हुमायूं कबीर की कार पर हमला, सुवेंदु सरकार को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, बंगाल मतदान में हर तरफ हिंसा और बवाल
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के दौरान कई जगह हिंसा और अव्यवस्था देखने को मिली। दक्षिण मिदनापुर में भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ, वहीं मुर्शिदाबाद में बमबाजी के बाद हुमायूं कबीर धरने पर बैठ गए
पश्चिम बंगाल वोटिंग में हिंसा: उम्मीदवार पर हमला, बमबाजी, EVM खराबी और झड़पों से चुनावी माहौल तनावपूर्ण
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हिंसा, बमबाजी, राजनीतिक झड़पों और तकनीकी गड़बड़ियों ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। दक्षिण मिदनापुर से लेकर मुर्शिदाबाद, मालदा और सिलीगुड़ी तक कई इलाकों से हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। इस बीच, भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर हमला और AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर की कार पर हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर हमला
दक्षिण मिदनापुर जिले के कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सुवेंदु सरकार अपनी जान बचाने के लिए दौड़ते नजर आ रहे हैं, जबकि भीड़ उनका पीछा कर रही है। उनके साथ मौजूद सुरक्षा गार्ड भी उन्हें बचाने की कोशिश करता दिखता है, लेकिन हमलावरों की संख्या ज्यादा होने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने उन्हें घेरकर मारपीट की। हालांकि, हमलावरों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए वीडियो में दिखाई दे रहे सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं।
मुर्शिदाबाद में बमबाजी और हुमायूं कबीर का धरना
मुर्शिदाबाद जिले के नौदा क्षेत्र में वोटिंग से एक रात पहले देसी बम फेंके जाने की घटना सामने आई। इस हमले में कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया।
सुबह जब हुमायूं कबीर घटनास्थल पर पहुंचे, तो उनका स्थानीय लोगों और तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प हुई। स्थिति बिगड़ने पर हुमायूं कबीर धरने पर बैठ गए।
दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उनके समर्थकों पर अत्याचार कर रही है। उन्होंने कहा, “हमारे लोगों को पीटा जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।”
BJP और TMC कार्यकर्ताओं में झड़प
राज्य के कई हिस्सों में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की खबरें आई हैं। सिलीगुड़ी में मतदान के दौरान दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए, जिससे कुछ समय के लिए मतदान बाधित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से भाजपा और TMC के बीच सीधा मुकाबला रहा है, जिसके चलते चुनाव के दौरान तनाव बढ़ जाता है।
मालदा में EVM खराबी पर बवाल
मालदा जिले के मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र के बालुआचारा हाई स्कूल स्थित मतदान केंद्र पर EVM खराब होने से हंगामा मच गया। मतदान शुरू होने के कुछ समय बाद ही मशीन ने काम करना बंद कर दिया, जिससे वोटरों में नाराजगी फैल गई।
चुनाव अधिकारियों के देर से पहुंचने पर स्थिति और बिगड़ गई। गुस्साए मतदाताओं ने मौके पर पहुंचे अधिकारी को घेर लिया। कुछ लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की भी की। वीडियो में देखा गया कि लोग अधिकारी को पकड़कर खींचते हुए ले जा रहे हैं।
इस घटना के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और मशीन को बदलकर मतदान दोबारा शुरू कराया गया।
TMC के अंदरूनी विवाद से तोड़फोड़
मालदा जिले के हरिश्चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच आपसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। यह झड़प इतनी बढ़ गई कि पार्टी के एक चुनावी कैंप कार्यालय में तोड़फोड़ की गई।
बताया जा रहा है कि यह विवाद राज्य के निवर्तमान मंत्री ताजमुल हुसैन के पैतृक गांव बांगरुआ में हुआ, जहां बूथ संख्या 200 और 201 पर यह घटना घटी। इस घटना ने TMC के भीतर चल रही गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है।
वोटिंग प्रतिशत और जनता का उत्साह
हिंसक घटनाओं के बावजूद मतदान प्रक्रिया जारी है और मतदाताओं में उत्साह देखा जा रहा है। सुबह 11 बजे तक पश्चिम बंगाल में 41.11% और तमिलनाडु में 37.56% मतदान दर्ज किया गया।
पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिनमें महिलाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक रही। यह संकेत देता है कि तमाम बाधाओं के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है।
चुनाव आयोग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है। बूथों पर वेबकास्टिंग के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
इसके अलावा, केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। आयोग ने साफ किया है कि हिंसा या गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बंगाल में राजनीतिक समीकरण
पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। दोनों ही दलों ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य में बढ़ती हिंसा इस बात का संकेत है कि मुकाबला बेहद कड़ा है और दोनों दल किसी भी कीमत पर बढ़त हासिल करना चाहते हैं।
दूसरे चरण और नतीजों की तारीख
राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय हैं। उम्मीदवारों पर हमले, बमबाजी, EVM खराबी और राजनीतिक झड़पें यह दर्शाती हैं कि चुनावी माहौल कितना तनावपूर्ण हो चुका है।
हालांकि, इन सबके बीच मतदाताओं का उत्साह और बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचना यह भी दिखाता है कि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और प्रशासन इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और क्या आगामी चरणों में हालात बेहतर हो पाते हैं या नहीं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस