NHM भर्ती घोटाला: फर्जी डिग्री के सहारे डॉक्टर बने, 9 पर गिरी गाज:10 लाख में खरीदी MBBS डिग्री
मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अभी तक 12 डॉक्टरों की डिग्री फर्जी पाए गए हैं। अब सरकार ने 2000 से अधिक डॉक्टरों की डिग्री की जांच के आदेश दिए हैं।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में फर्जी डिग्री के सहारे मरीजों का इलाज कर रहे कथित डॉक्टरों के खिलाफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने बड़ी कार्रवाई की है। एनएचएम की शुरुआती जांच में प्रदेश के विभिन्न जिलों में नौ फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे कथित डॉक्टरों का बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की जांच में प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात नौ डॉक्टर फर्जी पाए गए हैं। इन सभी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है तथा उनके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दर्ज कराए गए हैं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, ये डॉक्टर कथित रूप से फर्जी एमबीबीएस डिग्री और फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन के आधार पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नौकरी कर रहे थे। सूत्रों का दावा है कि कुछ लोगों ने 10 से 10 लाख रुपये तक खर्च कर फर्जी डिग्रियां हासिल की थीं और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 70 से 80 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरियां प्राप्त कर ली थीं।
मामले का खुलासा दमोह जिले से शुरू हुआ, जहां एक डॉक्टर की योग्यता और दस्तावेजों पर संदेह होने के बाद जांच शुरू की गई। जांच का दायरा बढ़ने पर कई जिलों में तैनात डॉक्टरों के प्रमाणपत्रों की पड़ताल की गई। प्रारंभिक जांच में नौ डॉक्टरों के दस्तावेज फर्जी पाए गए, जिसके बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल जांच अभी जारी है और प्रदेश के विभिन्न संजीवनी क्लीनिकों तथा सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। भोपाल सहित कई जिलों में विशेष जांच दल बनाए गए हैं, जो डॉक्टरों की डिग्री, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अब तक 81 डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच की जा चुकी है। इनमें से 10 और डॉक्टरों की सूची संदिग्ध के रूप में तैयार की गई है। इन डॉक्टरों की डिग्रियां और रजिस्ट्रेशन नंबर जांच के दायरे में हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा फर्जी डॉक्टरों की संख्या बढ़ सकती है।
इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सही तरीके से सत्यापन किया जाता तो ऐसे लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में प्रवेश नहीं कर पाते। भर्ती प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही के कारण न केवल सरकारी धन का नुकसान हुआ बल्कि मरीजों की जान भी खतरे में पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी डॉक्टर के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा, गलत जानकारी या संदिग्ध प्रमाणपत्र पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उसकी सेवाएं भी समाप्त कर दी जाएंगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएचएम ने प्रदेशभर में कार्यरत सभी संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की नए सिरे से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मेडिकल डिग्री जारी करने वाले संस्थानों, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और संबंधित मेडिकल काउंसिलों से सीधे जानकारी प्राप्त की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी डॉक्टरों की मौजूदगी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर खतरा है। ऐसे लोग बिना पर्याप्त चिकित्सा ज्ञान के मरीजों का इलाज करते हैं, जिससे गलत उपचार, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं और यहां तक कि जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जरूरी है।
सरकार का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी कारण फर्जी डिग्री और गलत दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में केवल योग्य, प्रशिक्षित और वास्तविक डॉक्टर ही सेवाएं दें।
फिलहाल नौ डॉक्टरों की बर्खास्तगी के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जांच एजेंसियां लगातार दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत गया है कि फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस