मणिपुर में सरकार गठन की कवायद तेज : BJP ने विधायक दल नेता चुनाव के लिए तरुण चुग को सेंट्रल ऑब्जर्वर बनाया; राष्ट्रपति शासन अगले हफ्ते खत्म

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को एक साल होने वाले हैं. भाजपा सरकार बनाने के लिए एक्टिव हो गई है. केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाए गए हैं. सारे विधायक दिल्ली में डटे हैं. दिलचस्प यह है कि मैतेई ही नहीं, कूकी विधायक भी राजधानी में हैं. ऐसे में जातीय संघर्ष को पूरी तरह शांंत करने के लिए भाजपा किस फार्मूले पर आगे बढ़ेगी? तीन ऑप्शंस हैं.

मणिपुर में सरकार गठन की कवायद तेज : BJP ने विधायक दल नेता चुनाव के लिए तरुण चुग को सेंट्रल ऑब्जर्वर बनाया; राष्ट्रपति शासन अगले हफ्ते खत्म

मणिपुर विधायक दल में नेता के चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना आब्जर्वर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को नियुक्त किया है. यह भी संभावना जताई जा रही है कि विधायक दल की बैठक के बाद मणिपुर के सभी विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने राष्ट्रपति भवन जा सकते हैं.

भाजपा ने मणिपुर में नई सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। BJP संसदीय बोर्ड ने सोमवार को पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी तरुण चुग को मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए सेंट्रल ऑब्जर्वर नियुक्त किया है।

मंगलवार को BJP विधायक दल की बैठक होने की संभावना है। अभी बैठक की जगह अभी तय नहीं है। हालांकि, NDA के कई विधायक पहले ही दिल्ली पहुंच गए हैं। मणिपुर से NDA के करीब 20 विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंचे।

अन्य विधायक सोमवार को केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर राजधानी पहुंचे। दिल्ली पहुंचे नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत सिंह, पूर्व मंत्री वाई. खेमचंद सिंह और BJP प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार शाम 3 बजे विधायक दल के नेता का ऐलान किया जा सकता है। इसके बाद, राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया है कि कुकी-जो समुदाय को संतुष्ट करने के लिए 10 कुकी विधायकों में से एक को डिप्टी सीएम का पद दिया जा सकता है।

राज्य में एक साल से राष्ट्रपति शासन लागू है. भाजपा ने विधायक दल के नेता का चुनाव करने के लिए तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है. आज पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पार्टी के विधायकों से मिलने वाला है. एक मीडिया रिपोर्ट में स्टेट भाजपा के एक नेता के हवाले से दावा किया गया, 'रविवार को सभी विधायकों को सोमवार को मीटिंग के लिए दिल्ली आने को कहा गया था. सभी 37 विधायक मीटिंग के लिए दिल्ली में हैं. सोमवार शाम को मीटिंग होनी थी लेकिन केंद्रीय पर्यवेक्षक के बारे में ताजा घोषणा के बाद हम सभी को जानकारी मिली कि मीटिंग 3 फरवरी दोपहर 3 बजे तक के लिए टाल दी गई है.' 

कूकी विधायक भी दिल्ली आए

इस मामले की जानकारी रखने वाले एक और विधायक ने कहा कि 10 कूकी-जो विधायकों में से भी ज्यादातर लोग मीटिंग के लिए पहुंच गए हैं. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नई भाजपा सरकार कूकी और मैतेई को साधने वाले किसी फॉर्मूले पर आगे बढ़ सकती है. साल 2023 में मैतेई और कूकी-जो समुदायों के बीच जातीय झड़प में कम से कम 260 लोग मारे गए और 50,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए. दोनों समुदाय अब भी जातीय आधार पर बंटे हुए हैं और अलग-अलग जिलों में रहते हैं. 

भाजपा के सामने हैं ये तीन विकल्प

1. पार्टी के एक पदाधिकारी का बयान मीडिया में आया है. उन्होंने एचटी से कहा, 'अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है. अगर केंद्रीय नेतृत्व मणिपुर के हित में किसी मैतेई नेता को चुनता है तो सभी को साथ आना होगा और एक-दूसरे का समर्थन करना होगा. अगर कूकी-जो विधायक समर्थन नहीं भी करते हैं तो भी पार्टी के पास जरूरी संख्या है. 

2. दूसरा विकल्प- इस कैबिनेट में कूकी-जो विधायकों को ज्यादा मंत्री पद दिए जाएं. यह भी राज्य और शांति प्रक्रिया के हित में होगा. 

3. तीसरा विकल्प यह है कि किसी तटस्थ व्यक्ति (जो न तो मैतेई हो और न ही कूकी-जो) को मुख्यमंत्री बनाया जाए, जो भले जन नेता न हो लेकिन मौजूदा हालात में सभी उसे स्वीकार कर सकते हों. 

ये नेता है रेस में 

कहा जा रहा है कि विधायक दल का नेता बनने की रेस में सबसे आगे मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में बीरेन सिंह, टी सत्यब्रत सिंह, युमनाम खेमचंद सिंह, गोविंदास कोंथौजम, बसंत के. सिंह, के. इबोमचा सिंह और दीपू गंगमेई प्रमुख हैं.

नेता के चयन के बाद शपथ कल संभव

बताया जा रहा है कि विधायक दल के नेता के चयन के बाद कल बुधवार (4 फरवरी) को नई सरकार का शपथ ग्रहण कराया जा सकता है. इस तरह से कल मणिपुर में नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने के साथ ही सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.