फिर फिसली मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जुबान,पिता PWD मंत्री और ठेकेदार दिला रहा कपड़े, तो कैसे चरित्रवान बनेंगे बच्चे',अब बयान पर दी सफाई

MP सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक और अक्सर विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं. इस बार उन्होंने भ्रष्टाचार और नैतिकता पर प्रहार करने के लिए एक ऐसा उदाहरण दिया, जिसने सीधे तौर पर राजनीतिक व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.

फिर फिसली मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जुबान,पिता PWD मंत्री और ठेकेदार दिला रहा कपड़े, तो कैसे चरित्रवान बनेंगे बच्चे',अब बयान पर दी सफाई

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का अटपटा बयान फिर चर्चा में है। बच्चों के चरित्र, माता-पिता की भूमिका और सिस्टम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति को लेकर विवाद खड़ा कर दिया।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने हालिया बयान को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि 28 जनवरी को एक निजी शिक्षण संस्था में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मेरे वक्तव्य को काट-छांट कर इस तरह प्रस्तुत किया, मानो वह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध व्यक्तिगत आरोप हो। जबकि उनके बयान की वास्तविक भावना और संदर्भ को सही तरीके से नहीं दर्शाया गया।

संस्कारों के महत्व पर केंद्रित था वक्तव्य

मंत्री विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि उनका वक्तव्य बच्चों में संस्कारों के महत्व पर केंद्रित था। उन्होंने कहा था कि बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने के लिए केवल विद्यालयीन शिक्षा ही नहीं, बल्कि घर का वातावरण भी सकारात्मक होना जरूरी है। छोटे बच्चे अपना अधिकांश समय घर में बिताते हैं, ऐसे में यदि घर का माहौल ठीक नहीं होगा, तो शिक्षा का अपेक्षित असर नहीं पड़ पाएगा।

कैलाश विजयवर्गीय ने कही ये बात

मंच से संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा बच्चा स्कूल में चार घंटे रहता है. 20 घंटे घर में रहता है. घर में माहौल कैसा है. अगर माता-पिता घर में अपने दोस्तों के साथ उसके सामने पार्टी करेंगे, तो स्कूल में चार घंटे कितना भी ज्ञान मिले. चरित्र एकता की बात करूं, तो घर में जो वह देखता है, वह सीखेगा. अगर बाप PWD मिनिस्टर हैं और बेटे को कपड़े ठेकेदार दिलवाएं, तो फिर ऐसे में चरित्र निर्माण कैसे होगा. उनका यह बयान सामने आते ही कार्यक्रम के बाहर तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी .

गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जलप्रदाय को लेकर हुए कांड के दौरान मीडिया के सवालों पर मंत्री विजयवर्गीय द्वारा ‘घंटा’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी खासा विवाद हुआ था. उस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं और विपक्ष ने मंत्री की भाषा और गरिमा पर सवाल खड़े किए थे. इन्हीं विवादों के बीच पारिवारिक शोक के चलते वह कुछ दिनों की छुट्टी पर भी रहे.

चर्चा में कैलाश विजयवर्गीय का नया बयान

अब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नया बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है. उनका कहना था कि वे उदाहरण के माध्यम से बच्चों में नैतिक मूल्यों और ईमानदारी की बात कर रहे थे, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी मंत्री जैसे सीधे संदर्भ ने बयान को संवेदनशील बना दिया.

गौरतलब है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों के लिए पहले भी जाने जाते रहे हैं. लेकिन सवाल यही है कि क्या इस तरह के उदाहरण जनता को संदेश देते हैं या फिर सियासी तूफान खड़ा करने का काम करते हैं. फिलहाल इतना तय है कि यह बयान आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रहेगा.