एमपी के स्कूलों में बड़ा बदलाव: सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पढ़ाई जाएगी, AI शिक्षा पर फोकस; 1 जुलाई से पहले होगी अतिथि शिक्षकों की भर्ती

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के सिलेबस में बड़े बदलाव की तैयारी. स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिए निर्देश.

एमपी के स्कूलों में बड़ा बदलाव: सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पढ़ाई जाएगी, AI शिक्षा पर फोकस; 1 जुलाई से पहले होगी अतिथि शिक्षकों की भर्ती

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूली शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।.

भोपाल। मध्य प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मंत्रालय में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जिनका असर आने वाले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों पर दिखाई देगा। बैठक में तय किया गया कि अब प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही कक्षा 8वीं से 12वीं तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित शिक्षा को जोड़ने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री Uday Pratap Singh भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, रोजगारपरक पाठ्यक्रम और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जाए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और भविष्य उन्मुख शिक्षा मिल सके।

पाठ्यक्रम में शामिल होगी सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति को विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए सम्राट विक्रमादित्य के जीवन चरित्र को स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। साथ ही गुरु सांदीपनि के जीवन और शिक्षण पद्धति पर भी एक रोचक पुस्तक तैयार करने की बात कही गई।

सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के उन शासकों में गिने जाते हैं जिन्हें न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन का प्रतीक माना जाता है। उनकी राजधानी उज्जैन रही और माना जाता है कि उन्होंने विदेशी शकों को पराजित कर विक्रम संवत की शुरुआत की थी। उनके दरबार के नवरत्नों में महाकवि कालिदास और खगोलविद वराहमिहिर जैसे विद्वानों का उल्लेख मिलता है।

सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए ऐसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करना आवश्यक है।

स्कूल शिक्षा में AI की एंट्री

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI को स्कूल शिक्षा से जोड़ने का रहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कक्षा 8वीं से 12वीं तक AI आधारित कौशल शिक्षा शुरू करने की योजना तैयार की जाए।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें रोजगार तथा नवाचार के लिए तैयार करना है। आने वाले समय में AI, मशीन लर्निंग और तकनीकी आधारित शिक्षण पद्धति शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकती है।

सरकार का मानना है कि नई पीढ़ी को डिजिटल और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

1 जुलाई से पहले पूरी होगी अतिथि शिक्षकों की भर्ती

बैठक में शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं को पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1 जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए ताकि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में शिक्षकों की कमी न रहे।

इसके अलावा स्कूल भवनों की मरम्मत, आंशिक रूप से जर्जर शालाओं के सुधार, बाउंड्री वॉल निर्माण और मूलभूत सुविधाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

सरकार चाहती है कि 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी स्कूल पूरी तरह तैयार हों और विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

“शिक्षक वंदना कार्यक्रम” होगा आयोजित

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 1 जुलाई से गुरु पूर्णिमा तक प्रदेश में “शिक्षक वंदना कार्यक्रम” आयोजित किया जाएगा। इसमें अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के योगदान को सम्मान देना और समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।

स्कूलों में होंगे पूर्व छात्र सम्मेलन

सरकार ने स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो विद्यार्थी अपने पुराने विद्यालयों से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, वे स्कूलों के विकास और विस्तार में योगदान दे सकते हैं।

पूर्व छात्रों की भागीदारी से स्कूलों में संसाधनों, मार्गदर्शन और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उत्कृष्ट परिणाम देने वाले शिक्षकों का होगा सम्मान

बैठक में परीक्षा परिणामों की समीक्षा भी की गई। जानकारी दी गई कि प्रदेश की 26 शालाओं ने शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम हासिल किया है, जहां सभी विद्यार्थी सफल हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसी शालाओं के शिक्षकों का सार्वजनिक सम्मान किया जाए। इसके अलावा 90 और 95 प्रतिशत से अधिक परिणाम देने वाले विद्यालयों को भी सम्मानित करने की बात कही गई।

उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित मॉनिटरिंग, तकनीक आधारित शिक्षण और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है।

रोजगारपरक शिक्षा पर भी जोर

सरकार स्कूल शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य रोजगारपरक विषयों को पढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी मजबूत करने की योजना है ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ रोजगार कौशल भी सीख सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे मजबूत आधार है। सरकार का लक्ष्य है कि हर विद्यार्थी तक बेहतर शैक्षणिक संसाधन समय पर पहुंचें और शिक्षा व्यवस्था आधुनिक, तकनीकी और रोजगारोन्मुख बने।