चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा-राम मंदिर केस में कल 8 पर दर्ज हुई थी FIR, आरोपों के बाद से था दबाव

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा-राम मंदिर केस में कल 8 पर दर्ज हुई थी FIR, आरोपों के बाद से था दबाव

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर के बाद अब ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। दोनों के साथ ही गोपाल ने भी इस्तीफा दिया है। हालांकि इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा घटनाक्रम: चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, 8 आरोपी गिरफ्तार

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में कथित चोरी का मामला अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। विशेष जांच दल (SIT) की जांच और आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, चंदा और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद दोनों पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का दबाव था, जिसके चलते उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया।

मामले की शुरुआत तब हुई जब मई के अंतिम सप्ताह में राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही दान राशि का मिलान किया। जांच के दौरान यह पाया गया कि दानपेटियों से निकलने वाली नकदी में लगातार कमी आ रही थी। जहां एक दानपेटी से सामान्यतः 7 से 8 लाख रुपये निकलते थे, वहीं कुछ समय से 500 रुपये की गड्डियों में कमी दिखाई देने लगी। संदेह गहराने पर ट्रस्ट ने नोट गिनने वाले कक्ष में गुप्त कैमरे लगवाए।

गुप्त कैमरों की फुटेज देखने पर कथित तौर पर सामने आया कि नोट गिनने वाले कुछ कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े होकर दृश्य को ढक देते थे, जबकि उनका साथी नोटों की गड्डियों से नकदी निकालकर कपड़ों में छिपा लेता था। जांच में यह भी दावा किया गया कि चोरी का दूसरा तरीका भी अपनाया जा रहा था। कर्मचारियों द्वारा नोटों की गड्डियों में अतिरिक्त नोट रख दिए जाते थे, जिससे बैंक में गड्डियों की संख्या के आधार पर वाउचर तैयार हो जाता। बाद में बैंक में जमा कराने से पहले अतिरिक्त नोट निकाल लिए जाते थे, जिससे रिकॉर्ड और वास्तविक रकम में अंतर पकड़ में नहीं आता था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कथित हेराफेरी में वाउचर तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी अनुकल्प मिश्रा और उसके बहनोई लवकुश मिश्रा की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने लवकुश मिश्रा के घर से लगभग 10 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है। इसके अलावा, आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषण, जैसे झुमकी, नथ, बाली, कंगन और पायल भी चोरी किए जा रहे थे।

जांच में यह भी सामने आया कि नोट गिनने वाले कई कर्मचारी सिफारिश के आधार पर नियुक्त किए गए थे। आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को इस कार्य में लगाया था। सबसे बड़ी लापरवाही यह मानी जा रही है कि ड्यूटी समाप्त होने के बाद कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी, जिसका कथित रूप से फायदा उठाकर लंबे समय तक चोरी की जाती रही।

एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सभी आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। मुहर्रम के कारण अदालत में अवकाश होने से उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट छुट्टियों और अदालत के सामान्य समय के बाहर गिरफ्तारी, रिमांड और जमानत जैसे मामलों की सुनवाई करते हैं।

इस मामले पर योगी आदित्यनाथ ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जैसे ही आरोप सामने आए, राज्य सरकार ने तत्काल एसआईटी गठित कर जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलते ही एफआईआर दर्ज की गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अयोध्या करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और जनआस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का यह मामला अब जांच के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। पुलिस वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज और जब्त की गई नकदी के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे तथा नई गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।