उमंग सिंघार के बयान से बवाल, धर्म के कॉलम में आदिवासी लिखो,बीजेपी ने बताया संविधान के खिलाफ,MP में जनगणना 'धर्म कोड' पर घमासान

मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के लिए अलग 'धर्म कोड' की मांग उठाकर विवाद खड़ा कर दिया है. बीजेपी ने इसे कांग्रेस की विभाजनकारी साजिश बताते हुए सिंघार पर केस दर्ज करने की मांग की है. जानें क्यों जरूरी है यह मुद्दा.

उमंग सिंघार के बयान से बवाल, धर्म के कॉलम में आदिवासी लिखो,बीजेपी ने बताया संविधान के खिलाफ,MP में जनगणना 'धर्म कोड' पर घमासान

जनगणना में धर्म के कॉलम को लेकर मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दी आदिवासियों को सलाह, मंत्री विश्वास सारंग ने ली आपत्ति.

भोपाल: मध्य प्रदेश में जनगणना को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दिए गए बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है. अमरकंटक में होली को लेकर हुए एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों से मांग की है कि, ''जनगणना के फार्म में धर्म के कॉलम में अपने नाम के आगे आदिवासी लिखें. यदि ऐसा न किया तो आपका आरक्षण, पट्टे सब निरस्त हो जाएंगे.'' उधर नेता प्रतिपक्ष के इस बयान पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. मंत्री विश्वास सारंग ने इसे आपराधिक षडयंत्र बताते हुए कहा है कि, ''नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.''

अब इस बयान पर शुरू हुआ विवाद

नेता प्रतिपक्ष हाल ही में होली पर हुए कार्यक्रम में शामिल होने अमरकंटक पहुंचे. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए थे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि, ''जनगणना पूरे देश के अंदर हो रही है, जनगणना के 7 वे कॉलम में भरना है प्रकृति दम आदिवासी... यदि यह नहीं भरोगे तो आपको किसी और धर्म में डाल दिया जाएगा. आपका आरक्षण, अधिकार, पेशा कानून खत्म हो जाएगा. सभी अधिकार पट्टे खत्म हो जाएंगे.

यदि यह खत्म हो जाएगा तो आदिकाल से निवास करने वाले आदिवासियों की पहचान कैसे बचेगी. आने वाला यह साल अगर आपने 25 लाख फार्म भरे हैं, तो मध्य प्रदेश में 50 लाख फॉर्म भरकर जाना चाहिए. ताकि दिल्ली में बैठी हमारी बहन राष्ट्रपति को अहसास हो कि मध्य प्रदेश के सवा 2 करोड़ आदिवासियों, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासियों ने यह मांग उठाई है कि उन्हें दर्जा मिलना चाहिए. यदि आज आप चुप रह गए, तो आगे कोई सुनने वाला नहीं रहेगा.''

सिंघार बोले- अलग पहचान के लिए राष्ट्रपति को भेजें 50 लाख आवेदन

उमंग सिंघार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आदिवासी समुदाय को अन्य धर्मों के अंतर्गत गिना जाता रहा, तो उनकी विशिष्ट पहचान हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी. उन्होंने तर्क दिया कि आदिवासियों की अपनी अलग परंपराएं और संस्कृति हैं, जिन्हें सुरक्षित रखने के लिए जनगणना में अलग धर्म कोड मिलना अनिवार्य है. सिंघार ने प्रदेश भर के आदिवासियों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश से कम से कम 50 लाख आवेदन राष्ट्रपति को भेजे जाने चाहिए ताकि यह संदेश स्पष्ट रूप से केंद्र तक पहुंचे.

मंत्री बोले- दर्ज हो आपराधिक प्रकरण

उधर, नेता प्रतिपक्ष के बयान पर मोहन सरकार में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि, ''जनगणना संवैधानिक प्रकिया है और यदि इसमें इस तरह से कोई गड़बड़ी की कोशिश करता है, तो यह सीधे-सीधे अपराध है. गैरकानूनी कृत्य के जरिए वे सरकारी काम में बाधा डालने का काम कर रहे हैं और वह इसमें षडयंत्र कर रहे हैं. इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए

कांग्रेस हमेशा विघटन की राजनीति करती रही है. संवैधानिक प्रक्रिया में रोड़े अटकाना आपराधिक कृत्य है. राहुल गांधी तो बहुत संविधान और संविधान के संरक्षण की बात करते हैं. क्या वे नेता प्रतिपक्ष को हटाएंगे? जनगणना जैसे संवैधानिक व्यवस्था में इस तरह से प्लानिंग कर इसमें छेड़छाड़ की जा रही है, इससे बड़ा षडयंत्र कोई और नहीं हो सकता. भोले भाले आदिवासियों को इस तरह से बरगलाने की कोशिश की जा रही है, वह आपत्तिजनक है और गैरकानूनी भी है.''

मध्यप्रदेश की सत्ता का 'आदिवासी' गणित

यह पूरा विवाद मध्यप्रदेश के चुनावी और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है. राज्य की कुल आबादी में करीब 21 से 22 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला आदिवासी समुदाय सत्ता की चाबी माना जाता है. विधानसभा की 230 सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जबकि 80 से अधिक सीटों पर यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐतिहासिक रूप से जिस भी दल को आदिवासी क्षेत्रों में बढ़त मिली है, प्रदेश की सत्ता उसी के पास रही है. ऐसे में 'धर्म कोड' का यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है.