यमुना यात्रा के दौरान चिन्हिंत किये गये नदी पुनर्जीवन के कार्यो को किया जायेगा पूर्ण - स्वतंत्र देव सिंह, जल शक्ति मंत्री
मंत्री ने जल सहेली संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाहा और रेखा अहिरवार का सम्मान करते हुए उनके योगदान को मातृशक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने आगरा में यमुना संरक्षण पर कॉन्क्लेव आयोजित करने की भी घोषणा की।
जल सहेलियों की अविरल निर्मल यमुना यात्रा का बासुदेव घाट पर हुआ समापन
उरई । जल सहेलियों को स्वयं यमुना समझकर सभी को वंदन करना चाहिए, जिन्होंने सरकार और समाज को एक साथ लाकर नदियों के पुनर्जीवन के काम को करने का बीडा उठाया है। यमुना यात्रा के दौरान जल सहेलियों ने यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए जिन कार्यो को चिन्हिंत किया गया है, उसको आईआईटी का तकनीकि सहयोग लेकर पूर्ण किया जायेगा, यह बात आज उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अविरल निर्मल यमुना यात्रा के समापन अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा लगातार नदियों की अविरलता एवं निर्मलता के लिए प्रयास किये जा रहे है, मोदी और योगी आपकी तपस्या को खराब नहीं जाने देगे। आप बुन्देलखण्ड की वही क्रांतिकारी बहने है, जिस बुन्देलखण्ड में रानी लक्ष्मीबाई ने जब तक दम नहीं तोडा तब तक किसी को कदम नहीं रखने दिया। आप हमेंशा याद रखिये कि आपके द्वारा किये जा रहे कार्य श्रृष्टि के इतिहास में अंकित हो रहे है।
उन्होंने जल सहेलियों की अविरल निर्मल यात्रा में चल रही जल सहेलियो की कृतज्ञता के लिए पुष्पा कुशवाहा और रेखा अहिरवार के पैर धोकर उनका वंदन किया और कहां की आप मातृशक्ति है, निश्चित तपस्वी और यमुना पुत्री है कि आपने बिना किसी स्वार्थ के मां यमुना के प्रति इतनी बड़ी यात्रा निकाली निश्चित तौर पर इसका असर पूरी दुनिया पर होगा, आपके परिवारों पर होगा, सबको दिखाई देगा।
निकट भविष्य में शीघ्र ही आगरा में यमुना के एक कॉन्क्लेव किया जाएगा जहां बैठकर और भी विशेषज्ञों की राय लेकर सरकार पूरी तरह से यमुना के संरक्षण प्रतिबद्धता के लिए तत्पर और सजग है।
जल सहेली संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाहा ने कहा कि हम सभी जल सहेलियां बुन्देलखण्ड का यहां प्रतिनिधित्व कर रही है, हमने अपने क्षेत्र में जल संरक्षण के कार्य किये है, लेकिन नदियों की स्थिति को देखकर हमने यमुना नदी की अविरलता एवं निर्मलता के यात्रा का संकल्प लिया था। हम यहां आप सभी समाज से निवेदन करने आये है, जैसे अपनी मां के बीमार हो जाने पर, मां का इलाज कराते है वैसे ही यमुना मां के बीमार होने पर हम अपनी यमुना मां का इलाज नहीं कर सकते है? आप सभी से सामूहिक जिम्मेदारी के साथ व्यक्तिगत रूप से भी नदियों को बचाने की जिम्मेदारी को समझे।
समापन कार्यक्रम का उदघाटन भाषण देते हुए यमुना भिक्षु रविशंकर तिवारी ने कहा कि यह सभी जल सहेलियां किसी स्वार्थवश हर रोज 12 से 15 किलोमीटर चलकर 29 दिन में दिल्ली नहीं पहुची है, इनमें अपनी नदियों के संरक्षण के लिए साक्षरता है, हम अपने किताबी ज्ञान से साक्षर तो कहलाते है, लेकिन प्रकृति के प्रति साक्षरता हमें जल सहेलियों से सीखने चाहिए।
जल सहेली संगठन के संस्थापक डाॅ0 संजय सिंह ने कहा कि जब हमने सभी जल सहेलियों के साथ यमुना यात्रा के बारे में संकल्प लिया था तब हम यमुना के बारे में ज्यादा नहीं समझते थे लेकिन यात्रा के दौरान समुदाय से हुए संवाद से पता चला कि कैसे यमुना के किनारे का समाज यमुना के कण-कण से जुडा हुआ है। यात्रा के दौरान जब हम समाज के बीच में जाते थे, तब समाज कहता था कि नदी को सही करना तो सरकार का कार्य है, लेकिन जब उनसे 5 मिनट संवाद करते थे तो वही समाज को आभास होता था कि सरकार के साथ समाज की नदियों की सुरक्षा में कितनी भागीदारी है। यात्रा के दौरान हमने कुछ बिन्दु संकलित किये है, उनके आधार पर लगातार सरकार और समाज से संवाद किया जाता रहेगा।
इस दौरान यमुना के पुर्नजीवन के लिए समाज के अनुभवों के आधार पर बनाये गये श्वेत पत्र को सरकार को दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में श्री महेन्द्र बापू जी के द्वारा यमुना कथा के माध्यम से बताया कि मनुष्य के जीवन में नदियों का क्या महत्व है, उन्होंने यमुना मां की धार्मिक एवं अध्यात्मिकता कथा में वर्णन किया।
कार्यक्रम में अर्चना श्रीवास्तव, यमुना पुत्र रंजीत चतुर्वेदी ने भी अपने विचार रखे, मंच का संचालन मनीष राजपूत के ने किया। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि सुरेन्द्र सिंह बिधूरी, संतोष कुमार, अश्विनी मिश्रा, शीतल सिंह सेंगर, अनिल शर्मा, शिवविजय, निवेदिता, सरिता गिरी जी समेह 1 हजार से अधिक जल सहेली, जल योद्धा, नदियों पर कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहें।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस