“नाली में घुसेड़ दूंगा…”: रीवा में मेयर का फूटा गुस्सा, निगमकर्मी को लगाई फटकार; BJP बोली- SC का अपमान
रीवा में सीवर के गंदे पानी की समस्या को लेकर निरीक्षण पर पहुंचे महापौर अजय मिश्रा बाबा एक निगमकर्मी की गैरहाजिरी पर भड़क गए और फोन पर उसे कड़ी फटकार लगाई, जिसका वीडियो वायरल हो गया। इस दौरान इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे अनुसूचित जाति (SC) समुदाय का अपमान बताते हुए महापौर पर निशाना साधा है, जिससे मामला अब सियासी रंग ले चुका है।
वार्डों का निरीक्षण के दौरान घरों में सीवर का पानी आने से रीवा मेयर अजय मिश्रा आपा खो बैठे. नगर निगम के दरोगा से बदसलूकी.
रीवा में मेयर का गुस्सा फूटा: दरोगा को फोन पर लगाई फटकार, वीडियो वायरल
सीवर पानी की गंभीर समस्या पर वार्ड 16 पहुंचे महापौर अजय मिश्रा बाबा, गैरहाजिर दरोगा पर भड़के; बयान के बाद सियासी घमासान तेज
रीवा नगर निगम क्षेत्र में गुरुवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब महापौर अजय मिश्रा बाबा ने वार्ड क्रमांक 16 आदर्श नगर में निरीक्षण के दौरान नगर निगम के एक दरोगा को फोन पर जमकर फटकार लगाई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
सीवर पानी की समस्या से परेशान थे वार्डवासी
दरअसल, आदर्श नगर वार्ड क्रमांक 16 में पिछले करीब एक सप्ताह से गंभीर समस्या बनी हुई थी। यहां के कई घरों में लगे बोरवेल से गंदा और बदबूदार पानी निकल रहा था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पानी में सीवर की गंदगी मिल रही है, जिससे न केवल पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ गए हैं।
वार्डवासियों के मुताबिक, उन्होंने इस समस्या की शिकायत कई बार नगर निगम के अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से की थी, लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। समस्या लगातार बढ़ती गई और अंततः लोगों ने सीधे महापौर तक अपनी बात पहुंचाई।
शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंचे महापौर
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए महापौर अजय मिश्रा बाबा ने स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करने का निर्णय लिया। गुरुवार सुबह वे नगर निगम की टीम, टेक्निकल स्टाफ और कार्यपालन यंत्रियों के साथ वार्ड क्रमांक 16 पहुंचे।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने क्षेत्र की नालियों, जल स्रोतों और आसपास के हालात का जायजा लिया। इस दौरान पाया गया कि कई नालियां गंदगी से भरी हुई हैं और उनकी सफाई लंबे समय से नहीं हुई है। इसके अलावा, जिन स्थानों पर बोरिंग की गई है, वे कई जगहों पर नालियों के बेहद करीब स्थित हैं, जिससे सीवर का पानी भूजल में मिल रहा है।
दरोगा की गैरमौजूदगी पर भड़के महापौर
निरीक्षण के दौरान जब यह पता चला कि संबंधित वार्ड का दरोगा हीरा लाल मौके पर मौजूद नहीं है, तो महापौर का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तत्काल नगर निगम के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मुरारी कुमार को फोन किया और दरोगा से बात कराने को कहा।
फोन पर बातचीत के दौरान महापौर ने दरोगा को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि वह कभी वार्ड का निरीक्षण करने क्यों नहीं आता और झूठ बोलने का आरोप भी लगाया। महापौर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र में गंभीर समस्या बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारी मौके से गायब हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तुरंत जेसीबी मशीन और पानी के टैंकर भेजे जाएं, ताकि नालियों की सफाई और जल निकासी का काम शुरू किया जा सके। साथ ही उन्होंने एक स्थानीय व्यक्ति पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आर्थिक दंड लगाने के भी निर्देश दिए।
वीडियो वायरल, बयान पर मचा बवाल
महापौर द्वारा दरोगा को फटकार लगाने का वीडियो मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में महापौर का आक्रामक रवैया और तीखी भाषा स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है।
वीडियो के वायरल होते ही शहर में इसको लेकर बहस छिड़ गई। एक वर्ग जहां महापौर की सख्ती को प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग उनकी भाषा और व्यवहार पर सवाल उठा रहा है।
महापौर ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद महापौर अजय मिश्रा बाबा ने अपने बयान में कहा कि उन्हें वार्ड के लगभग 30 लोगों से शिकायत मिली थी। लोगों ने उन्हें गंदा पानी भी दिखाया, जो उनके घरों के बोर से निकल रहा था।
उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही नगर निगम के टेक्निकल स्टाफ और पीएचई विभाग की टीम को जांच के लिए भेजा था। टीम ने 2-3 दिनों तक जांच की, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। बाद में यह पाया गया कि कुछ बोर नालियों के बेहद पास स्थित हैं, जिससे सीवर का पानी उनमें मिल रहा है।
महापौर ने यह भी कहा कि निरीक्षण के दौरान उन्हें दरोगा के खिलाफ कई शिकायतें मिलीं। लोगों का कहना था कि वह न तो नियमित निरीक्षण करता है और न ही अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन करता है। इसी कारण उन्होंने सख्त कार्रवाई की बात कही।
राजनीतिक विवाद ने पकड़ा तूल
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीनानाथ वर्मा ने महापौर के व्यवहार की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए और इस तरह की टिप्पणी पद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महापौर का यह व्यवहार अहंकार को दर्शाता है।
दीनानाथ वर्मा ने इसे अनुसूचित जाति समुदाय का अपमान बताते हुए कहा कि देश में जहां सफाई कर्मियों को सम्मान देने की बात की जाती है, वहीं इस तरह की भाषा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि महापौर अपने कार्यकाल के चार वर्षों में पहली बार क्षेत्र में सक्रिय रूप से दिखाई दिए हैं।
शहर में चर्चा का माहौल
घटना के बाद पूरे रीवा शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा का माहौल है। सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ लोग महापौर की कार्यशैली को “एक्शन मोड” बताते हुए सराहना कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे “अत्यधिक आक्रामक” और “अनुचित” करार दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्हें अपने व्यवहार और भाषा का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वे एक जिम्मेदार पद पर होते हैं।
प्रशासनिक सवाल भी खड़े
यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों एक सप्ताह तक इतनी गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया जा सका? क्यों जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे? और क्या नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है?
ये सभी सवाल अब स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं।
आगे क्या?
फिलहाल, नगर निगम की टीम द्वारा वार्ड में सफाई और जल निकासी का कार्य शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान निकाल लिया जाएगा।
वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे के और तूल पकड़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह मामला नगर निगम की बैठकों और स्थानीय राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन सकता है
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस