इंदौर हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा: बीजेपी से जुड़ी महिला हिरासत में, डिजिटल सबूतों की जांच तेज; श्वेता जैन ने सरकारी गवाह बनने की जताई इच्छा

इंदौर हनीट्रैप मामले में बीजेपी नेत्री रेशू चौधरी का नाम सामने आया है. आरोप है कि गिरोह नेताओं, अफसरों और कारोबारियों को फंसाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाता और ब्लैकमेल करता था. क्राइम ब्रांच डिजिटल डेटा और नेटवर्क की फोरेंसिक जांच कर रही है.

इंदौर हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा: बीजेपी से जुड़ी महिला हिरासत में, डिजिटल सबूतों की जांच तेज; श्वेता जैन ने सरकारी गवाह बनने की जताई इच्छा

इंदौर हनी ट्रैप केस में नया मोड़, बीजेपी से जुड़ी महिला आरोपी हिरासत में

रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को माना जा रहा नेटवर्क की अहम कड़ी

M श्वेता जैन, अलका और रेशू पर प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने का आरोप

इंदौर। मध्य प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप प्रकरण में जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर से जुड़े कथित ब्लैकमेलिंग और हनी ट्रैप मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक और महिला आरोपी को हिरासत में लिया है। सूत्रों के अनुसार, सागर से हिरासत में ली गई महिला की पहचान रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी के रूप में हुई है, जिसे इस पूरे नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि रेशू भाजपा के एक प्रकोष्ठ में पदाधिकारी भी रह चुकी है।

इस मामले में पहले ही कई लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जिनमें कथित मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन, महिला शराब कारोबारी अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा शामिल हैं। अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के दायरे और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही हैं।

रेशू को माना जा रहा नेटवर्क की अहम कड़ी

क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रेशू, श्वेता जैन और अलका दीक्षित के साथ कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, रेशू का संपर्क पहले श्वेता विजय जैन से हुआ और फिर उसके जरिए वह अलका दीक्षित तक पहुंची।

पुलिस को आशंका है कि इन तीनों ने मिलकर प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की रणनीति तैयार की थी। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए कथित रूप से लोगों को फंसाकर बाद में ब्लैकमेल किया जाता था।

वीडियो और ऑडियो सबूत जुटाने में जुटी पुलिस

मामले की जांच अब डिजिटल साक्ष्यों पर केंद्रित हो गई है। क्राइम ब्रांच की प्राथमिकता रेशू और अलका के पास मौजूद कथित वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जब्त करना है।

जांच एजेंसियों को आरोपियों के मोबाइल फोन से कुछ ऑडियो और वीडियो फाइलें मिलने की जानकारी भी सामने आई है। अब इन डिजिटल सामग्रियों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री कितनी पुरानी है, किन लोगों से जुड़ी है और क्या उनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग में किया गया।

पुलिस मोबाइल डेटा, चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड, क्लाउड स्टोरेज और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है।

श्वेता जैन ने जताई सरकारी गवाह बनने की इच्छा

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरोपी श्वेता विजय जैन ने पुलिस के सामने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है।

यदि जांच एजेंसियां और न्यायिक प्रक्रिया इसकी अनुमति देती है, तो श्वेता का बयान पूरे मामले की दिशा बदल सकता है। माना जा रहा है कि यदि वह जांच में सहयोग करती है, तो नेटवर्क के संचालन, संपर्कों और कथित ब्लैकमेलिंग पैटर्न से जुड़े कई नए खुलासे हो सकते हैं।

हालांकि अभी तक इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि उसे सरकारी गवाह बनाया जाएगा या नहीं।

हेड कॉन्स्टेबल से देर रात तक पूछताछ

मामले में नाम सामने आने के बाद हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा से भी देर रात तक पूछताछ की गई। जांच एजेंसियों को उसके और अलका दीक्षित के बीच संपर्क के संकेत मिले हैं।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह संपर्क व्यक्तिगत था या कथित नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

निमाड़ के प्रभावशाली नेता को भी बनाया गया था निशाना

जांच के दौरान एक और अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, रेशू और उसके साथियों ने निमाड़ क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता को भी निशाना बनाया था।

बताया गया है कि उस नेता का इंदौर स्थित मकान उसी इलाके में है जहां अलका दीक्षित रहती है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क किन-किन लोगों तक पहुंचा था और क्या अन्य प्रभावशाली लोग भी इसके दायरे में आए थे।

हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी नेता या अन्य व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

ब्लैकमेलिंग के दौरान दिखाई गई कथित वीडियो क्लिप

सूत्रों के अनुसार, जब अलका दीक्षित ने चिंटू ठाकुर को कथित रूप से ब्लैकमेल करने की कोशिश की, तब उसने अपनी पहुंच और प्रभाव का जिक्र किया था।

बताया जा रहा है कि जवाब में अलका ने कथित वीडियो का हवाला देते हुए कहा था कि जिन प्रभावशाली लोगों के नाम लिए जा रहे हैं, उनसे जुड़े वीडियो भी उसके पास मौजूद हैं।

हालांकि पुलिस अभी इन दावों की पुष्टि नहीं कर रही है और जांच जारी है।

शिकायत के 19 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर

मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि कथित ब्लैकमेलिंग की शिकायत मिलने के लगभग 19 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई।

वहीं, शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर पहले से ही इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी बताया जा रहा है।

जेल से शुरू हुआ नया नेटवर्क?

डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि श्वेता जैन और अलका दीक्षित की जेल में कई बार मुलाकात हुई थी।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसी दौरान कथित रूप से नए नेटवर्क की योजना बनी और बाद में इसे सक्रिय किया गया। अब पुलिस जेल रिकॉर्ड, मुलाकात रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

तकनीकी जांच में जुटी क्राइम ब्रांच

फिलहाल क्राइम ब्रांच डिजिटल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से मोबाइल फोन, चैट लॉग, ऑडियो-वीडियो क्लिप और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और नाम सामने आ सकते हैं। हालांकि पुलिस ने अन्य संभावित आरोपियों की जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया है।

यह मामला अब केवल कथित ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह नेटवर्क कितना व्यापक था और इसके तार किन-किन लोगों तक जुड़े हुए थे।