जयभान सिंह पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष, केके सिंह सदस्य नियुक्त—निगम-मंडलों में बंटने लगी जिम्मेदारियां
मध्य प्रदेश में राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को बनाया है। अपर मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए आईएएस अधिकारी केके सिंह सदस्य होंगे। वहीं, विधानसभा के सेवानिवृत्त अपर सचिव वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया गया है।
सियासी नियुक्तियों की शुरुआत: जयभान सिंह पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष, केके सिंह सदस्य नियुक्त
MP Nigam Mandal: ग्वालियर के पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को लंबे समय बाद भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी दी है. उन्हें सरकार ने राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया है. ऐसे में अब मध्य प्रदेश में एक बार फिर निगम मंडलों में नियुक्तियों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. क्योंकि लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अब दिख रही है. चैत्र नवरात्र के पहले दिन गुरुवार से ही इसकी शुरुआत की है. जयभान सिंह पवैया के साथ सेवानिवृत्त हुए आईएएस अधिकारी केके सिंह राज्य वित्त आयोग में सदस्य बनाया गया है.
जयभान सिंह पवैया को लंबे समय बाद मिली जिम्मेदारी
जयभान सिंह पवैया को भाजपा ने एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. उनका लंबा राजनीतिक करियर रहा है. पवैया ग्वालियर से लोकसभा सांसद रह चुके हैं. जबकि 2013 में उन्होंने ग्वालियर सीट से विधानसभा का चुनाव जीता था. जिसके बाद उन्हें सरकार में मंत्री बनाया गया था. वह राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. पिछले कुछ चुनावों में वह लगातार टिकट के दावेदार माने जा रहे थे. जबकि, उनका नाम राज्यसभा सीट के लिए भी चला था. लेकिन भाजपा ने अब उन्हें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया है. जिसके बाद जयभान सिंह पवैया को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया है
इन कामों पर देगा अपनी सिफारिश
आयोग के अध्यक्ष और सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तिथि से 31 अक्टूबर 2026 तक कार्य करेंगे। आयोग का मुख्य कार्य पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का पुनर्विलोकन करना होगा। आयोग राज्य के करों, शुल्कों, पथकरों और फीस से प्राप्त आय के राज्य एवं स्थानीय निकायों के बीच वितरण के सिद्धांत तय करेगा। साथ ही पंचायतों और नगरीय निकायों को मिलने वाले अनुदानों, वित्तीय सुधार उपायों और संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे पर सुझाव देगा।
इन मुद्दों पर भी देगा अपनी सिफारिशें
आयोग स्थानीय निकायों की वित्तीय मजबूती के लिए कई अहम बिंदुओं पर अनुशंसाएं देगा, जिनमें भूमि कर एवं राजस्व के बंटवारे के प्रावधान, पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाले कर का हिस्सा, पंचायतों व नगरीय निकायों की ऋण सीमा और पुनर्भुगतान व्यवस्था, स्थानीय निकायों के व्यय और आय के संतुलन के उपाय, जन-सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के सुझाव और पर्यावरण संरक्षण और योजनाओं के प्रभावी संचालन के उपाय शामिल हैं। आयोग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्ष की अवधि के लिए अपनी सिफारिशें राज्यपाल को प्रस्तुत करेगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस