दतिया विधायक राजेंद्र भारती को जेल: भूमि विकास बैंक घोटाले में दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने ठहराया दोषी, फर्जीवाड़े से बढ़वाई थी FD की अवधि

दतिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली एमपी-एमएलए कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया है। यह मामला भूमि विकास बैंक से जुड़ा है, जिसमें उन पर अपनी मां की एफडी की अवधि बढ़ाकर लाभ उठाने का आरोप था। भारती ने इस मामले को राजनीतिक दबाव के चलते ग्वालियर से दिल्ली स्थानांतरित करवाया था, जिसमें उन्होंने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर आरोप लगाए थे। कोर्ट ने उन्हें आईपीसी की धारा 420 के तहत दोषी करार दिया है।

दतिया विधायक राजेंद्र भारती को जेल: भूमि विकास बैंक घोटाले में दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने ठहराया दोषी, फर्जीवाड़े से बढ़वाई थी FD की अवधि

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती पर दतिया भूमि एवं कृषि विकास बैंक के अध्यक्ष रहते वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा था. वहीं अब गुरुवार को सजा का ऐलान किया जाएगा.

मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने भूमि विकास बैंक से जुड़े मामले में बुधवार को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने राजेंद्र भारती को तिहाड़ जेल भेज दिया है।

विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी मां के नाम बैंक में 10.50 लाख रुपए की एफडी तीन साल के लिए कराई थी, जिस पर 13.50% ब्याज मिल रहा था। आरोप है कि बाद में एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई।

इसी मामले में बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे धोखाधड़ी का मामला माना और केस दर्ज करने के आदेश दिए।

दतिया से कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक दांगी ने बताया कि विधायक राजेंद्र भारती को न्यायालय ने अभी केवल दोषी ठहराया है। कितनी सजा दी गई है, या क्या दंड दिया गया है। इस का अभी कोई अपडेट न्यायालय से नहीं आया है।

25 साल पहले की थी गड़बड़ी

यह मामला करीब 25 साल पुराना है, जब दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि ग्रामीण बैंक दतिया के अध्यक्ष थे। उसी दौरान उन्होंने अपनी मां स्व. सावित्री देवी के नाम पर 1998 में 10 लाख रुपये की एफडी (सावधि जमा) कराई, जिसकी अवधि 3 साल थी। उस समय 13.5% वार्षिक ब्याज मिल रहा था।

आरोप है कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने नियमों के विपरीत हर साल एफडी का ब्याज अलग से निकलवाया, जबकि नियमानुसार ब्याज और मूलधन मैच्योरिटी के बाद ही दिया जाता है। इस तरह तीन साल तक नियमों के खिलाफ भुगतान कराया गया।

कागजों में छेड़छाड़ कर बढ़ाई गई एफडी की अवधि

आरोप है कि 2001 में जब एफडी की अवधि पूरी होने वाली थी और बाजार में ब्याज दरें कम हो गई थीं, तब राजेंद्र भारती ने पद का दुरुपयोग कर दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर अवधि 3 साल और बढ़ा दी। इसके बाद भी उन्होंने 13.5% की ऊंची ब्याज दर पर हर साल ब्याज लिया।

आरोप है कि 2004 में फिर दस्तावेजों में बदलाव कर एफडी की अवधि करीब 10 साल और बढ़ा दी गई, जिससे उन्हें ज्यादा ब्याज मिलता रहा। यह पूरा खेल फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में बदलाव से किया गया।

2003 में सामने आया मामला, जांच में मिले सबूत

बैंक प्रबंधन को गड़बड़ी की जानकारी 2003 में मिली, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू हुई। जांच में राजेंद्र भारती और उनकी मां को दोषी पाया गया। इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम और दतिया की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट तक पहुंचा।

कोर्ट में दस्तावेजी साक्ष्य और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश (IPC 420, 467, 468, 471, 409, 120B) में मामला दर्ज कर पुलिस जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान बैंक के एक कर्मचारी को भी आरोपी बनाया गया।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई, फिर दिल्ली MP-MLA कोर्ट ट्रांसफर हुआ केस

इस केस में राजेंद्र भारती ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं दायर कीं, लेकिन राहत नहीं मिली। बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की कि मध्यप्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है, जिसके बाद मामला दिल्ली की स्पेशल सेशन कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।

पहले यह मामला दतिया कोर्ट में चला, फिर MP-MLA कोर्ट ग्वालियर और दिल्ली में सुनवाई हुई। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मामले में दोष सिद्ध माना है।