सीएम मोहन यादव का ऐतिहासिक फैसला कहा- घबराएं नहीं किसान भाई,50 फीसदी खराब चमक वाला गेहूं भी खरीदेगी सरकार

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि किसान कल्याण के लिए उनकी सरकार पूरी तरह समर्पित है। कम विकसित दाने की सीमा 6 से बढ़कर 10 प्रतिशत कर दी गई है।

सीएम मोहन यादव का ऐतिहासिक फैसला कहा- घबराएं नहीं किसान भाई,50 फीसदी खराब चमक वाला गेहूं भी खरीदेगी  सरकार

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 50% तक कम चमक वाला गेहूं खरीदने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन, बोनस, सिंचाई, डेयरी और किसान सहायता योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस किया है।

मध्यप्रदेश में किसानों के हित में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने ऐसा फैसला लिया है, जिसे कृषि क्षेत्र में मील का पत्थर माना जा रहा है। राज्य सरकार ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि 50 प्रतिशत तक खराब चमक (लस्टर लॉस) वाला गेहूं भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। यह निर्णय उन लाखों किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी फसल इस बार मौसम और पानी की कमी के कारण प्रभावित हुई है।

किसानों को भरोसा: “घबराएं नहीं, सरकार साथ है”

मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में अन्नदाता को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “किसान भाई घबराएं नहीं, सरकार हर स्थिति में आपके साथ खड़ी है।” इस बयान ने किसानों के बीच विश्वास को और मजबूत किया है।

दरअसल, कई जिलों में इस बार गेहूं की गुणवत्ता पर मौसम का असर पड़ा है। खासकर चमक में कमी और दानों के पूर्ण विकसित न होने की समस्या सामने आई थी। ऐसे में यह आशंका थी कि बड़ी मात्रा में फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी के योग्य नहीं मानी जाएगी। लेकिन सरकार के इस फैसले ने इस चिंता को दूर कर दिया है।

गुणवत्ता मानकों में भी बड़ा बदलाव

राज्य सरकार ने सिर्फ चमक को लेकर ही नहीं, बल्कि अन्य गुणवत्ता मानकों में भी राहत दी है।

कम विकसित (श्रीवल्ड) दानों की सीमा 6% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है

क्षतिग्रस्त दानों की सीमा भी बढ़ाई गई है

इन बदलावों का सीधा फायदा किसानों को मिलेगा, क्योंकि अब अधिक मात्रा में फसल खरीदी के दायरे में आ सकेगी।

किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

यह फैसला सिर्फ तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकार की व्यापक रणनीति है—किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना। मुख्यमंत्री लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं और कृषि क्षेत्र को लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं।

हाल ही में सरकार ने यह भी घोषणा की है कि भूमि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को उनकी जमीन के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। यह कदम किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

दलहन और तिलहन को बढ़ावा

Madhya Pradesh सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए भी कई बड़े कदम उठाए हैं।

उड़द की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाएगा

इसके अलावा किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा

सरकार का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है ताकि किसान सिर्फ गेहूं या धान पर निर्भर न रहें।

सरसों पर भावांतर योजना

सोयाबीन की सफलता के बाद अब सरसों पर भी भावांतर योजना लागू करने की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत बाजार भाव और MSP के बीच का अंतर सरकार द्वारा किसानों को दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप किसानों को सरसों का बेहतर मूल्य मिलने लगा है और कई जगहों पर MSP से अधिक दाम मिल रहे हैं।

2026: ‘किसान कल्याण वर्ष’

राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में घोषित किया है। इस वर्ष के दौरान किसानों के लिए कई विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं।

सस्ती बिजली और सिंचाई सुविधा

किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है

सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को रात की बजाय दिन में बिजली उपलब्ध हो

सोलर पंप पर भारी सब्सिडी

कृषक मित्र योजना के तहत किसानों को 90% सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं। इससे किसान बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनेंगे और लागत भी कम होगी।

खाद वितरण में तकनीकी सुधार

राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

यूरिया का भंडारण 5.90 लाख मीट्रिक टन है

अन्य उर्वरकों की भी पर्याप्त व्यवस्था है

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वितरण प्रणाली में किया गया है। अब तकनीक के माध्यम से किसानों को बिना लंबी लाइनों में लगे, अपने नजदीकी स्थान से खाद मिल सकेगी। इससे समय की बचत होगी और भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी।

डेयरी सेक्टर में नई क्रांति

मुख्यमंत्री का एक और बड़ा लक्ष्य मध्यप्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाना है। इसके लिए डेयरी सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश और योजनाएं लागू की जा रही हैं।

1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया

रोजाना दूध संग्रह 10 लाख किलोग्राम से अधिक पहुंच गया है

अब तक किसानों को 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है

किसानों को दूध के दाम में भी 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी का लाभ मिल रहा है।

कामधेनु योजना: डेयरी के लिए बड़ा अवसर

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सामान्य वर्ग को 25% सब्सिडी

SC/ST वर्ग को 33% सब्सिडी

40 लाख रुपये की डेयरी यूनिट पर 10 लाख रुपये तक का अनुदान

यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

गेहूं उपार्जन में रिकॉर्ड लक्ष्य

राज्य सरकार ने गेहूं खरीदी के लक्ष्य को भी बढ़ा दिया है:

लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन

उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन

इसके अलावा:

3516 उपार्जन केंद्र संचालित

8.55 लाख किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई

3.96 लाख किसानों से 16.60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया

2527 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है

किसानों को मिली बड़ी सुविधा

अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सिर्फ तहसील तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा। वे जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी फसल बेच सकते हैं। इससे परिवहन लागत कम होगी और सुविधा बढ़ेगी।

 कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। गेहूं खरीदी में गुणवत्ता मानकों में छूट देना, किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं लागू करना, डेयरी और सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देना—ये सभी कदम एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

यह कहना गलत नहीं होगा कि राज्य सरकार अब पारंपरिक कृषि से आगे बढ़कर एक समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में ये फैसले किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।