सूरत के 220 से अधिक टेक्सटाइल मार्केटों को अशांत धारा से मुक्त किया जाए: CAIT-मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल एवं उप मुख्यमंत्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष भाई संघवी को पत्र भेजकर चम्पालाल बोथरा ने उठाई मजबूत कानूनी व धरातली मांग।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने गुजरात सरकार से सूरत के 220 से अधिक टेक्सटाइल मार्केटों को अशांत धारा (Disturbed Areas Act) के दायरे से बाहर करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी को पत्र लिखकर कहा कि सूरत के प्रमुख कपड़ा बाजार पूरी तरह व्यावसायिक क्षेत्र हैं, जहां 95% से अधिक लेनदेन एक ही समाज के व्यापारियों के बीच होते हैं और सांप्रदायिक विवाद की कोई स्थिति नहीं है।
सूरत के 220 से अधिक टेक्सटाइल मार्केटों को अशांत धारा से मुक्त किया जाए: CAIT
विशुद्ध व्यापारिक क्षेत्रों में अशांत धारा की बाधा अब तर्कसंगत नहीं; व्यापारियों पर बढ़ रहा है समय, खर्च और प्रशासनिक बोझ।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन एवं टेक्सटाइल व गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने सूरत के कपड़ा बाजारों में लागू अशांत धारा (Disturbed Areas Act) को लेकर गुजरात सरकार का ध्यान एक बेहद महत्वपूर्ण व्यावहारिक और कानूनी विषय की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल एवं
उप मुख्यमन्त्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष भाई संघवी को एक उच्च स्तरीय पत्र भेजकर सूरत के सभी स्थापित होलसेल कपड़ा बाजारों को इस कानून के दायरे से तत्काल बाहर करने की मांग की है।
धरातल की सच्चाई: 95% से अधिक लेनदेन एक ही समाज के बीच
कैट नेता चम्पालाल बोथरा ने धरातल की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा:सूरत के रिंग रोड, सलाबतपुरा, महिधरपुरा, लिंबायत तथा अन्य प्रमुख कपड़ा बाजार पूर्णतः व्यावसायिक क्षेत्र हैं। इस मार्केट विस्तार में 95% से अधिक व्यापारी स्थानीय बहुसंख्यक समाज से आते हैं, जिनके बीच प्रतिदिन दुकानों को किराये पर देने, रेंट एग्रीमेंट नवीनीकरण और खरीद-बिक्री का आपसी लेनदेन निरंतर चलता रहता है। चूंकि यह विशुद्ध कमर्शियल एरिया है, इसलिए यहाँ सांप्रदायिक या जनसांख्यिकीय विवाद का कोई अस्तित्व ही नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के कारण अपनों के बीच होने वाले सामान्य व्यापारिक लेनदेन पर भी सरकारी अनुमति की अनिवार्यता लागू है, जिससे होने वाले भारी आर्थिक नुकसान का सीधा शिकार यहाँ के स्थानीय और शांतिप्रिय व्यापारी ही हो रहे हैं।
कानूनी विसंगति: आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों में हो अंतर
चम्पालाल बोथरा ने कानूनी पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि अशांत धारा मूल रूप से संवेदनशील आवासीय क्षेत्रों (Residential Areas) में सामाजिक सौहार्द एवं जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इसके विपरीत, सूरत के कपड़ा बाजार पूरी तरह से 'होलसेल कमर्शियल हब' हैं, जहाँ कोई आवासीय स्वरूप नहीं है।
कानूनन, विशुद्ध व्यावसायिक संपत्तियों के नियमित ट्रांसफर और लीज डीड पर इस एक्ट की जटिलताओं को लागू रखना इसके मूल विधायी उद्देश्य के अनुकूल नहीं है। पिछले एक दशक से अधिक समय में यहाँ हजारों लेनदेन हुए हैं, लेकिन केवल व्यापारिक संपत्ति के हस्तांतरण के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ने का एक भी उदाहरण सामने नहीं आया है।
व्यापारियों पर बढ़ रहा है 'प्रक्रियात्मक और आर्थिक' बोझ
बोथरा ने बताया गया कि एक साधारण रेंट एग्रीमेंट या दुकान ट्रांसफर की अनुमति (NOC) मिलने में ही कम से कम 1 महीने का समय लग जाता है। इस व्यवस्था के कारण:
कानूनी विलंब: दुकान एवं कार्यालय के हस्तांतरण में अनावश्यक देरी होती है।
आर्थिक नुकसान: छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर वकीलों और दस्तावेजीकरण का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है।
प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण लालफीताशाही और बिचौलिया संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
निवेश पर असर रेंटल मार्केट की गति प्रभावित होने से करोड़ों रुपये के नए निवेश और बाजारों के पुनर्विकास की गति धीमी पड़ती है।
व्यापार सुगमता को ठेस: यह स्थिति सीधे तौर पर सरकार के 'Ease of Doing Business' के संकल्प को प्रभावित करती है।
CAIT की 5 प्रमुख मांगें:
1 मार्केटों को तत्काल मुक्ति: सूरत के सभी 220 से अधिक टेक्सटाइल मार्केट, शोरूम, कार्यालय और होलसेल व्यापारिक परिसरों को अशांत धारा के दायरे से तत्काल बाहर किया जाए।
2 विशेष व्यापारिक क्षेत्र: सूरत के इन प्रमुख कपड़ा बाजारों की महत्ता को देखते हुए इन्हें “विशेष व्यापारिक क्षेत्र” (Special Commercial Zone) घोषित किया जाए।
3 प्रक्रिया का सरलीकरण: व्यावसायिक संपत्तियों के किराया, हस्तांतरण एवं बिक्री संबंधी मामलों में एनओसी (NOC) प्रक्रिया को समाप्त अथवा अत्यंत सरल बनाया जाए।
4 टाइम-बाउंड ऑनलाइन व्यवस्था: व्यापारिक लेनदेन के लिए समयबद्ध, पारदर्शी और सिंगल-विंडो ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जाए।
5 पृथक नीति का निर्धारण: विशुद्ध व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए अलग नीति बनाकर उन्हें आवासीय क्षेत्रों से पृथक (अलग) श्रेणी में रखा जाए।
'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए बाधाएं हटाना जरूरी
चम्पालाल बोथरा ने अंत में जोर देकर कहा कि सूरत देश का सबसे बड़ा सिंथेटिक टेक्सटाइल एवं प्रमुख गारमेंट व्यापार केंद्र है, जो लाखों लोगों को रोजगार देता है। जब केंद्र एवं राज्य सरकारें व्यापार सुगमता, MSME विकास और निर्यात वृद्धि को आगे बढ़ा रही हैं, तब विशुद्ध व्यापारिक क्षेत्रों से ऐसी अप्रासंगिक प्रशासनिक बाधाओं को समाप्त करना समय की मांग है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल जी और कपड़ा नगरी सूरत की जमीनी हकीकत से वाकिफ गृह राज्य मंत्री श्री हर्ष संघवी जी इस विषय पर त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेकर व्यापारियों को बड़ी राहत प्रदान करेंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस