मोहन यादव के बयान से सियासत गरमाई, दिग्विजय सिंह ने खोला मोर्चा; बोले- पहले माफी मांगें मुख्यमंत्री:जीतू पटवारी को 'दो कौड़ी का' कहने पर कांग्रेसियों में आक्रोश
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को 'टपोरी लाल' और 'दो कौड़ी का अध्यक्ष' कहा. पटवारी ने अटल जी की हार का हवाला देकर पलटवार किया. दिग्विजय ने की माफी की मांग...
पटवारी पर तंज, कांग्रेस का वार; मोहन यादव के बयान पर मचा राजनीतिक घमासान
भोपाल/शुजालपुर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर घमासान मच गया है। शाजापुर जिले के शुजालपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर की गई तीखी टिप्पणियों के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसे मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को शुजालपुर दौरे पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके बाद आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस आज अपने ही कर्मों का फल भुगत रही है और जनता ने उसे लगातार नकारने का काम किया है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में कांग्रेस का जनाधार तेजी से खत्म हो रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश संकट में होता है तो कांग्रेस के नेता जिम्मेदारी निभाने के बजाय पीछे हट जाते हैं। वहीं प्रदेश में विकास कार्यों की गति तेज होने के बावजूद कांग्रेस केवल आलोचना करने में लगी हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में लगातार काम हो रहा है, लेकिन कांग्रेस के नेताओं को यह सब दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जनता के बीच जाने के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह केवल बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहा है।
सभा के दौरान मुख्यमंत्री के निशाने पर विशेष रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी रहे। उन्होंने पटवारी की राजनीतिक क्षमता और संगठनात्मक नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के बाद उन्होंने कांग्रेस का इतना कमजोर और निष्प्रभावी प्रदेश अध्यक्ष नहीं देखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अपने इतिहास और पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।
डॉ. मोहन यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता स्वयं चुनाव में बड़ी हार का सामना कर चुका हो, वह आज कांग्रेस का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो अपनी राजनीतिक जमीन नहीं बचा पाया, वह पूरे प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने का दावा कर रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस को अब योग्य नेतृत्व नहीं मिल रहा है, जिसके कारण पार्टी लगातार कमजोर होती जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस शासनकाल की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के समय इन क्षेत्रों में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का माहौल था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले वर्षों में इन क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए हैं और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मर्यादाओं को लांघते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विवाद तब और बढ़ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए पोस्ट किया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक और गरिमामय पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
उन्होंने लिखा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना घोर निंदनीय है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने बयान पर आत्ममंथन करना चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह केवल जीतू पटवारी का नहीं, बल्कि पूरे कांग्रेस संगठन का अपमान है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक विरोध और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के लिए इस प्रकार की भाषा का उपयोग करना मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस इस तरह की बयानबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार विकास के मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्षी नेताओं पर व्यक्तिगत हमले कर रही है। पार्टी का आरोप है कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार के पास ठोस जवाब नहीं है, इसलिए ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार के बयान दिए जा रहे हैं।
वहीं भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान का बचाव किया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति और संगठनात्मक कमजोरी पर टिप्पणी की है, जिसे विपक्ष अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दे रहा है। भाजपा नेताओं का दावा है कि कांग्रेस जनता का विश्वास खो चुकी है और इसी वजह से उसकी प्रतिक्रिया इतनी तीखी है।
मुख्यमंत्री के बयान और उसके बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह विवाद और गहराने की संभावना है, क्योंकि दोनों दल इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश करेंगे।
फिलहाल शुजालपुर से शुरू हुआ यह बयान विवाद भोपाल तक पहुंच चुका है और प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कांग्रेस की ओर से उठाई गई माफी की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और यह सियासी टकराव आगे किस दिशा में बढ़ता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस