किसानों और कांग्रेसियों का विरोध: सीहोर में शिवराज का काफिला रुका, नीमच में विधायक सखलेचा को कार्यक्रम छोड़कर लौटना पड़ा
जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। इस दौरान उन्हें कार्यक्रम पूरा किए बिना ही लौटना पड़ा है। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
अधूरे वादों पर गुस्साए ग्रामीणों ने भाजपा विधायक की गाड़ी का घेराव किया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद ग्रामीणों ने लगाए "चोर-चोर" के नारे लगाए।
भोपाल/सीहोर/नीमच। मध्य प्रदेश में रविवार को किसानों और ग्रामीणों के विरोध ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी। एक ओर सीहोर में किसानों की मांगों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के काफिले को रोककर विरोध प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर नीमच जिले के जावद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि उन्हें कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर वापस लौटना पड़ा।
दो अलग-अलग जिलों में हुई इन घटनाओं ने प्रदेश में विकास कार्यों, किसानों की समस्याओं और जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता की नाराजगी को एक बार फिर सामने ला दिया है। दोनों घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और राजनीतिक दल भी इन्हें लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।
सीहोर में शिवराज सिंह चौहान के काफिले का विरोध
सीहोर जिले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका रास्ता रोककर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए नारेबाजी कर रहे थे और सरकार पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे थे।
हालांकि स्थिति उस समय अलग मोड़ लेती दिखाई दी जब शिवराज सिंह चौहान ने अपना काफिला रुकवाया और स्वयं वाहन से बाहर निकल आए। उन्होंने विरोध कर रहे कांग्रेस नेताओं से हाथ मिलाया और मुस्कुराते हुए कहा, "आओ गले लगो।" उनके इस व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
शिवराज ने विरोध कर रहे नेताओं की बातें भी सुनीं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की सलाह दी। उन्होंने नारेबाजी कर रहे लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की। इसके बाद वे अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत जल कल्याण शिविर में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवराज सिंह चौहान ने विरोध को टकराव की बजाय संवाद के जरिए संभालने की कोशिश की, जिससे स्थिति बिगड़ने से बच गई। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि किसानों की समस्याओं को लेकर उनका विरोध पूरी तरह जायज था और सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
नीमच में विधायक ओमप्रकाश सखलेचा के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
उधर नीमच जिले के जावद विधानसभा क्षेत्र के बांगरेड गांव में भाजपा विधायक ओमप्रकाश सखलेचा को ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीण अस्पताल तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बनने से नाराज थे और उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ही अपना आक्रोश जाहिर कर दिया।
जानकारी के अनुसार बांगरेड गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन के लोकार्पण और अन्य विकास कार्यों से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। विधायक ओमप्रकाश सखलेचा मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पहुंचे थे। मंच पर पहुंचने के बाद जैसे ही उन्होंने विकास कार्यों पर बोलना शुरू किया, ग्रामीणों ने सड़क निर्माण का मुद्दा उठा दिया।
ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल भवन का निर्माण तो किया जा रहा है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उचित सड़क नहीं है। बरसात के मौसम में रास्ता कीचड़ और गड्ढों से भर जाता है, जिससे मरीजों और एम्बुलेंस को भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता ही ठीक नहीं है तो भवन निर्माण का लाभ लोगों तक कैसे पहुंचेगा।
मंच के सामने हुई नारेबाजी
ग्रामीणों ने कार्यक्रम स्थल पर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने विधायक के खिलाफ नाराजगी जताते हुए तीखे शब्दों का भी इस्तेमाल किया। देखते ही देखते विरोध बढ़ गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मंच के आसपास जमा हो गए।
मौके पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय नेता स्थिति को संभालने का प्रयास करते रहे, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क निर्माण के बिना अन्य विकास कार्यों का कोई मतलब नहीं है।
विरोध के दौरान माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया। ग्रामीणों ने मंच को चारों ओर से घेर लिया और विधायक से सीधे जवाब मांगने लगे। इससे कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल गया।
धक्का-मुक्की तक पहुंचा मामला
स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारी मंच के बेहद करीब पहुंच गए। विधायक और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस होने लगी। माहौल तनावपूर्ण देखकर सुरक्षा कर्मियों ने विधायक को सुरक्षा घेरे में ले लिया।
इसी दौरान ग्रामीणों और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कुछ देर तक कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा बलों ने किसी तरह विधायक को भीड़ से बाहर निकाला और उनके वाहन तक पहुंचाया।
ग्रामीण लगातार नारेबाजी करते रहे और अपने विरोध को जारी रखा। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार स्थिति को देखते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाना संभव नहीं था।
अधूरा रह गया कार्यक्रम
ग्रामीणों के विरोध के चलते कार्यक्रम को बीच में ही समाप्त करना पड़ा। विधायक ओमप्रकाश सखलेचा निर्धारित कार्यक्रम पूरा नहीं कर सके और उन्हें वापस लौटना पड़ा। विरोध के कारण अस्पताल से जुड़े प्रस्तावित भूमिपूजन और अन्य औपचारिकताएं भी पूरी नहीं हो सकीं।
घटना के बाद प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मामले की जानकारी ली। स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों की मांगों और सड़क निर्माण से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रहा है। वहीं घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग विभिन्न प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
जनता के मुद्दों ने बढ़ाई राजनीतिक चुनौती
सीहोर और नीमच की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि किसानों और ग्रामीणों से जुड़े बुनियादी मुद्दे अब राजनीतिक मंचों तक पहुंच रहे हैं। जहां सीहोर में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया, वहीं नीमच में ग्रामीणों ने सड़क जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर जनप्रतिनिधि के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इन मुद्दों के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल दोनों घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक नया अवसर मिल गया है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस