नेहरू की चिट्ठियां देश की या गांधी परिवार की? कांग्रेस-बीजेपी में सियासी घमासान, एक ने मांगी कॉपी-दूसरे ने माफी
नेहरू के गुप्त दस्तावेजों को लेकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं, जहां एक तरफ बीजेपी ने दस्तावेजों की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने माफी की मांग की है। इन दस्तावेजों के खुलासे से राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।.
नेहरू के गुप्त दस्तावेजों पर कांग्रेस-बीजेपी में घमासान
कांग्रेस ने दस्तावेजों की कॉपी मांगी
बीजेपी ने माफी की मांग की
नई दिल्ली। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 51 कार्टन पेपर्स पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच नया विवाद छिड़ गया है। यह विवाद सोमवार को भाजपा सांसद संबित पात्रा के लोकसभा में पूछ गए प्रश्न के बाद शुरू हुआ।
ओडिशा के पुरी से सांसद ने संस्कृति मंत्रालय से पत्र लिखकर पूछा, "क्या संग्रहालय से भारत के पहले प्रधानमंत्री से संबंधित कुछ दस्तावेज गायब पाए गए हैं और क्या इन्हें अवैध रूप से हटाया गया है।"
मंत्रालय की ओर से जवाब में कहा गया है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री से संबंधित कोई भी दस्तावेज लापता नहीं पाया गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को खुशी जताते हुए कहा कि आखिरकार सच्चाई सामने आ ही गई। और साथ ही उन्होंने सवाल और उसके जवाब के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए और 'पूछा क्या माफी मांगी जाएगी?'
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने कहा है कि सोनिया गांधी ने 2008 में प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ‘सभी निजी पारिवारिक पत्र और नोट्स’ ले लिए थे। मंत्रालय ने कहा है कि पीएमएमएल उन सभी पत्रों को वापस पाने के लिए सोनिया गांधी के संपर्क में है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लिखित रूप में स्वीकार किया है कि ये दस्तावेज उनके पास हैं और उन्होंने इस मुद्दे पर सहयोग करने का वादा किया है।
सोनिया गांधी ने पीएमएमएल को भरोसा दिया है कि वह नेहरू के निजी कागजात सौंपने की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगी।
दरअसल, यह पहली बार है जब सोनिया गांधी ने पीएमएमएल के उस पत्र का जवाब दिया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि इन दस्तावेजों का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने 2008 में ले लिया था। सोनिया गांधी ने कहा है कि उनका स्टाफ इस मामले की जांच करेगा।
शेखावत ने दिया जयराम रमेश को जवाब
इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को X पर कहा था कि सरकार को दस्तावेजों के गुम होने के दावे के लिए माफी मांगनी चाहिए। गजेंद्र शेखावत ने उन्हें जवाब देते हुए कहा कि आपके लिए सोनिया गांधी से अपने वादे का सम्मान करने और इन दस्तावेजों को पीएमएमएल को लौटाने का आग्रह करना ज्यादा ठीक होगा।
लापता’ नहीं, ‘कब्जे’ में हैं दस्तावेज
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत पोस्ट में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा जा रहा था कि नेहरू पेपर्स PMML से ‘लापता’ हो गए हैं. शेखावत ने स्पष्ट किया कि लापता शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी चीज की मौजूदगी का स्थान अज्ञात हो. लेकिन इस मामले में सरकार को और देश को अच्छे से पता है कि वे दस्तावेज कहां और किसके पास हैं. शेखावत ने लिखा, नेहरू पेपर्स लापता नहीं हैं. यह ज्ञात है कि वे कहां और किसके अधिकार में हैं. जवाहरलाल नेहरू जी से जुड़े कागजात वाले 51 बक्सों को गांधी परिवार ने 2008 में PMML से वापस ले लिया था. यह बयान साफ करता है कि यूपीए सरकार के दौरान, जब केंद्र में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और सोनिया गांधी यूपीए अध्यक्ष थीं, तब एक प्रक्रिया के तहत ये दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड से निकालकर परिवार के पास चले गए थे
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस