दिल्ली में नमामि गंगे महानिदेशक से जल सहेलियों की मुलाकात, यमुना संरक्षण पर रखे व्यापक सुझाव

नई दिल्ली में नमामि गंगे के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल से जल सहेलियों ने मुलाकात कर 500 किमी लंबी यमुना पदयात्रा से मिले सुझाव साझा किए। उन्होंने ई-फ्लो बढ़ाने, प्रदूषण नियंत्रण, अतिक्रमण हटाने, जल संचयन और वृक्षारोपण जैसे मुद्दे उठाए

दिल्ली में नमामि गंगे महानिदेशक से जल सहेलियों की मुलाकात, यमुना संरक्षण पर रखे व्यापक सुझाव

दिल्ली में नमामि गंगे महानिदेशक से जल सहेलियों की मुलाकात

500 किमी यमुना पदयात्रा के अनुभवों पर हुआ विस्तृत संवाद

यमुना चौपालों से जुटाए जनसुझाव महानिदेशक के समक्ष प्रस्तुत

उरई । नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल (महानिदेशक) राजीव कुमार मित्तल से जल सहेलियों ने मिलकर यमुना यात्रा में प्राप्त सुझावों पर उनके कार्यालय में विस्तृत संवाद किया। यह मुलाकात नई दिल्ली स्थित ध्यानचंद स्टेडियम परिसर में नमामि गंगे के कार्यालय में संपन्न हुई, जहां नदी संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

जल सहेलियों ने अपनी लगभग 500 किलोमीटर लंबी यमुना पदयात्रा के दौरान प्राप्त अनुभवों और जनसुझावों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर आयोजित ‘यमुना चौपालों’ में स्थानीय समुदाय, किसानों, महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था। इन्हीं चौपालों में सामने आए मुद्दों और सिफारिशों को जल सहेलियों ने दस्तावेज़ के रूप में तैयार कर महानिदेशक के समक्ष रखा।

प्रमुख सिफारिशों में यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) को सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जल की उपलब्धता बढ़ाना, औद्योगिक एवं घरेलू प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण, नदी किनारे अवैध अतिक्रमण को हटाना, जल संचयन संरचनाओं का विस्तार करना तथा दोनों तटों पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाना शामिल रहा। इसके अतिरिक्त आगरा, मथुरा और बटेश्वर जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों में यमुना जल की गिरती गुणवत्ता और उसके सामाजिक प्रभावों पर भी विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया गया।

जल सहेलियों ने यह भी बताया कि कई स्थानों पर नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है, जिससे न केवल जल गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है बल्कि स्थानीय आजीविका, पशुपालन और खेती पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने समुदाय आधारित जल प्रबंधन और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि नदी संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।

महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरतापूर्वक सुना और जल सहेलियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जमीनी पहलें नदी संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे वास्तविक समस्याओं और समाधान दोनों की स्पष्ट समझ मिलती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रस्तुत सिफारिशों का विभागीय स्तर पर परीक्षण कर उन्हें लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने आगे यह भी कहा कि नमामि गंगे के अंतर्गत यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए बहु-स्तरीय रणनीति पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें समुदाय की भागीदारी को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। जल सहेलियों जैसे संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर भविष्य में संयुक्त रूप से अभियान चलाने पर भी सहमति बनी।

बैठक के दौरान यह महत्वपूर्ण निर्णय भी सामने आया कि यमुना संरक्षण के लिए गठित टास्क फोर्स में जल सहेली संगठन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसी क्रम में जल सहेली संगठन के संस्थापक एवं जालौन जिला निवासी डासंजय सिंह को टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की बात कही गई, जिससे जमीनी अनुभवों और सामुदायिक दृष्टिकोण को नीति निर्माण में स्थान मिल सके।