चुनावी राज्यों में प्रशासनिक फेरबदल, गृह जिले में पोस्टिंग वाले अधिकारियों को हटाने का चुनाव आयोग का आदेश
चुनाव आयोग ने असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने मुख्य सचिवों को चुनाव से जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिलों से हटाने और उन अधिकारियों का तबादला करने का आदेश दिया है जिन्होंने पिछले चार साल में तीन साल एक ही स्थान पर पूरे कर लिए हैं। यह कदम चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।
असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव इस साल की शुरुआत में होने हैं.
नई दिल्ली: विभिन्न राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने इन चुनावी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चुनाव के संचालन से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग के संबंध में निर्देश जारी किया है. असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव इस साल की शुरुआत में होने हैं.
चुनाव वाले राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारियों और मुख्य सचिवों को इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से पत्र लिखे गए. इस पत्र को चुनाव आयोग द्वारा मीडिया के साथ साझा की गई. इसमें कहा गया, 'आयोग एक सुसंगत नीति का पालन कर रहा है कि चुनाव वाले राज्य / केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव के संचालन से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिलों या उन स्थानों पर तैनात नहीं किया जाता है जहां उन्होंने काफी लंबी अवधि तक सेवा की है.'
चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि चुनाव से सीधे जुड़े किसी भी अधिकारी को वर्तमान जिले (राजस्व जिले) में बने रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी यदि वह अपने गृह जिले में तैनात है. अगर उसने पिछले चार वर्षों के दौरान उस जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं या असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए 31 मई को या उससे पहले और पुदुचेरी के लिए 30 जून को तीन साल पूरे कर लेंगे.
पत्र में लिखा, 'तीन साल का समय कैलकुलेट करते समय जिले के अंदर किसी पोस्ट पर प्रमोशन को गिना जाएगा. हालांकि, स्टेट हेडक्वार्टर में (पिछले चार सालों में) दी गई सर्विस, भले ही वे उसी रेवेन्यू जिले में हों, उन्हें मौजूदा जिले में तीन साल के समय के कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जा सकता है.'
इसी तरह जिन अधिकारियों को पैरा 3(ii) की शर्त को पूरा करने के लिए ट्रांसफर किया जा रहा है, उन्हें स्टेट हेडक्वार्टर में पोस्ट करने की इजाजत दी जा सकती है, भले ही वह उसी रेवेन्यू डिस्ट्रिक्ट में हो.
पत्र में लिखा, 'ऊपर बताए गए निर्देशों को लागू करते समय/अफसरों का ट्रांसफर करते समय, राज्य सरकार के संबंधित डिपार्टमेंट को ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें उनके होम डिस्ट्रिक्ट में पोस्ट न किया जाए. यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी डीईओ, आरओ, एआरओ, पुलिस इंस्पेक्टर,सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के अधिकारी को उस जिले में वापस पोस्ट न किया जाए या वहीं रहने न दिया जाए जहां वह पिछले विधानसभा चुनाव उसके बाद हुए किसी भी उप चुनाव में पोस्टेड था.'
पोल पैनल ने कहा कि अगर ऊपर दिए गए निर्देशों का पालन करने में कोई मुश्किल आती है, तो खास मामला कारणों के साथ सीईओ के जरिए छूट के लिए कमीशन को भेजा जा सकता है और अगर जरूरी समझा गया तो कमीशन निर्देश जारी करेगा.
अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) या असम राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों/कर्मचारियों के ट्रांसफर ऑर्डर, चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर से सलाह करके, मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ही जारी और लागू किए जाएंगे. अगर किसी विशेष परिस्थितियों की वजह से ट्रांसफर की जरूरत पड़ती है तो चुनाव आयोग से पहले मंजूरी लेनी होगी, ऐसा कहा गया है.
पत्र में आगे कहा गया, 'चुनाव आयोग की ऊपर बताई गई नीतियों के मुताबिक जिन लोगों का ट्रांसफर हुआ है, उनकी जगह किसी और को पोस्ट करते समय राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर से जरूर सलाह ली जाएगी. इन निर्देशों के तहत जारी किए गए हर ट्रांसफर ऑर्डर की एक कॉपी चीफ इलेक्शन ऑफिसर को जरूर दी जाएगी.'
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस