जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में 292 परियोजनाओं की प्रगति परखी, जिम्मेदारों को समय से कार्य पूर्ण करने का निर्देश

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 292 निर्माण एवं विकास परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया। कई प्रमुख परियोजनाओं—जैसे जिला कारागार, मेडिकल कॉलेज की 50 बेड क्रिटिकल केयर यूनिट और तहसील आवासीय भवन—में देरी पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में 292 परियोजनाओं की प्रगति परखी, जिम्मेदारों को समय से कार्य पूर्ण करने का निर्देश

जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में 292 परियोजनाओं की प्रगति का आकलन

डीएम ने अधिकारियों को समयसीमा में कार्य पूरा करने के दिए निर्देश

उरई । जनपद में संचालित निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। निर्माण कार्यों से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं, ओटीडी सेल की त्रैमासिक समीक्षा तथा PLFS और ASUSE सर्वेक्षणों की प्रगति का गहन परीक्षण किया गया।समीक्षा के दौरान सीएमआईएस पोर्टल पर एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली कुल 292 परियोजनाओं की स्थिति का आकलन किया गया। जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्थाओं की प्रगति पर सख्त नजर रखते हुए निर्देश दिए कि बिना पूर्व सूचना के किसी भी स्तर पर प्रतिनिधित्व या कार्य में ढिलाई पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं—जैसे जिला कारागार उरई, मेडिकल कॉलेज में 50 बेड क्रिटिकल केयर यूनिट तथा तहसील उरई के आवासीय भवन निर्माण—की प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया गया। इन कार्यों में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित परियोजना प्रबंधकों और अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए। साथ ही नर्सिंग कॉलेज निर्माण कार्य में विलंब पर भी जवाबदेही तय करने को कहा गया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी परियोजनाओं में कार्य प्रारंभ होने से पूर्व जनप्रतिनिधियों द्वारा विधिवत भूमि पूजन कराया जाए तथा निर्माण प्रक्रिया को पारदर्शी और मानक अनुरूप बनाया जाए। बैठक में कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्र की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने खाद्यान्न, दलहन, तिलहन के उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ फल, सब्जी, मसाला एवं पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और मत्स्य पालन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिससे जनपद की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जा सके। इसके अतिरिक्त PLFS और ASUSE सर्वेक्षणों को प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी संबंधित विभागों और समिति सदस्यों से सक्रिय सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि जनपद की विकास योजनाओं का सही आंकलन हो सके।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बीरेंद्र सिंह, डीसी मनरेगा रामेन्द्र सिंह, जिला विकास अधिकारी निशान्त पांडे,  जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी नीरज चौधरी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।