20 साल बाद मध्य प्रदेश में लौटेगी सरकारी बस सेवा: रक्षाबंधन से पहले सड़कों पर दौड़ेंगी 5206 बसें, आदिवासी और ग्रामीण इलाकों को मिलेगा बड़ा तोहफा
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत प्रदेश में 5206 नई बसें चलाने के निर्देश दिए हैं। इसकी शुरुआत इंदौर संभाग से होगी, जहां से स्थानीय, इंटरसिटी और 4 राज्यों के लिए अंतर्राज्यीय बसें चलेंगी।
मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग से 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' की शुरुआत होने जा रही है. मुख्यमंत्री की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, जुलाई से इंदौर में 150 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होगा. कई राज्यों में इस सेवा का विस्तार होगा
भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब दो दशक बाद एक बार फिर सरकारी बस सेवा की वापसी होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को घोषणा की कि प्रदेश में रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के दूरस्थ, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सुरक्षित एवं सुलभ सार्वजनिक परिवहन सुविधा पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं तो इस वर्ष रक्षाबंधन पर प्रदेश की बहनें राज्य परिवहन की बसों से अपने भाइयों के घर तक यात्रा कर सकेंगी।
विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई हिस्सों, विशेषकर आदिवासी अंचलों में आज भी लोगों को नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में लोगों को मजबूरी में लोडिंग वाहनों या अन्य असुरक्षित साधनों का सहारा लेना पड़ता है। नई बस सेवा शुरू होने के बाद इन इलाकों में आवागमन अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य परिवहन व्यवस्था आम नागरिकों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिस प्रकार सरकार प्रदेश में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर रही है, उसी प्रकार बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना भी उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने के लिए मजबूत परिवहन नेटवर्क आवश्यक है।
डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर पूर्व कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य परिवहन व्यवस्था को समाप्त करने की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में हुई थी। अब प्रदेश में आधारभूत संरचना का व्यापक विकास हो चुका है और समय की मांग है कि नागरिकों को बेहतर एवं विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जाए। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की परिकल्पना की गई थी, जिसे अब धरातल पर उतारा जा रहा है।
सरकार की योजना केवल प्रदेश के भीतर बस संचालन तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में मध्य प्रदेश का बस नेटवर्क अन्य राज्यों से भी जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को अंतरराज्यीय यात्रा की बेहतर सुविधा मिल सके। इससे व्यापार, रोजगार, शिक्षा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कभी मप्र राज्य सड़क परिवहन सेवा की बसें प्रदेशभर में संचालित होती थीं। लेकिन लगातार घाटे के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में दिसंबर 2002 में इस सेवा को बंद करने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2005 तक आते-आते प्रदेश से सरकारी बसों का संचालन पूरी तरह समाप्त हो गया। इसके बाद निजी बस ऑपरेटरों ने परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।
वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सत्ता संभालने के कुछ ही समय बाद प्रदेश में फिर से शासकीय नियंत्रण वाली सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने के निर्देश दिए थे। लगभग दो वर्षों की तैयारी, मार्ग निर्धारण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद अब यह योजना अंतिम चरण में पहुंच गई है और जल्द ही बसों का संचालन शुरू होने की संभावना है।
हालांकि, बसों के किराए को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश के निजी बस संचालक लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2021 के बाद से किराए में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जबकि डीजल की कीमतों के साथ-साथ रखरखाव और संचालन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में नई परिवहन व्यवस्था के तहत किराया निर्धारण सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
योजना के पहले चरण में प्रदेश के 1,164 मार्गों पर अगले दो वर्षों में लगभग 5,206 बसों का संचालन किया जाएगा। इनमें इंदौर क्षेत्र में 121 मार्गों पर 608 बसें, उज्जैन क्षेत्र में 120 मार्गों पर 371 बसें, भोपाल क्षेत्र में 104 मार्गों पर 398 बसें, जबलपुर क्षेत्र में 83 मार्गों पर 309 बसें, सागर क्षेत्र में 92 मार्गों पर 344 बसें, ग्वालियर क्षेत्र में 65 मार्गों पर 298 बसें तथा रीवा क्षेत्र में 35 मार्गों पर 184 बसें संचालित की जाएंगी।
सरकार ने क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित मार्गों की स्वीकृति संबंधी अधिसूचना भी जारी कर दी है। बस संचालन की निगरानी और यात्रियों की सुविधा के लिए इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) स्थापित किया जा रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से बसों की लोकेशन, समय-सारिणी और संचालन की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों तक लोगों की पहुंच आसान होगी। साथ ही निजी परिवहन पर निर्भरता भी कम हो सकती है। यदि योजना निर्धारित समय पर लागू होती है, तो लगभग 20 वर्षों बाद मध्य प्रदेश के लोगों को एक बार फिर सरकारी बस सेवा का लाभ मिलने लगेगा।
रक्षाबंधन के अवसर पर इस सेवा की शुरुआत होने की संभावना को देखते हुए प्रदेश के नागरिकों में उत्साह का माहौल है। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल न केवल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस