NEET-NTA विवाद पर श्वेत पत्र की मांग: दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, बोले- छात्रों का भरोसा लौटाना जरूरी

नीट-यूजी मामले में कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने अपने पत्र में पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच की स्थिति जानकारी सार्वजनिक करने से छात्रों का व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।

NEET-NTA विवाद पर श्वेत पत्र की मांग: दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, बोले- छात्रों का भरोसा लौटाना जरूरी

नीट परीक्षा निरस्त होने से लाखों विद्यार्थी मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं। विद्यार्थियों के मन में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि पूर्व में हुए पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच में क्या प्रगति हुई तथा दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता Digvijaya Singh ने नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के मुद्दे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आए प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के मामलों को लेकर छात्रों के बीच गहरा अविश्वास पैदा हुआ है। ऐसे में सरकार को पारदर्शिता दिखाते हुए विस्तृत श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों का भरोसा दोबारा स्थापित हो सके।

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों में भारी चिंता और मानसिक तनाव का माहौल है। परीक्षा की तैयारी में वर्षों का समय और संसाधन लगाने वाले विद्यार्थियों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता केवल परीक्षा रद्द होना नहीं है, बल्कि यह है कि प्रश्नपत्र लीक जैसे गंभीर मामलों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है।

उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है और परीक्षा का पुनः आयोजन 21 जून को प्रस्तावित है। हालांकि जांच की प्रगति और उससे जुड़े तथ्यों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण छात्रों के बीच भ्रम और आशंकाएं लगातार बढ़ रही हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें देशभर के अनेक विद्यार्थियों और अभिभावकों से लगातार शिकायतें प्राप्त हुई हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले वर्षों में भी कई परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे, लेकिन जांच और कार्रवाई की स्थिति को लेकर कोई समेकित एवं आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी कारण सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर अफवाहों तथा अपुष्ट खबरों को बढ़ावा मिला है।

अपने पत्र में उन्होंने विशेष रूप से हजारीबाग में सामने आए कथित नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच यह चर्चा है कि मामले का प्रमुख आरोपी संजीव कुमार उर्फ मुखिया जमानत पर बाहर है। इसी प्रकार, कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि सीबीआई ने 2024 की परीक्षा से संबंधित मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। ऐसे मामलों में स्पष्ट और अधिकृत जानकारी उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों के मन में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई से क्लोजर रिपोर्ट को लेकर लिखित स्पष्टीकरण मांगा, तब एजेंसी ने अतिरिक्त समय की मांग की थी। दिग्विजय सिंह के अनुसार, ऐसी घटनाएं छात्रों के बीच नकारात्मक संदेश भेजती हैं और उन्हें यह महसूस होता है कि परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है।

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें पिछले आठ वर्षों के दौरान एनटीए द्वारा आयोजित सभी प्रमुख परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक, परीक्षा घोटालों अथवा अन्य अनियमितताओं की जानकारी शामिल हो। उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र केवल घटनाओं की सूची तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें प्रत्येक मामले में हुई कार्रवाई का पूरा विवरण भी होना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि श्वेत पत्र में यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि किन मामलों में जांच एजेंसियों ने जांच शुरू की, कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया, कितनों के खिलाफ आरोपपत्र दायर हुए और किन मामलों में जांच पूरी होने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई। इसके साथ ही यदि किसी मामले में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई हो तो उसके पीछे के कारणों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रत्येक आरोपी की वर्तमान स्थिति का भी उल्लेख किया जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यह बताया जाए कि कौन आरोपी जमानत पर है, किसके खिलाफ मुकदमा चल रहा है, किन्हें दोषी ठहराया गया है और किन मामलों में जांच अभी जारी है। इससे छात्रों और आम नागरिकों को यह विश्वास मिलेगा कि परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने पत्र में कहा कि भारत जैसे युवा देश में प्रतियोगी परीक्षाएं करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य का आधार होती हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो उसका सीधा असर छात्रों के मनोबल और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। लगातार परीक्षा रद्द होने, पेपर लीक की खबरों और जांच में देरी जैसी परिस्थितियों का असर छात्रों पर पड़ता है। कई छात्र लंबे समय तक तनाव और असमंजस की स्थिति में रहते हैं। ऐसे में सरकार को न केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए बल्कि छात्रों को तथ्यात्मक और आधिकारिक जानकारी भी समय-समय पर उपलब्ध करानी चाहिए।

पत्र के अंत में दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री से इस विषय की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाते हुए एक व्यापक श्वेत पत्र जारी करेगी, जिससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और देश के लाखों विद्यार्थियों का विश्वास दोबारा मजबूत होगा। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।