देश की राजनीति में बड़ा बदलाव तय: लोकसभा में बहुमत का नया आंकड़ा 409, महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित करने की तैयारी
सरकार संसद के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए कम से कम दो विधेयक (संविधान संशोधन सहित) पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अगले लोकसभा और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएंगी। इस कदम से देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदलने की उम्मीद है।
साल 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संसद की सीटों में इजाफा हो सकता है। सरकार की योजना है कि लोकसभा में 273 नई सीटें जोड़ी जाए। इससे बहुमत का आंकड़ा बढ़कर 409 हो सकता है।
उत्तर प्रदेश के पास लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें हैं, कुल 543 सीटों में से 15% या 80 सीटें। अगर 816 सदस्यों वाली लोकसभा में भी यह अनुपात बरकरार रखा जाता है, तो उत्तर प्रदेश के पास 120 सीटें होंगी, जिनमें से 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
केंद्र सरकार आगामी जनगणना और परिसीमन प्रक्रियाओं से महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को अलग करने की संभावना तलाश रही है। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। सरकार ने सुझाव दिया है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 कर दिया जाए, जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें शामिल हों। लोकसभा की यह नई संरचना 2029 के लोकसभा चुनावों में ही लागू होगी।
कुछ विपक्षी दलों के साथ बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अधिनियम में संशोधन करने और हर एक राज्य को आवंटित सीटों के वर्तमान अनुपात को बनाए रखते हुए लोकसभा की कुल संख्या को अलग से बढ़ाने का सुझाव दिया। हालांकि, सीटों की सीमाएं तय करने (परिसीमन) का काम 2011 की जनगणना के आधार पर होने की संभावना है।
किस राज्य को कितनी सीटें होंगी
सीटों के मौजूदा राज्य-वार बंटवारे को देखें तो, उत्तर प्रदेश के पास लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें हैं, कुल 543 सीटों में से 15% या 80 सीटें। अगर 816 सदस्यों वाली लोकसभा में भी यह अनुपात बरकरार रखा जाता है, तो उत्तर प्रदेश के पास 120 सीटें होंगी, जिनमें से 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
इसी तरह, महाराष्ट्र की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी (जिनमें 24 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी), बंगाल की सीटें 42 से बढ़कर 63 हो जाएंगी (जिनमें 21 सीटें महिलाओं के लिए होंगी) और बिहार की सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी (जिनमें 20 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी)। तमिलनाडु में लोकसभा सीटों की संख्या 39 से बढ़कर 59 हो जाएगी, जिसमें 20 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वहीं, मध्य प्रदेश की सीटें 29 से बढ़कर 44 हो जाएंगी, जिनमें 15 सीटें महिलाओं के लिए होंगी।
मणिपुर-अरुणाचल प्रदेश में कितनी सीटें हो सकती है
छोटे राज्यों में, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा की लोकसभा सीटें 2 से बढ़कर 3-3 हो सकती हैं। मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम, जिनके पास अभी 1-1 सीट है, लोकसभा के नए स्वरूप में 2-2 सीटें मिल सकती हैं। प्रमुख केंद्र शासित प्रदेशों में, दिल्ली की लोकसभा सीटें 7 से बढ़कर 11 हो सकती हैं। इनमें से 4 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, वहीं जम्मू और कश्मीर की सीटें 5 से बढ़कर 8 हो सकती हैं, जिनमें से 3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि, यह अभी भी साफ नहीं है कि लद्दाख और पुडुचेरी जैसे उन केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या बढ़ेगी या नहीं, जहां अभी केवल एक ही सीट है और अगर सीटें बढ़ती हैं, तो उनमें से कितनी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
परिसीमन और 2011 की जनगणना का इस्तेमाल
गौरतलब बात यह है कि साल 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिला आरक्षण को नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। अब सरकार इस प्रावधान को अलग कर रही है। माना जा रहा है कि नई जनगणना के आकंड़ों को आने में वक्त लग सकता है। इसलिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने पर विचार कर रही है। ताकि 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में यह कोटा लागू किया जा सके।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस