उमा भारती का बड़ा बयान“आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता” —सरकारी स्कूलों को लेकर भी साधा निशाना
भोपाल में उमा भारती ने आरक्षण को सामाजिक समानता के लिए जरूरी बताया। साथ ही POK और लोधी समाज की राजनीतिक भागीदारी पर बड़े बयान दिए।
उमा भारती बोलीं—जब तक बड़े नेताओं के बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण रहेगा कायम
भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित राजा हिरदे शाह लोधी की शौर्य यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री Uma Bharti ने आरक्षण और सामाजिक समानता को लेकर बड़ा बयान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश में सामाजिक न्याय और बराबरी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण आवश्यक है और “आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता।” उनके इस बयान ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में बहस को तेज कर दिया है।
उमा भारती ने अपने भाषण में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तक देश के शीर्ष पदों—राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस—के परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में एक साथ पढ़ाई नहीं करेंगे, तब तक समाज में वास्तविक समानता स्थापित नहीं हो पाएगी। उनका यह बयान केवल आरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सामाजिक ढांचे में गहराई से मौजूद असमानताओं की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज लंबे समय तक जातिगत आधार पर बंटा रहा है और आर्थिक असमानताएं भी गहरी रही हैं, ऐसे में आरक्षण इन विषमताओं को कम करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने यह भी कहा कि बराबरी केवल कानून बनाने से नहीं आएगी, बल्कि समाज के व्यवहार और सोच में बदलाव लाना भी उतना ही जरूरी है। उनके मुताबिक, सामाजिक न्याय की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली है और इसमें सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
आरक्षण के मुद्दे पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan का पुराना बयान भी चर्चा में आया। 12 जून 2016 को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि “हमारे रहते हुए कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता।” उस समय उनके इस बयान पर सवर्ण समाज में नाराजगी देखने को मिली थी। इसके बाद सपाक्स संघ का गठन हुआ, जिसने सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। करणी सेना ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भोपाल, उज्जैन समेत कई बड़े शहरों में प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की गईं।
2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान इस बयान का राजनीतिक असर भी देखने को मिला। भाजपा के पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने मंदसौर में कहा था कि यदि “माई का लाल” जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया होता, तो भाजपा की सीटें 10 से 15 तक बढ़ सकती थीं। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर पार्टी को नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी शिवराज सिंह चौहान की होगी।
अपने संबोधन में उमा भारती ने आजादी के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि देश अब “तीसरी आजादी की लड़ाई” के दौर में है, जो समानता और सामाजिक न्याय के लिए लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में प्रकृति—पेड़, पहाड़ और जीव-जंतुओं तक की पूजा की जाती है, जहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। ऐसे में समाज में भी इसी भावना को अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब इस पार्टी को पिछड़ा और विरोधी बताया जाता था, लेकिन समय के साथ इस धारणा को बदला गया। उन्होंने कहा कि एक नेता ने राम मंदिर के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी और दूसरे ने तिरंगे के सम्मान के लिए पद त्याग दिया, जिससे यह संदेश गया कि पार्टी केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सिद्धांतों के लिए भी काम करती है।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने राजा हिरदे शाह लोधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बुंदेला और गोंड समाज को एकजुट कर अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी थी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उनके जीवन पर शोध कराया जाएगा और उनके संघर्ष को शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान एक अप्रत्याशित घटना भी सामने आई। मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान मंच पर मौजूद एक पीएसओ गर्मी के कारण अचानक गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे संभाला और प्राथमिक सहायता दी।
वहीं, पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी ने भी अपने संबोधन में समाज की राजनीतिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में लोधी समाज की संख्या काफी अधिक है और उनकी भूमिका सरकार बनाने में महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने मांग की कि भारत में कम से कम एक लोधी समुदाय का मुख्यमंत्री होना चाहिए। उन्होंने युवाओं की बदलती जीवनशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी गलत दिशा में जा रही है और इसे सुधारने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व की स्मृति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक न्याय, आरक्षण, शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा का मंच बन गया। उमा भारती के बयान ने जहां एक ओर आरक्षण के समर्थन को मजबूती दी, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक समानता के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस