BJP विधायक प्रीतम लोधी पर बड़ा एक्शन, IPS अधिकारी को धमकाने के मामले में हाईकमान ने जारी किया आदेश : हेमंत खंडेलवाल ने 3 दिन में मांगा जवाब

शिवपुरी में थार से पांच लोगों को टक्कर मारने के मामले में बेटे के बचाव में करैरा एसडीओपी को धमकी देने वाले विधायक प्रीतम लोधी को भाजपा ने नोटिस जारी किया है। पार्टी नेतृत्व ने विधायक के आचरण को लेकर सख्त रूख अपनाते हुए उनसे तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही मामले की सूचना केंद्रीय नेतृत्व को भी दी हैं।

BJP विधायक प्रीतम लोधी पर बड़ा एक्शन,  IPS अधिकारी को धमकाने के मामले में हाईकमान ने जारी किया आदेश : हेमंत खंडेलवाल ने 3 दिन में मांगा जवाब

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी पर बड़ा एक्शन: IPS अधिकारी को धमकाने के मामले में पार्टी ने नोटिस जारी, 3 दिन में जवाब तलब

शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार मामला किसी राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आईपीएस अधिकारी को कथित तौर पर धमकी देने और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने से जुड़ा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक मामला पहुंचने के बाद यह कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश इकाई से मांगी थी, जिसके बाद संगठन स्तर पर यह नोटिस जारी हुआ।

बेटे के एक्सीडेंट के बाद विवाद की शुरुआत

पूरा मामला 16 अप्रैल को करैरा क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी की थार गाड़ी से एक गंभीर दुर्घटना हुई थी। घटना सुबह लगभग 7:30 बजे की बताई जा रही है, जब संजय परिहार अपने साथियों के साथ बाइक से करैरा जा रहे थे।

इसी दौरान आगे चल रही दो महिलाएं—सीता वर्मा और पूजा सोनी—पैदल जा रही थीं। आरोप है कि पीछे से तेज रफ्तार में आई थार गाड़ी, जिसे दिनेश लोधी चला रहे थे, ने पहले महिलाओं को और फिर बाइक सवारों को टक्कर मार दी। इस हादसे में कुल पांच लोग घायल हो गए।

घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दिनेश लोधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और वाहन को जब्त कर लिया था।

पुलिस कार्रवाई और वाहन जांच

पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि दुर्घटना में शामिल थार वाहन में कई नियमों का उल्लंघन किया गया था। गाड़ी पर ब्लैक फिल्म लगी हुई थी और हूटर भी पाया गया, जो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत प्रतिबंधित है।

कोर्ट के आदेश के बाद रविवार को दिनेश लोधी करैरा थाने पहुंचे, जहां उनसे मामले को लेकर पूछताछ की गई। इस दौरान एसडीओपी आयुष जाखड़ और थाना प्रभारी विनोद छावई मौजूद थे। पुलिस ने वाहन से जुड़े नियम उल्लंघन को देखते हुए चालान भी काटा।

बाद में विधायक प्रीतम लोधी ने बयान दिया कि उन्होंने स्वयं एसपी से कहकर अपने बेटे पर एफआईआर दर्ज करवाई और गाड़ी को पुलिस के हवाले करवाया।

एसडीओपी को धमकी का आरोप

विवाद ने तब तूल पकड़ लिया जब विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे करैरा के एसडीओपी आयुष जाखड़ के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में विधायक कथित रूप से कहते हैं कि वे एसडीओपी के बंगले को 10 हजार लोगों को ले जाकर गोबर से भरवा देंगे।

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि उनका “मुक्का पहले ढाई किलो का था, अब ढाई सौ किलो का हो गया है”, और वे अधिकारी को “बेचैन” कर देंगे। इस बयान के सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया।

विधायक ने एसपी से यह भी सवाल किया कि उन्हें दिल्ली से निर्देश कौन भेज रहा है—क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह या केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया—और यह भी पूछा कि ऐसे निर्देश केवल उन्हें ही क्यों दिए जा रहे हैं।

“करैरा तेरे डैडी का नहीं है” बयान पर विवाद

वीडियो में विधायक प्रीतम लोधी का एक और बयान सामने आया, जिसमें वे एसडीओपी से कहते हैं—“करैरा तेरे डैडी का नहीं है।” उन्होंने कहा कि करैरा उनका क्षेत्र है और वे वहां चुनाव भी लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अधिकारी में दम है तो उन्हें रोककर दिखाए।

इस बयान को लेकर विपक्ष और प्रशासनिक अधिकारियों ने गंभीर आपत्ति जताई है। इसे पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है।

भाजपा ने लिया सख्त रुख, नोटिस जारी

मामला तूल पकड़ने के बाद भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई की है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायक प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से देख रहा है क्योंकि इसमें एक जनप्रतिनिधि द्वारा पुलिस अधिकारी को कथित धमकी देने और सार्वजनिक रूप से विवादित बयान देने का आरोप है।

नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

विधायक का पक्ष

विवाद बढ़ने के बाद विधायक प्रीतम लोधी ने कहा है कि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने के बाद ही वे पार्टी के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे और उचित जवाब देंगे।

उन्होंने यह भी दोहराया कि उन्होंने कानून का सम्मान किया है और अपने बेटे के खिलाफ दर्ज एफआईआर में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया।

विपक्ष का हमला

इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा कांग्रेस पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाती रही है, लेकिन अब स्थिति यह है कि भाजपा के ही मंत्री और विधायक कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब “गुंडा पार्टी” बनती जा रही है, जहां जनप्रतिनिधियों को कानून का डर नहीं रह गया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल

इस घटना के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल पर भी विपक्ष लगातार निशाना साध रहा है।

पार्टी के भीतर भी यह चर्चा तेज है कि इस तरह के बयानों और घटनाओं से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर जब मामला सीधे पुलिस और कानून व्यवस्था से जुड़ा हो।

पिछोर विधायक प्रीतम लोधी का यह मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक अनुशासन, प्रशासनिक सम्मान और कानून व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है। भाजपा द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सबकी नजरें विधायक के जवाब और पार्टी की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पार्टी इस मामले में कितना सख्त रुख अपनाती है और क्या कोई बड़ा संगठनात्मक निर्णय लिया जाता है या नहीं।