BJP विधायक का अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना: 7 घंटे के बाद झुका प्रशासन: अम्बरीश शर्मा के विरोध पर डीई लक्ष्मी सोनवानी का ट्रांसफर
लहार विधायक अम्बरीश शर्मा के 7 घंटे से अधिक चले धरना प्रदर्शन के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। बिजली विभाग की डीई लक्ष्मी सोनवानी का तबादला कर उन्हें ग्वालियर विजिलेंस में डीजीएम (उपमहाप्रबंधक) पद पर पदस्थ कर दिया गया है। इसके बाद धरना समाप्त करने की सहमति बनी।
विधायक अम्बरीश शर्मा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे थे। इस दौरान उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों के रवैये, सरकारी रास्ते और रेत खदानों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
सूत्रों के अनुसार, भोपाल स्तर पर हस्तक्षेप के बाद यह ट्रांसफर आदेश जारी हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने विधायक को मनाने की प्रक्रिया तेज की। वहीं यह सब होने के बाद विधायक ने कहा कि क्षेत्र की जनता की समस्या को सीएम ने सुना। बहुत बहुत सीएम को आभार।
सरकारी रास्ते का विवाद अब भी बरकरार विधायक ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के परिवार की कोठी को लेकर आरोप लगाया कि यह सरकारी रास्ते पर बनी है, जो दलित बस्ती का मार्ग है। उन्होंने बताया कि इस रास्ते को लेकर लोग पिछले 595 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
बिजली विभाग पर था मुख्य आरोप धरने के दौरान विधायक ने बिजली कंपनी की डीई लक्ष्मी सोनवानी पर जनता से अभद्र व्यवहार और दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया था कि इस मामले को लेकर वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक से शिकायत कर चुके हैं। अब उनके ट्रांसफर को आंदोलन का बड़ा परिणाम माना जा रहा है।
रेत खदानों को लेकर भी नाराजगी विधायक ने लहार क्षेत्र में रेत खदानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि पास के मेहगांव में जहां 5 हजार रुपए में रेत मिल रही है, वहीं लहार में 11 हजार रुपए में ट्रॉली बिक रही है, जिससे आम जनता परेशान है।
बीजेपी मंडल अध्यक्ष बोले- जानबूझकर नहीं हाे रहा समाधान सुभाष अग्निहोत्री ने कहा कि लहार क्षेत्र की जनता लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रही है। उनका आरोप है कि सरकारी सिस्टम में बैठे कुछ लोग राजनीतिक पूर्वाग्रह से काम कर रहे हैं और जानबूझकर समस्याओं का समाधान नहीं होने दे रहे।
उन्होंने कहा कि तीनों प्रमुख मुद्दों का समाधान नहीं होने के कारण ही यह धरना आयोजित किया गया है।
बिजली बिल आने के बाद हो रही परेशानी धर्मेंद्र राठौर ने बिजली विभाग पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनका और उनकी पत्नी का बिजली बिल पूरी तरह जमा है, इसके बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कभी बिना कारण कनेक्शन काट दिया जाता है, कभी घर की फोटोग्राफी करवाई जाती है और कभी पैसे की मांग की जाती है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आम लोग मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं।
नीतेश भारद्वाज ने कहा था कि विधायक जनता की आवाज सरकार तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन पार्टी और प्रशासन के कुछ लोग वास्तविक स्थिति को दबा रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग निजी संबंधों के चलते पूर्व नेता प्रतिपक्ष के करीब हैं और इसी कारण क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा।
उन्होंने बोला इससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है और जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा।
बिजली अधिकारी के ट्रांसफर के बाद एक मुद्दे पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन विधायक ने स्पष्ट किया है कि अन्य दो प्रमुख मांगों- सरकारी रास्ता और रेत खदान पर समाधान होने तक संघर्ष जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, पूरे मामले को लेकर भोपाल में उच्चस्तरीय समीक्षा भी हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस