जीतू पटवारी पर दिग्विजय सिंह ने कसा तंज,AICC में आपकी जो पकड़ है वो हमारी नहीं": कहा- आप केसी वेणुगोपाल के सबसे प्रिय हो,गुरु-चेला” पर BJP का तंज
भोपाल में कांग्रेस की बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के बीच मंच से सियासी बयान पर घमासान, बीजेपी ने कहा ‘गृह युद्ध’
दिग्विजय सिंह ने जीतू पटवारी को मंच से सुनाई खरी-खरी, संगठन नियुक्तियों पर उठे सवाल
भोपाल में आयोजित कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की बैठक उस समय सुर्खियों में आ गई, जब वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर व्यंग्यात्मक अंदाज में तंज कस दिया। मंच पर कही गई उनकी बातों को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है—कहीं इसे हल्की-फुल्की नोकझोंक माना जा रहा है, तो कहीं इसे कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के संकेत के रूप में।
बैठक में राजेंद्र पाल गौतम, भगवती प्रसाद अहिरवार, सज्जन सिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल और सुरेंद्र चौधरी जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
संगठन और प्रतिनिधित्व पर उठाया सवाल
अपने संबोधन में दिग्विजय सिंह ने संगठन की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ समाजों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से वाल्मीकि और बसोर समाज का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी में इन वर्गों की भागीदारी नहीं दिख रही। उन्होंने सीधे जीतू पटवारी से कहा कि वे अपने प्रभाव का उपयोग कर इन वर्गों को संगठन में शामिल करें।
“केसी वेणुगोपाल के सबसे प्रिय हो”
दिग्विजय सिंह का सबसे चर्चित बयान तब आया, जब उन्होंने पटवारी की दिल्ली में पकड़ पर तंज कसते हुए कहा कि “आप तो केसी वेणुगोपाल के सबसे प्रिय हो, आप जो कहेंगे वो हो जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि AICC में पटवारी की जितनी पकड़ है, उतनी बाकी नेताओं की नहीं है। इस टिप्पणी को कई लोग हल्के व्यंग्य के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष दबाव मान रहे हैं।
“गुरु गुड़ रह गए, चेला शक्कर हो गया”
बैठक के दौरान माहौल तब हल्का हो गया जब जीतू पटवारी ने जवाब देते हुए कहा—“सर, चेला तो आपका ही हूं।” इस पर दिग्विजय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा—“हां, चेला हो, लेकिन गुरु गुड़ रह गए और चेला शक्कर हो गया।” यह संवाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे राजनीतिक हास्य के रूप में भी देखा जा रहा है।
2028 चुनाव और सामाजिक न्याय पर फोकस
राजनीतिक नोकझोंक के बीच बैठक का मुख्य एजेंडा संगठन को मजबूत करना और 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी था। जीतू पटवारी ने कहा कि अनुसूचित जाति विभाग कांग्रेस की रीढ़ है और इसे बूथ स्तर तक मजबूत करना जरूरी है।
राजेंद्र पाल गौतम ने संविधान की रक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी बताया, जबकि प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने “संविधान बचाओ” और “सामाजिक न्याय संवाद” जैसे अभियानों की घोषणा की।
भाजपा का हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के अंदर अंतर्कलह चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में परिवारवाद हावी है और नेताओं के बीच खींचतान साफ नजर आ रही है।
कांग्रेस का पलटवार
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि यह सब दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच की “केमिस्ट्री” है, न कि कोई विवाद। उन्होंने कहा कि पटवारी उतने ही प्रभावशाली हैं जितना एक पीसीसी अध्यक्ष को होना चाहिए, और भाजपा को अपने अंदर झांकने की जरूरत है।
सियासी मायने
इस पूरे घटनाक्रम के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। एक ओर यह कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संतुलन और प्रभाव की झलक दिखाता है, तो दूसरी ओर यह भी साफ करता है कि पार्टी सामाजिक न्याय और संगठन विस्तार के मुद्दे को लेकर गंभीर है।
हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘तंज’ आगे चलकर महज मजाक साबित होता है या फिर किसी बड़े राजनीतिक संकेत का हिस्सा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस