भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा कचरे के ढेर पर ही बैठ गए-सिरोंज सब्जी मंडी में गंदगी और अतिक्रमण पर अधिकारियों को मौके पर बुलाया
सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा नई सब्जी मंडी में फैली गंदगी और अतिक्रमण देखकर नाराज हो गए। विरोध जताने के लिए वे कचरे के ढेर पर बैठ गए और नगरपालिका, तहसीलदार व पुलिस अधिकारियों को मौके पर बुलाया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को मंडी की बदहाल स्थिति दिखाई और व्यवस्था पर सवाल उठाए। विधायक ने आरोप लगाया कि आढ़तियों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं, जिससे किसानों और छोटे व्यापारियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने तत्काल सफाई अभियान चलाने, अतिक्रमण हटाने और किसानों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।
मंडी में गंदगी और अतिक्रमण देखकर भड़के विधायक
विरोध जताने के लिए कचरे के ढेर पर बैठ गए उमाकांत शर्मा
नगरपालिका, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों को मौके पर बुलाया
एक करोड़ की लागत से बनी मंडी में अव्यवस्था पर उठाए सवाल
आढ़तियों के कब्जों से किसानों और छोटे व्यापारियों को परेशानी
सिरोंज। सिरोंज की नई सब्जी मंडी में फैली अव्यवस्था, गंदगी और अतिक्रमण को लेकर स्थानीय विधायक उमाकांत शर्मा का अनोखा विरोध देखने को मिला। मंडी की बदहाल स्थिति देखकर विधायक इतने नाराज हुए कि उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कचरे के ढेर पर ही बैठना उचित समझा। इसके बाद उन्होंने नगरपालिका प्रशासन, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों को तत्काल मौके पर बुलाकर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति दिखाई और जवाब तलब किया।
जानकारी के अनुसार, विधायक उमाकांत शर्मा को किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा फोन पर मंडी की खराब स्थिति और वहां व्याप्त समस्याओं की जानकारी दी गई थी। शिकायत मिलने के बाद विधायक बिना किसी पूर्व सूचना के नई सब्जी मंडी पहुंच गए। वहां पहुंचते ही उन्होंने देखा कि मंडी परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, नालियां गंदगी से भरी हैं और अतिक्रमण के कारण आम लोगों तथा किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मंडी की स्थिति देखकर विधायक ने नाराजगी जाहिर की और सीधे कचरे के ढेर पर बैठ गए। उनका यह कदम वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अमले के लिए एक बड़ा संदेश था। विधायक ने वहीं से संबंधित अधिकारियों को फोन कर मौके पर बुलाया। कुछ ही देर में नगरपालिका के अधिकारी, तहसीलदार और पुलिस विभाग के अधिकारी मंडी पहुंच गए।
अधिकारियों के पहुंचने पर विधायक ने उन्हें पूरे मंडी परिसर का निरीक्षण कराया। उन्होंने जगह-जगह फैली गंदगी, अव्यवस्थित कचरा प्रबंधन और अतिक्रमण की स्थिति को दिखाते हुए सवाल किया कि जब मंडी के विकास पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं, तो फिर यहां की हालत इतनी खराब क्यों है। उन्होंने कहा कि नई सब्जी मंडी में लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से सीसी सड़कें, दुकानें और अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण पूरा परिसर बदहाली का शिकार हो गया है।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि मंडी में कार्यरत कई आढ़तियों ने अपनी दुकानों के अलावा आसपास की खाली जगहों पर भी कब्जा कर रखा है। उन्होंने लोहे की जालियां लगाकर अतिरिक्त स्थान को गोदाम में तब्दील कर लिया है। इससे मंडी में आने वाले छोटे व्यापारियों और किसानों के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। इतना ही नहीं, सब्जी और फल नीलामी के लिए बनाए गए टीन शेड में भी बड़ी मात्रा में प्याज का भंडारण किया गया मिला, जिससे मंडी की मूल व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
विधायक उमाकांत शर्मा ने अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि मंडी किसानों और छोटे व्यापारियों की सुविधा के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण इसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
मंडी में मौजूद किसानों और ग्रामीण व्यापारियों ने भी विधायक के सामने अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि गांवों से सब्जियां और फल लेकर आने वाले किसानों को मंडी में बैठने तक की उचित जगह नहीं मिलती। अतिक्रमण के कारण अधिकांश स्थान पहले से घिरे हुए हैं, जिसके चलते छोटे विक्रेताओं को नालियों के किनारे या बदबूदार दीवारों के पास बैठकर अपना सामान बेचना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्राहक भी उनके पास आने से कतराते हैं। इससे उनकी बिक्री प्रभावित होती है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार सब्जियां और फल खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों और छोटे व्यापारियों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने प्रशासन से लंबे समय से सफाई और अतिक्रमण हटाने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
विधायक ने अधिकारियों से कहा कि मंडी की वर्तमान स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है बल्कि किसानों और व्यापारियों के हितों की भी अनदेखी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरे परिसर की तत्काल सफाई कराई जाए, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और सभी अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि मंडी में आने वाले किसानों, खरीदारों और व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके लिए बैठने की समुचित व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण और व्यवस्थित नीलामी स्थल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि व्यवस्थाएं सही नहीं हुईं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
अधिकारियों ने विधायक को आश्वस्त किया कि मंडी की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा। नगरपालिका प्रशासन ने सफाई अभियान चलाने और अतिक्रमण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया। वहीं पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भी संयुक्त रूप से निरीक्षण कर स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया।
विधायक उमाकांत शर्मा का कचरे के ढेर पर बैठकर किया गया यह विरोध क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से मंडी की समस्याओं की अनदेखी हो रही थी, लेकिन विधायक के इस कदम के बाद प्रशासन हरकत में आया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन कितनी जल्दी धरातल पर दिखाई देते हैं और मंडी की व्यवस्था में कितना सुधार होता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस