; ‘नारी शक्ति वंदन’ पर हंगामा, कांग्रेस का तंज—‘शेरनी’ से हारकर लाए बिल’
मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन’ पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर सदन से वॉकआउट किया
भोपाल विधानसभा में ‘नारी शक्ति वंदन’ पर घमासान: कांग्रेस का वॉकआउट, गेहूं के गट्ठे के साथ पहुंचे विधायक, बीजेपी ने साधा पलटवार,विशेष सत्र की शुरुआत से ही गरमाया माहौल
भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’ जैसे अहम विषय पर चर्चा के लिए बुलाया गया, लेकिन सत्र शुरू होते ही सदन का माहौल गरमा गया। महिलाओं के सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा की उम्मीद थी, मगर यह सत्र राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आया।
सत्र की शुरुआत के साथ ही बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए। जहां एक ओर सरकार महिला आरक्षण को लेकर अपने संकल्प को ऐतिहासिक बता रही थी, वहीं कांग्रेस ने प्रक्रिया और नीयत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए।
महिला आरक्षण पर टकराव, कांग्रेस का वॉकआउट
सदन में परिसीमन प्रक्रिया के बाद महिलाओं को आरक्षण देने के शासकीय संकल्प पर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस ने मांग रखी कि मौजूदा परिसीमन के आधार पर ही महिलाओं को तुरंत आरक्षण दिया जाए।
लेकिन जब इस प्रस्ताव पर चर्चा नहीं कराई गई, तो कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन के बाहर जोरदार नारेबाजी की और सरकार पर महिला मुद्दों को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया।
बीजेपी का पलटवार: “चर्चा से भाग रही कांग्रेस”
कांग्रेस के वॉकआउट पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
उन्होंने कहा,
“आज महिलाओं के मुद्दे पर चर्चा से बचने के लिए कांग्रेस सदन से भाग रही है। आने वाले समय में जनता इन्हें सदन से बाहर कर देगी।”
बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस महिला आरक्षण पर राजनीति कर रही है, जबकि सरकार इसे लागू करने के लिए गंभीर है।
गेहूं का गट्ठा लेकर पहुंचे कांग्रेस विधायक, मचा हंगामा
सत्र के दौरान सबसे अलग और ध्यान खींचने वाली घटना कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह से जुड़ी रही। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ विधानसभा पहुंचना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने मंत्रालय के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।
अभिजीत शाह का कहना था कि उन्होंने ट्रैक्टर के लिए पास बनवाया था, जबकि पुलिस ने इसकी अनुमति से इनकार कर दिया। इस दौरान पुलिस और विधायक के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई।
इसके बाद अभिजीत शाह गेहूं का गट्ठा लेकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें सदन के अंदर गेहूं ले जाने से रोक दिया।
किसानों के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना
अभिजीत शाह ने आरोप लगाया कि प्रदेश के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा,
“जब केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, तो किसानों को उचित दाम क्यों नहीं मिल रहा? किसान मजबूरी में ₹2000 में गेहूं बेचने को मजबूर हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है।
इस घटना ने महिला आरक्षण के मुद्दे के बीच किसानों की समस्या को भी केंद्र में ला दिया।
मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी पर विपक्ष के सवाल
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री सदन में मौजूद नहीं हैं।
उन्होंने कहा,
“कांग्रेस महिला आरक्षण तुरंत लागू करना चाहती है, लेकिन बीजेपी ने परिसीमन का पेच फंसा दिया है।”
कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने भी कहा कि जब संकल्प मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया है, तो उन्हें सदन में उपस्थित रहना चाहिए।
सत्ता पक्ष का जवाब: “मुख्यमंत्री कार्यवाही सुन रहे”
विपक्ष के आरोपों पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सदन में दो उपमुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री मौजूद हैं।
वहीं, बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री अपने कार्यालय में बैठकर सदन की कार्यवाही सुन रहे हैं।
सत्ता पक्ष ने यह भी कहा कि सरकार पूरी तरह से इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और विपक्ष अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है।
सरकार का पक्ष: महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने ‘नारी शक्ति वंदन’ संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि यह महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा,
“यह संकल्प लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का है। केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं के सशक्तिकरण का रास्ता खोला है।”
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ रहा है।
कांग्रेस का सवाल: “जब लागू नहीं, तो चर्चा क्यों?”
कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने इस विशेष सत्र के औचित्य पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि जब यह विधेयक अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, तो इस पर चर्चा का क्या मतलब है।
उन्होंने कहा,
“सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा की जरूरत है। सरकार को उन विषयों पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे जनता सीधे प्रभावित होती है।”
राजनीतिक संदेश ज्यादा, समाधान कम
पूरे घटनाक्रम को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि ‘नारी शक्ति वंदन’ जैसे गंभीर विषय पर बुलाया गया यह विशेष सत्र राजनीतिक टकराव का मंच बन गया।
जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अधूरा और दिखावटी प्रयास करार दे रहा है।
मुद्दा बड़ा, लेकिन राजनीति हावी
भोपाल विधानसभा का यह विशेष सत्र यह दिखाता है कि बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर भी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना कितना कठिन होता जा रहा है।
महिला आरक्षण, किसानों की समस्या और शासन की प्राथमिकताओं जैसे मुद्दे एक ही मंच पर टकराते नजर आए। लेकिन सवाल यही है कि क्या इस सत्र से महिलाओं या किसानों को कोई ठोस समाधान मिलेगा, या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ‘नारी शक्ति वंदन’ का यह संकल्प जमीन पर कितना असर दिखाता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस