71 वर्षों बाद खरतरगच्छ में ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण: विनयकुशल मुनि बने आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी, रायपुर में उमड़ा श्रद्धा का सागर-चम्पालाल बोथरा सूरत

रायपुर के इंदौर स्टेडियम में खरतरगच्छ सहस्त्राब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित भव्य समारोह में पन्यास प्रवर विनयकुशल मुनि जी म.सा. को 71 वर्षों बाद खरतरगच्छाधिपति आचार्य पद पर प्रतिष्ठित कर आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी म.सा. के रूप में अलंकृत किया गया। समारोह में देशभर से 6000 से अधिक श्रद्धालु, साधु-साध्वियां और अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर नवाचार्य को “युगाचार्य” पदवी से भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सहस्त्रावधान साधक हंसभद्र बाल मुनि जी को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया। आयोजन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और धार्मिक उत्साह ने इसे जैन समाज के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बना दिया।

71 वर्षों बाद खरतरगच्छ में ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण: विनयकुशल मुनि बने आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी, रायपुर में उमड़ा श्रद्धा का सागर-चम्पालाल बोथरा सूरत

रायपुर में इतिहास रचा गया : पन्यास प्रवर विनयकुशल मुनि जी बने खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी म.सा.

71 वर्षों बाद खरतरगच्छ में आचार्य पदारोहण का ऐतिहासिक अवसर, 6000 से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य समारोह संपन्न*

देश भर के सभी राज्यो से 2500 से अधिक श्रावक / श्राविका की रही उपस्थिति

खरतरगच्छ सहस्त्राब्दी वर्ष के अंतर्गत रायपुर के इंदौर स्टेडियम में आयोजित भव्य आचार्य पदारोहण महोत्सव जैन समाज के इतिहास का एक स्वर्णिम एवं अविस्मरणीय अध्याय बन गया। युगोत्तम तपस्वी, त्यागमूर्ति एवं वीतराग साधक पन्यास प्रवर पूज्य श्री विनयकुशल मुनि जी म.सा. (गणी महाराज) को विधिवत आचार्य पद पर प्रतिष्ठित कर खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी म.सा. नाम से अलंकृत किया गया।

यह ऐतिहासिक समारोह छतीसगढ़ श्रृंगार ,संयम सारथी, युगनायक, धर्मशिरोमणि खरतरगच्छाचार्य पूज्य आचार्य श्री जिन पीयूषसागरसूरीश्वर जी म.सा. की पावन निश्रा में तथा प.पू स्वाध्याय निमग्न,युगप्रभावक -धर्मप्रवर्तक आचार्य श्री जिन सम्यकरत्नसागरसूरीश्वर जी म.सा. की मंगलमयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। लगभग 71 वर्षों के पश्चात मोहनलाल सम्प्रदाय में खरतरगच्छ परंपरा में आचार्य पदवी प्रदान किए जाने का यह ऐतिहासिक अवसर जैन समाज के लिए गौरव एवं उत्साह का विषय बना।

देशभर के विभिन्न राज्यों से आए 6000 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति से इंदौर स्टेडियम श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। पूरा वातावरण जय जिनेन्द्र के जयघोष, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास से ओत-प्रोत रहा।

समारोह में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, दुर्ग सांसद श्री विजय बघेल, बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप तथा विधायक श्री राजेश मूणत सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर 169 उपवास की महान तपस्या करने वाले पूज्य वीरभद्र मुनि जी म.सा. (विराग मुनि जी ), सहस्त्रावधान साधक पूज्य हंसभद्र बाल मुनि जी म.सा. सहित विभिन्न सम्प्रदायों के अनेक साधु-साध्वियों की पावन उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया।

आचार्य पदारोहण की परंपरागत विधि के अंतर्गत पूज्य आचार्य श्री जिन पीयूषसागरसूरीश्वर जी म.सा. ने नवाचार्य के कानों में सूरी मंत्र का श्रवण कराकर आचार्य पद का विधि विधान सम्पन्न कराया । इसके पश्चात विशाल धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने नवाचार्य के प्रति श्रद्धा, भक्ति एवं मंगलभाव अर्पित किए।

परंपरानुसार लाभार्थी जयपुर गोलेच्छा परिवार द्वारा और अखिल भारतीय जैन श्वे. खरतरगच्छ महासंघ की काम्बली भेंट की गई। इस अवसर पर अखिल भारतीय खरतरगच्छ महासंघ, श्री अजमेर दादाबाड़ी जीर्णोद्धार समिति ट्रस्ट, बाड़मेर जैन श्रीसंघ सूरत एवं शितलवाड़ी जैन संघ (सूरत) द्वारा नवाचार्य को “युगाचार्य” पदवी से अलंकृत कर भावभीना अभिनंदन किया गया।

समारोह में श्री अजमेर दादाबाड़ी जीर्णोद्धार समिति ट्रस्ट के संयोजक श्री भीमराज बोहरा एवं अध्यक्ष श्री विक्रम पारख ,अखिल भारतीय खरतरगच्छ महासंघ की ओर से श्री रिखबचंद झारचूर,श्री ललित नाहटा, श्री पदम नाहटा, श्री कमलसिंह रामपुरिया, श्री धर्मेन्द्र मेहता, अमृतलाल जैन ,श्री बाबूलाल सकलेचा एवं श्री चम्पालाल बोथरा सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सूरत से श्री बाबूलाल सांकलेचा, श्री चम्पालाल बोथरा, श्री सम्पत सकलेचा, श्री पवन पारख, श्री उमेश सुराणा एवं श्री मनु मुसरफ सहित अनेक गणमान्य श्रावकों ने भाग लिया।

विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि आचार्य पदारोहण महोत्सव के पूर्व आयोजित सहस्त्रावधान कार्यक्रम में पूज्य हंसभद्र बाल मुनि जी म.सा., जो नवनियुक्त आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी म.सा. के शिष्यरत्न हैं, को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा एक हजार प्रश्नों एवं उत्तरों को क्रमबद्ध रूप से स्मरण, वर्गीकृत एवं पुनः प्रस्तुत करने की विलक्षण क्षमता के लिए विश्व रिकॉर्ड प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। इस उपलब्धि ने सम्पूर्ण जैन समाज को गौरवान्वित किया।

श्री चम्पालाल बोथरा ने बताया कि बाड़मेर जैन श्रीसंघ द्वारा नवाचार्य को “युगाचार्य” पदवी प्रदान करने की पहल जिनशासन के प्रति उनके अतुलनीय योगदान, आध्यात्मिक नेतृत्व, धर्मप्रभावना, संघ संगठन एवं अनमोल गुणों की अनुमोदना का प्रेरणादायी उदाहरण है। यह सम्मान सम्पूर्ण समाज की ओर से उनके धर्मकार्य, तप, त्याग एवं जिनशासन सेवा के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि आयोजन के अंतर्गत आयोजित स्वामी वात्सल्य, श्रद्धालुओं के आवास, भोजन एवं समस्त व्यवस्थाएँ अत्यंत उत्कृष्ट, सुव्यवस्थित एवं अनुकरणीय रहीं, जिसकी सभी उपस्थितजनों ने मुक्त कंठ से सराहना की।

इस अवसर पर आचार्य श्री जिन सम्यकरत्नसागरसूरीश्वर जी म.सा. ने 169 उपवास की महान तपस्या पूर्ण करने वाले पूज्य वीरभद्र मुनि जी म.सा. ( विराग मुनि जी )के प्रति विशेष अनुमोदना व्यक्त करते हुए भविष्य में उन्हें उपाध्याय पद प्रदान किए जाने की मंगलमयी भावना नव नियुक्त खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी म.सा. के समक्ष प्रकट की। इस घोषणा का धर्मसभा ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।

समारोह के अंत में नवनियुक्त खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनचंद्रसूरीश्वर जी म.सा. ने धर्म, संयम, तप, संस्कार एवं जिनशासन की प्रभावना को जीवन का मूल लक्ष्य बताते हुए समाज को एकता, सद्भाव, संस्कार एवं धार्मिक मूल्यों के संरक्षण हेतु निरंतर सक्रिय रहने का प्रेरणादायी संदेश दिया।

खरतरगच्छ सहस्त्राब्दी वर्ष में आयोजित यह भव्य आचार्य पदारोहण महोत्सव जैन इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में सदैव अंकित रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म, तप, त्याग, संघ संगठन और जिनशासन प्रभावना का प्रेरणास्रोत बनेगा।