लोकायुक्त कार्रवाई के बाद BMC में फेरबदल: गुणवंत सेवतकर से वित्त विभाग वापस, मुकेश शर्मा को अतिरिक्त प्रभार
तत्कालीन वित्त एवं लेखा शाखा की जिम्मेदारी देख रहे अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआइआर दर्ज की गई थी। इसके बाद निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने उन्हें इस शाखा से हटा दिया गया है। ऐन वक्त पर वित्त विभाग के प्रमुख को हटाए जाने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप है। अब मुकेश शर्मा पर बजट को अंतिम रूप देने और निगम की वित्तीय साख सुधारने की दोहरी चुनौती होगी।
भोपाल नगर निगम की वित्त एवं लेखा शाखा में अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर को कमिश्नर संस्कृति जैन ने हटा दिया।
मध्यप्रदेश। भोपाल नगर निगम (BMC) ने शनिवार को एडिशनल कमिश्नर गुणवंत सेवतकर से वित्त विभाग का प्रभार वापस ले लिया। यह कदम शुक्रवार को मध्य प्रदेश लोकायुक्त द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किए जाने के बाद उठाया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम चल रही जांच के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
BMC कमिश्नर संस्कृति जैन द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि सेवतकर द्वारा पहले संभाली जा रही वित्तीय जिम्मेदारियों को अब किसी और को सौंप दिया गया है। इस फेरबदल के बाद, एडिशनल कमिश्नर मुकेश शर्मा को वित्त विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला
सूत्रों ने बताया कि यह फैसला उसी दिन लिया गया, लोकायुक्त द्वारा सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किए जाने के तुरंत बाद, जिससे वह जांच के दायरे में आ गए थे। अधिकारियों ने कहा कि जब तक जांच चल रही है, तब तक वित्तीय मामलों पर किसी भी तरह के प्रभाव से बचने के लिए यह प्रशासनिक बदलाव ज़रूरी था।
इस पुनर्नियुक्ति को BMC प्रशासन के भीतर वित्तीय जवाबदेही बनाए रखने के लिए एक एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने नगर निकाय के भीतर चर्चाओं को जन्म दिया है, क्योंकि वित्त विभाग 23 मार्च को होने वाली आगामी बजट परिषद की बैठक और अन्य प्रमुख वित्तीय निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आगे की कार्रवाई लोकायुक्त जांच की प्रगति पर निर्भर कर सकती है।
इस मामले में अपर आयुक्त ने कहा- कमिश्नर से चर्चा के बाद भुगतान इस मामले में अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने कहा था कि लेखा शाखा में बिल सीधे तैयार या पास नहीं किए जाते। बिल संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किया जाता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस