जन चौपाल की तैयारियों में बाधा डालने के आरोप में ग्राम पंचायत अधिकारी पवन तिवारी निलंबित, दबाव बनाने व अनुशासनहीनता पर बड़ी कार्रवाई
जालौन जिले में जन चौपाल की तैयारियों में बाधा डालने, उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने और बिना सूचना अनुपस्थित रहने के आरोप में ग्राम पंचायत अधिकारी पवन तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जन चौपाल कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारी
नोडल अधिकारी के दौरे से पहले व्यवस्था पर जोर
ग्राम पंचायत अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप
निर्देशों की अवहेलना और सहयोग न करने का मामला
उरई (जालौन)। जालौन जिले में जन चौपाल की तैयारियों में कथित रूप से बाधा डालने, उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने और अनुशासनहीन आचरण के गंभीर आरोपों के चलते ग्राम पंचायत अधिकारी पवन तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा उच्च स्तरीय रिपोर्ट और जांच के आधार पर की गई है, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद की संस्तुति, खंड विकास अधिकारी जालौन की रिपोर्ट तथा जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और मुख्य विकास अधिकारी कुमुदेंन्द्र कलाकर सिंह के निर्देश पर यह कठोर कदम उठाया गया है।
नोडल अधिकारी के भ्रमण कार्यक्रम में लापरवाही का मामला
जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा नामित नोडल अधिकारी एवं आईएएस अधिकारी इन्द्रविक्रम सिंह का जालौन भ्रमण कार्यक्रम प्रस्तावित था। इस दौरान विकास खंड जालौन की ग्राम पंचायत पहाड़पुरा और ग्राम पंचायत अकोड़ी दुबे में जन चौपाल का आयोजन किया जाना था।
इस जन चौपाल की अध्यक्षता स्वयं नोडल अधिकारी इन्द्रविक्रम सिंह द्वारा की जानी थी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
ग्राम पंचायत अधिकारी को दिए गए थे स्पष्ट निर्देश
ग्राम पंचायत पहाड़पुरा में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी पवन तिवारी को इस कार्यक्रम से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। उन्हें निर्देशित किया गया था कि—
चौपाल स्थल का उचित चयन किया जाए
ग्राम पंचायत की प्रगति पुस्तिका तैयार रखी जाए
गांव में बनी पानी टंकी का निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए
साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त रखी जाएं
शासन की योजनाओं की अद्यतन रिपोर्ट तैयार की जाए
लेकिन आरोप है कि पवन तिवारी ने इन निर्देशों का पालन गंभीरता से नहीं किया और तैयारियों में लापरवाही बरती।
दबाव बनाने और असहयोग का आरोप
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, पवन तिवारी पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कर्मचारी संघ के पदाधिकारी होने के प्रभाव का उपयोग करते हुए कार्यक्रम को किसी अन्य ग्राम पंचायत में स्थानांतरित कराने का दबाव बनाया।
इतना ही नहीं, उन्होंने अपने क्लस्टर की किसी भी ग्राम पंचायत में सहयोग न करने की मंशा भी जाहिर की, जिससे जन चौपाल की तैयारियों पर प्रतिकूल असर पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवहार न केवल अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, बल्कि सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसा गंभीर कृत्य भी माना गया है।
बिना सूचना के अनुपस्थित रहने से बढ़ी मुश्किलें
मामले को और गंभीर बनाते हुए जांच में यह तथ्य सामने आया कि पवन तिवारी 28 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक बिना किसी पूर्व सूचना के अपने कार्यक्षेत्र और ब्लॉक से अनुपस्थित रहे।
उनकी इस अनुपस्थिति के कारण न केवल जन चौपाल की तैयारियां प्रभावित हुईं, बल्कि नोडल अधिकारी के समक्ष शासन की योजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने में भी कठिनाई आई।
प्रशासन ने इसे गंभीर कर्तव्यहीनता मानते हुए सख्त रुख अपनाया।
प्रशासन ने लिया अनुशासनात्मक एक्शन
जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी पवन तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि उनके आचरण से सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई और यह सरकारी सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।
निलंबन अवधि में संबद्धता और जांच के आदेश
निलंबन के बाद पवन तिवारी को विकास खंड डकोर कार्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही, पूरे मामले की विस्तृत जांच सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) रामपुरा को सौंपी गई है।
जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वह 15 दिनों के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करें और सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।
जीवन निर्वाह भत्ते का प्रावधान
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान पवन तिवारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, बशर्ते कि वे किसी अन्य सेवा या व्यवसाय में संलग्न न पाए जाएं।
प्रशासन का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी योजनाओं की गंभीरता से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जन चौपाल जैसे कार्यक्रम सरकार की योजनाओं के सीधे क्रियान्वयन और जनता से संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही या बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय
इस कार्रवाई के बाद जिले में प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे अनुशासन स्थापित करने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे कर्मचारी संगठनों और प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव के रूप में भी देख रहे हैं।
जालौन जिले में ग्राम पंचायत अधिकारी पवन तिवारी के निलंबन का मामला स्पष्ट संदेश देता है कि सरकारी कार्यों में अनुशासन और जिम्मेदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जन चौपाल जैसे कार्यक्रमों में बाधा डालने या निर्देशों की अवहेलना करने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करने के मूड में है।
अब आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी, जिससे यह तय होगा कि आरोपों की वास्तविकता क्या है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस