अब गिरफ्तार होंगी गिरिबाला सिंह? रात 1 बजे के बाद आया कोर्ट का फैसला:हाईकोर्ट बोला- ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और सबूत नहीं जांचे
भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच अब और तेज हो गई है. सीबीआई ने अदालत में कई अहम तथ्य रखते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई है. वहीं हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के बाद मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है और जांच पर सभी की नजर बनी हुई है.
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त
जबलपुर। पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल की ट्रायल कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत आखिरकार हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने बुधवार को करीब पौने तीन घंटे चली लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार देर रात एक बजे के बाद आदेश जारी किया गया, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का पर्याप्त परीक्षण किए बिना राहत दे दी थी।
यह मामला त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रदेश में गंभीर चर्चा छेड़ दी है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पूर्व जज गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी की संभावना काफी बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक त्विषा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। समर्थ सिंह पूर्व जज गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। शादी के कुछ महीनों बाद ही 12 मई 2026 को त्विषा अपने घर में फांसी पर लटकी मिली थीं। घटना के बाद कटारा हिल्स थाना भोपाल में दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौत को लेकर मामला दर्ज किया गया।
इसके बाद गिरिबाला सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए भोपाल की ट्रायल कोर्ट में आवेदन दिया था, जिसे मंजूर कर लिया गया था। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
व्हाट्सऐप चैट्स बने अहम सबूत
सुनवाई के दौरान मृतका के पिता की ओर से अदालत में कई गंभीर बातें रखी गईं। बताया गया कि त्विषा और उसके करीबी लोगों के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट्स में पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक प्रताड़ना, गर्भ को लेकर संदेह और गर्भपात के लिए दबाव डालने जैसी बातें सामने आई हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि मृतका के चरित्र पर लगातार संदेह किया जाता था और उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। अदालत को यह भी बताया गया कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका की छवि खराब करने का प्रयास किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई गंभीरता
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के अलावा शरीर पर छह अन्य चोटों के निशान भी मिले हैं। एम्स की फॉरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया कि ये चोटें शव को नीचे उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं आईं।
इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने अदालत से कहा कि मामला केवल आत्महत्या का नहीं बल्कि गंभीर परिस्थितियों वाला मामला है, जिसकी गहराई से जांच जरूरी है।
CBI और राज्य सरकार ने रखे मजबूत तर्क
मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है। सुनवाई के दौरान CBI और राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी पक्ष से कस्टोडियल इंटरोगेशन यानी हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
CBI ने अदालत को बताया कि कई डिजिटल सबूत, मोबाइल चैट्स, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच अभी बाकी है। एजेंसी ने यह भी कहा कि आरोपी जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे थे।
हाईकोर्ट ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि व्हाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों में गिरिबाला सिंह के खिलाफ स्पष्ट आरोप मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को तथ्यों की अनदेखी करते हुए जमानत दी गई हो, तो उस जमानत को निरस्त किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि गंभीर मामलों में जांच प्रभावित होने की आशंका और सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या अब हो सकती है गिरफ्तारी?
हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के बाद अब CBI को आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ मिल गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एजेंसी कभी भी गिरिबाला सिंह से पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर सकती है और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी संभव है।
हालांकि अंतिम निर्णय जांच एजेंसी की रणनीति और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। लेकिन कोर्ट के सख्त रुख ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि मामले को बेहद गंभीरता से देखा जा रहा है।
CBI किन बिंदुओं पर कर रही जांच?
CBI अब कई स्तरों पर जांच को आगे बढ़ा रही है। एजेंसी मोबाइल चैट्स, कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच कर रही है।
इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज, घटनास्थल की परिस्थितियां और घटना के समय मौजूद लोगों की गतिविधियों का भी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसी डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR के आधार पर कई लोगों से सवाल-जवाब की तैयारी की जा रही है।
पति समर्थ सिंह CBI रिमांड पर
मामले में आरोपी बनाए गए पति समर्थ Singh को अदालत में पेश करने के बाद CBI ने हिरासत में ले लिया है। कोर्ट ने उन्हें 29 मई तक CBI रिमांड पर भेजा है।
एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि 12 मई की रात आखिर क्या हुआ था, घटना के बाद समर्थ सिंह की गतिविधियां क्या थीं और फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में रहे।
CBI तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ उनके बयान का मिलान कर रही है।
आरोपी पक्ष के पास अब क्या विकल्प?
हाईकोर्ट से राहत खत्म होने के बाद अब आरोपी पक्ष के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला हुआ है। वे स्पेशल लीव पिटीशन यानी SLP दाखिल कर सकते हैं और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग कर सकते हैं।
यदि सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलती, तो जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई तेज कर सकती है।
प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना मामला
त्विषा शर्मा की मौत का मामला लगातार प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक इस केस पर नजर बनी हुई है। हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
अब सभी की नजर CBI की अगली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में संभावित कानूनी लड़ाई पर टिकी हुई है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस