बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम कायम रखने की मांग को लेकर 20 जून को भोपाल में धरना

भोपाल में 20 जून 2026 को शाम 5 बजे इतवारा स्थित ट्रांसपोर्ट हम्माल मजदूर सभा कार्यालय के सामने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बनाए रखने की मांग को लेकर धरना आयोजित किया जाएगा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव शैलेन्द्र शैली ने बताया कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा नाम परिवर्तन का प्रस्ताव बरकतउल्ला भोपाली और स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों का अपमान है।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम कायम रखने की मांग को लेकर 20 जून को भोपाल में धरना

20 जून को भोपाल में होगा विरोध प्रदर्शन

भाकपा ने धरने का किया आह्वान

कार्य परिषद के नाम परिवर्तन प्रस्ताव का विरोध

बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को याद किया

स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों के अपमान का आरोप

भोपाल, 19 जून 2026। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में 20 जून को एक महत्वपूर्ण धरना आयोजित किया जाएगा। यह धरना शाम 5 बजे इतवारा क्षेत्र स्थित ट्रांसपोर्ट हम्माल मजदूर सभा के कार्यालय के सामने आयोजित होगा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने इस कार्यक्रम का आह्वान करते हुए इसे स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और ऐतिहासिक मूल्यों की रक्षा का अभियान बताया है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश के राज्य सचिव शैलेन्द्र शैली ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव न केवल भोपाल के महान स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली के योगदान का अपमान है, बल्कि यह देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े उन मूल्यों को भी कमजोर करने का प्रयास है, जिनके लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना जीवन समर्पित किया था।

उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वे भारत की प्रथम निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री रहे, साथ ही एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद, लेखक, पत्रकार और राष्ट्रवादी विचारक के रूप में भी उनकी पहचान रही है। उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शिक्षा और ज्ञान के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता है। ऐसे में विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव ऐतिहासिक तथ्यों और राष्ट्रीय विरासत की उपेक्षा का प्रतीक माना जा रहा है।

शैलेन्द्र शैली ने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा नाम परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव पारित किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका आरोप है कि यह कदम इतिहास को नए सिरे से परिभाषित करने और स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्यायों को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया प्रयास है। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली ने विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए भारत की आजादी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई थी और उनका योगदान भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

भाकपा के अनुसार, प्रस्तावित धरने में वामपंथी, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा से जुड़े राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और जन संगठनों के सदस्य भी शामिल होंगे। पार्टी ने उन सभी संगठनों और नागरिकों को आमंत्रित किया है जो अमन, सद्भाव, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए किया जा रहा है।

धरने के माध्यम से सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की जाएगी कि नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का वर्तमान नाम यथावत रखा जाए। आयोजकों का कहना है कि विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यह भोपाल और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसके नाम से जुड़ा कोई भी निर्णय व्यापक सामाजिक विमर्श और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने विश्वविद्यालय का नाम बरकरार रखने की वकालत की है। उनका कहना है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम पर स्थापित संस्थानों का महत्व केवल नाम तक सीमित नहीं होता, बल्कि वे नई पीढ़ियों को इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराने का कार्य भी करते हैं।

धरने के आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि बड़ी संख्या में नागरिक इस कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी लोकतांत्रिक आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, राष्ट्रवाद और सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं। उनके नाम को किसी भी संस्थान से हटाने का प्रयास जनभावनाओं के विपरीत है और इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

भाकपा ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं के दायरे में रहकर अपनी बात सरकार और समाज के सामने रखेंगे। साथ ही उन्होंने प्रदेश के सभी प्रगतिशील और लोकतांत्रिक संगठनों से इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील भी की है।

अब सबकी निगाहें 20 जून को होने वाले इस धरने पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर उठे इस विवाद पर सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों की आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।