डिलीवरी शून्य, फिर भी 250 जन्म प्रमाणपत्र जारी—स्वास्थ्य केंद्र बना फर्जीवाड़े का अड्डा, बड़े रैकेट का भंडाफोड़

मध्य प्रदेश के राजगढ़ के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर फरवरी 2026 में एक भी डिलीवरी नहीं हुई. फिर भी यहां पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए. अब पुलिस ने इस संगठित गिरोह का भंड़ाफोड़ किया है. इस मामले ने पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

डिलीवरी शून्य, फिर भी 250 जन्म प्रमाणपत्र जारी—स्वास्थ्य केंद्र बना फर्जीवाड़े का अड्डा, बड़े रैकेट का भंडाफोड़

फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा: बिना एक भी डिलीवरी के बने 250 बर्थ सर्टिफिकेट, स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा था रैकेट

राजगढ़ जिले में फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र बनाने वाले एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रामगढ़ के सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी डिलीवरी नहीं होने के बावजूद यहां से सैकड़ों जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए। जांच में सामने आया है कि आधार में नाम व जन्मतिथि सुधार कराने के लिए इस फर्जीवाड़े का सहारा लिया जा रहा था। पुलिस के अनुसार इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी है, जो स्वास्थ्य केंद्र में डाटा एंट्री ऑपरेटर था। अर्जुन ने ही पूरे नेटवर्क को संचालित किया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फरवरी माह में केंद्र पर एक भी डिलीवरी नहीं हुई, इसके बावजूद इस माह में 137 जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए। पुलिस ने अर्जुन से पूछताछ की तो उसने कई अहम राज उगले। पूछताछ में अर्जुन ने 250 से ज्यादा फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने की बात भी स्वीकार की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन और सरकारी स्वास्थ्य केंद्र का कंप्यूटर सिस्टम जब्त किया है। मामले में अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

जांच में सामने आया कि लोकसेवा केंद्र, आधार केंद्र और एमपी ऑनलाइन से जुड़े कुछ संचालकों के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाता था। जरूरतमंद लोग अपनी जानकारी व्हाट्सएप के जरिए भेजते थे और बिना किसी वैध दस्तावेज के सीआरएस पोर्टल पर एंट्री कर फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिए जाते थे। इसके बदले प्रति प्रमाण-पत्र 500 से 1000 रुपए तक वसूले जाते थे।

जिले में फर्जी अंकसूचियां बनाने का गोरखधंधा भी तेजी से बढ़ रहा है। जिले में दिल्ली बोर्ड सहित अन्य राज्यों के बोर्ड के नाम पर नकली अंकसूचियां तैयार की जा रही हैं। इन दस्तावेजों का उपयोग सरकारी नौकरी पाने तक में किया जा चुका है। ऐसे मामलों के उजागर होने के बाद भी इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में अभी भी ये बड़ी खामी हैं, जिनका फायदा उठाकर फर्जीवाड़ा किया गया है।

पुलिस जांच में पाया गया कि कई प्रमाण-पत्र 1 अप्रैल 2007 से पहले के बनाए गए, जबकि इस तरह के प्रमाण-पत्र जारी करना नियमों के विरुद्ध है। सबसे गंभीर बात ये कि स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल अधिकारी को इस पूरे फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं लगी। आरोपियों ने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से पोर्टल का उपयोग कर दस्तावेज अपलोड किए।

500 से 1000 रुपये लेकर प्रमाण पत्र बनाए

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी यहां से प्रमाण पत्र जारी किए गए. कुल मिलाकर 250 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि में संशोधन कराने के लिए ये फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करते थे. इसके लिए लोकसेवा केंद्र, आधार सेंटर और एमपी ऑनलाइन संचालकों के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाता था. प्रति प्रमाण पत्र 500 से 1000 रुपये तक लेकर बिना किसी वैध दस्तावेज के सीआरएस पोर्टल पर एंट्री कर प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते थे.

पुलिस कर रही है आगे की कार्रवाई

पुलिस ने फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने में उपयोग मोबाइल फोन और PHC रामगढ़ का कंप्यूटर सिस्टम जब्त कर लिया है. पुलिस ने बताया कि नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है. मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है. कई और गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है.