कलेक्टर पर भड़के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जनसुनवाई में लगाई सख्त फटकार:बोले -“ये कागज नहीं, लोगों की उम्मीदें हैं”

सिंधिया का सख्त रुख: जनसुनवाई में कलेक्टर को लगाई फटकार अव्यवस्थित आवेदनों पर भड़के Jyotiraditya Scindia

कलेक्टर पर भड़के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जनसुनवाई में लगाई सख्त फटकार:बोले -“ये कागज नहीं, लोगों की उम्मीदें हैं”

सिंधिया का सख्त रुख: जनसुनवाई में कलेक्टर को लगाई फटकार

अव्यवस्थित आवेदनों पर भड़के Jyotiraditya Scindia

मध्य प्रदेश के अशोक नगर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia का सख्त और संवेदनशील रूप सामने आया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने कलेक्टर साकेत मालवीय की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए मंच से ही फटकार लगा दी।

जनसुनवाई के दौरान आम नागरिक अपनी समस्याएं और उम्मीदें लेकर प्रशासन के पास पहुंचे थे। लेकिन जब कार्यक्रम समाप्त हुआ और आवेदनों को समेटा जाने लगा, तो उन्हें अव्यवस्थित तरीके से थैले में रखा जा रहा था। यह लापरवाही जैसे ही सिंधिया की नजर में आई, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया।

“ये कागज नहीं, लोगों की उम्मीदें हैं”

सिंधिया ने कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा,

“ये कागज नहीं हैं, ये लोगों की उम्मीदें हैं… हमारे लिए सोने के समान हैं।”

उनका यह बयान वहां मौजूद सभी लोगों को सोचने पर मजबूर कर गया। यह केवल नाराजगी नहीं, बल्कि प्रशासन को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराने का संदेश था।

आवेदन नहीं, लोगों की पीड़ा का दस्तावेज

सिंधिया ने आगे कहा कि ये आवेदन सिर्फ फाइलों का हिस्सा नहीं, बल्कि किसी की पीड़ा, संघर्ष और भरोसे का प्रतीक होते हैं। इनसे जुड़ी भावनाओं को समझना और गंभीरता से कार्यवाही करना प्रशासन का कर्तव्य है।

फटकार के बाद बदला माहौल

मंत्री की सख्ती के बाद तुरंत असर देखने को मिला। कलेक्टर ने सभी आवेदनों को व्यवस्थित तरीके से संजोया और प्रक्रिया को सुधारा।

यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा संदेश छोड़ गई—जिम्मेदारी सिर्फ काम निपटाने तक सीमित नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सम्मान के साथ उसे निभाना भी उतना ही जरूरी है।

लापरवाही देख खुद को रोक नहीं पाए सिंधिया

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब जनता द्वारा दिए गए आवेदनों को इकट्ठा किया जा रहा था, उस दौरान कलेक्टर साकेत मालवीय उन्हें एक थैले में बिना किसी क्रम के रख रहे थे। यह दृश्य जैसे ही सिंधिया की नजर में आया, वे तुरंत सक्रिय हो गए और मंच से ही उन्होंने नाराजगी जताई।

प्रशासन के लिए बड़ा संदेश

यह घटना केवल एक फटकार तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली के लिए एक बड़ा संदेश बन गई—जिम्मेदारी सिर्फ औपचारिकताएं पूरी करने तक नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भावनाओं, उम्मीदों और भरोसे का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है।