पटवारी सुसाइड केस पर बढ़ा बवाल: नायब तहसीलदार अटैच, थाने में पटवारियों का रातभर धरना; सैलाना विधायक के समर्थन से कामकाज ठप
रतलाम के आलोट में पटवारी रविशंकर खराड़ी की आत्महत्या के बाद प्रदेशभर में आक्रोश है। पटवारियों ने नायब तहसीलदार पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए हत्या का केस दर्ज करने और निलंबन की मांग की है। थाने में रातभर धरना चला, जिसमें विधायक और सामाजिक संगठन भी शामिल हुए। प्रशासन ने अधिकारी को अटैच कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन आंदोलन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
पटवारी के कमरे से मिले दो पत्र, एक पत्र में नायब तहसीलदार पर लगाए प्रताड़ना के आरोप, विभाग में मचा है हड़कंप।
पटवारी सुसाइड केस: आलोट से रतलाम तक उबाल, नायब तहसीलदार पर केस की मांग; थाने में रातभर धरना, कामकाज ठप होने की चेतावनी
रतलाम जिले के आलोट में पदस्थ पटवारी रविशंकर खराड़ी की आत्महत्या ने पूरे प्रशासनिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। इस घटना के बाद न केवल राजस्व विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया, बल्कि मामला राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। पटवारियों ने सीधे तौर पर नायब तहसीलदार सविता राठौर पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने और तत्काल निलंबन की मांग की है।
मंगलवार देर रात यह मामला तब और गरमा गया, जब बड़ी संख्या में पटवारी और मृतक के परिजन रतलाम के औद्योगिक क्षेत्र थाना पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। यह धरना पूरी रात चला और बुधवार सुबह तक जारी रहा।
रातभर थाने में डटे रहे पटवारी, नहीं मानी समझाइश
पटवारी मंगलवार रात करीब 11:30 बजे थाने पहुंचे और जमीन पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि मृतक रविशंकर द्वारा लिखे गए पत्र को मृत्यु पूर्व बयान माना जाए और उसी आधार पर तत्काल नायब तहसीलदार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए।
थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी ने प्रदर्शनकारियों को समझाते हुए बताया कि फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन पटवारी इस बात पर अड़े रहे कि बिना देरी किए एफआईआर दर्ज की जाए।
धरना बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे तक चलता रहा। इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों से पीछे नहीं हटे।
अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर की बातचीत
धरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। एसडीएम आर्ची हरित, नायब तहसीलदार पिंकी साठे और अन्य अधिकारी देर रात थाने पहुंचे। उन्होंने पटवारियों के साथ जमीन पर बैठकर लंबी बातचीत की और उन्हें समझाने की कोशिश की।
अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी, लेकिन पटवारियों का कहना था कि यह आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप था कि यदि किसी पटवारी पर ऐसा आरोप लगता, तो तत्काल सख्त कार्रवाई कर दी जाती, लेकिन यहां अधिकारी होने के कारण ढिलाई बरती जा रही है।
विधायक और सामाजिक संगठनों का समर्थन
धरने को उस समय और बल मिला जब सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार मौके पर पहुंचे। उनके साथ जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के नेता चंदू मईड़ा और अन्य आदिवासी संगठन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
विधायक डोडियार ने साफ कहा कि यह मामला गंभीर है और नायब तहसीलदार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।
राजनीतिक समर्थन मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों का रुख और सख्त हो गया।
कलेक्टर का त्वरित कदम, लेकिन मांग अधूरी
बढ़ते दबाव के बीच रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार सविता राठौर को आलोट से हटाकर रतलाम भू-अभिलेख कार्यालय में अटैच कर दिया।
हालांकि, यह कार्रवाई पटवारियों को संतुष्ट नहीं कर पाई। उनका कहना था कि सिर्फ अटैच करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निलंबन और आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
कलेक्टर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पटवारी संघ की चेतावनी: काम करेंगे बंद
पटवारी संघ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पाटीदार ने आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार द्वारा लगातार नियमों के विपरीत काम कराने का दबाव बनाया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि मृतक को उसके भाई की शादी के दौरान भी छुट्टी नहीं दी गई, जिससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान था। संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो जिलेभर में पटवारी काम बंद कर देंगे, जिससे राजस्व व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
मंगलवार को रविशंकर खराड़ी ने रतलाम स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से पहले वह अपने छोटे भाई की शादी में शामिल था।
परिजनों के अनुसार, शादी के कार्यक्रम के दौरान भी वह तनाव में दिख रहा था। बारात राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के पास तारवाखाटी गई थी। शादी के बाद परिवार रतलाम लौटा, लेकिन रविशंकर बीच में ही वापस आ गया था।
रिसेप्शन के दिन भी वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। देर रात वह घर पहुंचा और अपने कमरे में चला गया।
पत्नी ने देखा तो फंदे पर लटका मिला
अगले दिन सुबह उसने परिवार से सामान्य बातचीत की। लेकिन दोपहर में जब वह कमरे से बाहर नहीं आया, तो उसकी पत्नी रीना उसे देखने गईं।
दरवाजा अंदर से बंद था। जैसे ही दरवाजा खोला गया, वह फंदे पर लटका मिला। यह दृश्य देखकर परिवार में कोहराम मच गया।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। कमरे की तलाशी के दौरान एक पत्र मिला, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।
वायरल लेटर ने बढ़ाई गंभीरता
इस घटना से करीब 15 दिन पहले रविशंकर द्वारा लिखा गया एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें उसने नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
पत्र में लिखा गया था कि उस पर लगातार काम का दबाव बनाया जा रहा था और गलत तरीके से रिकॉर्ड में बदलाव कराने के लिए मजबूर किया जा रहा था। उसने यह भी दावा किया था कि उसे कई बार अधिकारी के क्वार्टर पर बुलाया गया और धमकियां दी गईं।
यह पत्र सामने आने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है और जांच की मांग तेज हो गई है।
परिवार के आरोप: मानसिक दबाव में था रविशंकर
मृतक के परिवार ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसकी मां केसर खराड़ी ने बताया कि रविशंकर अक्सर कहता था कि अधिकारी उसे परेशान करती हैं।
परिजनों के अनुसार, उस पर किसानों से पैसे लेने के लिए भी दबाव बनाया जाता था। इस वजह से वह मानसिक तनाव में था और नौकरी छोड़ने की बात भी कर रहा था।
परिवार की स्थिति: गर्भवती पत्नी और छोटी बेटी
रविशंकर खराड़ी अपने पीछे चार साल की बेटी और गर्भवती पत्नी को छोड़ गया है। परिवार में उसकी मां, छोटा भाई और बहन भी साथ रहते हैं।
उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि दोषियों को सख्त सजा मिले।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
इस पूरे मामले ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक ओर कर्मचारी संगठन आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं।
यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह बड़ा आंदोलन बन सकता है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होगा।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। प्रशासन ने भी जांच के आदेश दिए हैं।लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मृतक को न्याय मिलेगा और क्या आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगी कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक जांच बनकर रह जाएगा या फिर एक बड़ा जन आंदोलन का रूप लेगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस