डॉ. सरोज गुप्ता के खिलाफ जांच समिति ने पाया दोष, लेकिन सरकार मौन — हाईकोर्ट जबलपुर सख्त,सरकार से मांगा जवाब

शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर की प्राचार्या डॉ. सरोज गुप्ता दोषी पाए जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? — हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

डॉ. सरोज गुप्ता के खिलाफ जांच समिति ने पाया दोष, लेकिन सरकार मौन — हाईकोर्ट जबलपुर सख्त,सरकार से मांगा जवाब

शासकीय कॉलेज की जनभागीदारी समिति जैसे महत्वपूर्ण शासकीय निकाय के धन का हेरा फेरी करने वालों का कार्यवाही क्यों नहीं हुई सरकार दे जवाब - उच्च न्यायालय

वरिष्ठ प्राध्यापक होते हुए भी कनिष्ठ प्राध्यापक   सरोज गुप्ता को प्राचार्य का पद क्यों दिया गया सरकार दे जवाब - उच्च न्यायालय

जबलपुर,मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य पीठ, जबलपुर में आज याचिका क्रमांक WP 2244/2026 की प्राथमिक सुनवाई न्यायमूर्ति  मनिंदर सिंह भट्टी की खंडपीठ के समक्ष संपन्न हुई। यह मामला शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर में वरिष्ठता सूची में हेराफेरी, जनभागीदारी निधि का अनियमित हस्तांतरण जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिसकी जाँच उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित समिति ने की थी।

इस याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ता  नितिन कुमार शर्मा, जो शासकीय पं. दीनदयाल उपाध्याय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष हैं, ने महाविद्यालय की पूर्व प्रभारी प्राचार्या डॉ. सरोज गुप्ता के विरुद्ध गठित जाँच समिति की रिपोर्ट पर राज्य सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के विरुद्ध न्यायिक हस्तक्षेप की माँग की है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र कुमार शाह, अखिलेश प्रजापति, सतीश कोरी, रमेश प्रजापति ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखा।

याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्तागणों द्वारा न्यायालय को बताया गया कि उत्तरवादी क्रमांक 6  सरोज गुप्ता के विरुद्ध शिकायत पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जॉच समिति गठित किया था। जिसमें प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, मकरोनिया के प्राचार्य डॉ. ए.सी. जैन एवं प्रोफेसर डॉ. बिन्दु श्रीवास्तव शामिल थे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित इस द्वि-सदस्यीय जाँच समिति द्वारा दिनांक 19 जून, 2025 की विस्तृत जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि डॉ. सरोज गुप्ता द्वारा वरिष्ठता सूची में हेराफेरी कर स्वयं को प्राचार्य नियुक्त करवाया है। जॉच समिति ने यह भी पाया है कि डॉ. सरोज गुप्ता प्राचार्य के पद का दुरुपयोग कर महाविद्यालय की जनभागीदारी निधि से संबंधित दो करोड़ रुपये की एफडी को बिना अनुमति तुड़वाया है तथा एक निजी बैंक में चालू खाता खोल कर उसमें दो करोड़ रुपए जमा किया है। यह ज्ञात हो एफडी अर्थात सावधि खाता में बैंक ब्याज देता है लेकिन चालू खाता में बैंक कोई भी ब्याज नहीं देता है। इसतरह से दो करोड़ रुपए पर मिलने वाला लाखों रुपए वार्षिक ब्याज का कॉलेज की जनभागीदारी समिति को आर्थिक क्षति पहुंचा है। जनभागीदारी के खाते से अनियमित खरीदारी कर भुगतान किया गया है जैसे गंभीर आरोपों को प्रमाणित पाया गया था। जाँच रिपोर्ट को उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय द्वारा आगे की कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया, किंतु लगभग सात माह बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार या संबंधित विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जिससे व्यथित हो कर जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष नितिन शर्मा ने याचिका क्रमांक WP 2244/2026 दाखिल किया है।

आज की सुनवाई में न्यायमूर्ति  सिंह भट्टी ने याचिका की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समस्त प्रतिवादियों — मध्य प्रदेश राज्य (उच्च शिक्षा विभाग), उच्च शिक्षा आयुक्त, भोपाल, उच्च शिक्षा के अतिरिक्त संचालक, सागर संभाग, संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्य तथा डॉ. सरोज गुप्ता — को नोटिस जारी कर उनसे चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले को जनहित एवं शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

याचिकाकर्ता  नितिन शर्मा की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने अदालत में प्रस्तुत किया कि एक जनभागीदारी समिति एक शासकीय निकाय है जिसके अध्यक्ष होने के नाते उनका यह कर्तव्य है कि वह महाविद्यालय के संसाधनों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाएँ। राज्य सरकार द्वारा जाँच रिपोर्ट पर निष्क्रियता न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, बल्कि जनभागीदारी समिति जैसे लोक-हितैषी तंत्र के उद्देश्य को भी ध्वस्त करती है।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित की है, जो प्रतिवादियों द्वारा जवाब दाखिल करने के बाद नियत की जाएगी। इस निर्णय के माध्यम से अदालत ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और शैक्षिक संस्थानों में अनियमितताओं के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया त्वरित एवं प्रभावी होगी।