कन्या छात्रावास की अधीक्षिका को हटाया,कन्वर्जन का आरोप झाबुआ में बढ़ा विवाद,हॉस्टल में रहना है राम-राम और सूर्य नमस्कार को छोड़ना होगा'

झाबुआ के रोटला स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राओं ने आरोप लगाया है कि वार्डन बाइबिल पढ़ने के लिए दबाव बनाती हैं। छात्राएं और उनके पालकों ने कलेक्टर के पास पहुंचकर शिकायत दी

कन्या छात्रावास की अधीक्षिका को हटाया,कन्वर्जन का आरोप झाबुआ में बढ़ा विवाद,हॉस्टल में रहना है राम-राम और सूर्य नमस्कार को छोड़ना होगा'

झाबुआ जिले के रोटला स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में बाइबिल पाठ और प्रार्थना सभाओं का वीडियो सामने आया है। मंगलवार को परिजन के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं छात्राओं ने छात्रावास अधीक्षक बबीता डाबी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए 

रामा विकासखंड के रोटला स्थित कस्तूरबा गांधी कन्या आश्रम में बाइबिल पढ़ने, ईसाई प्रार्थना करने के वीडियो सामने आने के बाद पद से हटाई गई अधीक्षिका बबीता डाबी के समर्थन में बुधवार को छात्राओं ने मोर्चा संभाल लिया है। इस दौरान बबीता ने बालिकाओं को मीडिया से मिलवाया।

छात्राओं ने बताया, जब ये वीडियो बने थे, तब बबीता मैडम नहीं थी। सहायक वार्डन ने किताब पढ़वाई और वीडियो बनाए थे। ये वीडियो नवंबर के हैं। हालांकि जब बबीता डाबी से पूछा गया कि आप कब छुट्टी पर थीं तो उन्होंने दावा किया, जबसे ज्वाइन किया, एक भी दिन छुट्टी पर नहीं रही। यहां मौजूद एक छात्रा के पिता ने बताया, बच्ची ने स्कूल में ईसाई प्रार्थना कराने के बारे में बताया था। तब ये मैडम यहां नहीं थी।

मंगलवार को हिंदूवादी संगठनों और अभाविप ने स्कूल में ईसाई धर्म की प्रार्थनाएं कराने के आरोप लगाते हुए ज्ञापन दिया था। इसके बाद कलेक्टर ने जांच टीम बनाई। टीम तीन दिनों में रिपोर्ट देगी। दूसरी ओर ये बात भी सामने आई है कि अफसरों के पास वीडियो कुछ दिन पहले भेजे गए थे। इसके बाद 7 फरवरी को अधीक्षिका को नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा गया था। लेकिन इसके आगे कार्यवाही नहीं बढ़ सकी। ऐसे में नई टीम की जांच और पहले दिए गए नोटिस की प्रक्रिया दोनों एक साथ जारी रहेगी।

डर के कारण 10-12 छात्राओं ने छोड़ा हॉस्टल

इस मानसिक प्रताड़ना और डरावने माहौल की वजह से करीब 10 से 12 छात्राओं ने हॉस्टल छोड़ दिया है। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी संस्थान में इस तरह किसी विशेष धर्म का प्रचार करना नियमों का खुला उल्लंघन है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब जिले में पहले से ही धार्मिक मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है।

अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले में जनजाति कार्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी लेने के लिए सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग सुप्रिया बिसेन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। न तो विभाग की ओर से कोई खंडन जारी हुआ और न ही वायरल वीडियो को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति सामने रखी गई।