अपने ही विधायक को भूले मंत्री तुलसी सिलावट, सवाल सुनते ही उलझे: चिंतामणि मालवीय को बता बैठे कांग्रेस नेता, यौन शोषण के आरोप पर बोले- “सही होगा, तभी लगा”

अपने ही विधायक को भूले मंत्री तुलसी सिलावट, सवाल सुनते ही उलझे: चिंतामणि मालवीय को बता बैठे कांग्रेस नेता, यौन शोषण के आरोप पर बोले- “सही होगा, तभी लगा”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल सुनते ही मंत्री तुलसीराम सिलावट बयान बदलते नजर आए। पहले चिंतामणि मालवीय को कांग्रेस से जोड़ दिया, फिर आरोपों को सही बताया और बाद में उन्हें बेबुनियाद कहकर सफाई देते रहे।

मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को उस समय अजीब स्थिति बन गई, जब प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट अपनी ही पार्टी के विधायक और पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय को पहचानने में उलझ गए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सवाल पर मंत्री सिलावट पहले तो मालवीय को कांग्रेस नेता समझ बैठे, फिर उन पर लगे आरोपों को “सही होगा, तभी लगाए गए होंगे” कहकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी। बाद में जब मंच पर मौजूद बीजेपी नेताओं ने उन्हें पूरा मामला याद दिलाया, तब मंत्री ने अपना बयान बदल लिया।

पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब पत्रकारों ने मंत्री सिलावट से बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय पर लगे यौन शोषण के आरोपों को लेकर सवाल पूछा। दरअसल, मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने हाल ही में मालवीय पर एक महिला के साथ कथित यौन शोषण और संपत्ति कब्जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले ने पिछले कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा रखी है।

मीडिया के सवाल पर मंत्री सिलावट ने पहले प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है, मुझसे क्यों पूछ रहे हो?” उनका यह जवाब सुनते ही मंच पर बैठे बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के चेहरे बदल गए। कुछ नेताओं ने तुरंत मंत्री को याद दिलाया कि चिंतामणि मालवीय बीजेपी विधायक हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी रह चुके हैं।

इसके बाद स्थिति और ज्यादा असहज हो गई। मंत्री सिलावट ने बात संभालने की कोशिश करते हुए कहा, “अगर आरोप लगाए गए हैं तो सही होंगे, तभी लगाए गए होंगे। जांच होगी तो सच सामने आ जाएगा।” मंत्री का यह बयान सामने आते ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग हैरान रह गए। बीजेपी नेताओं ने दोबारा उन्हें बीच में रोका और पूरे मामले की जानकारी दी।

कुछ ही देर बाद मंत्री सिलावट ने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया। उन्होंने कहा कि “जो आरोप लगाए गए हैं, वे बेबुनियाद हैं और चिंतामणि मालवीय ने जो शिकायत की है, वह सही है।” लगातार बदलते बयानों के कारण प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल असहज बना रहा। मौके पर मौजूद पत्रकार और कार्यकर्ता मंत्री के जवाबों को लेकर चर्चा करते नजर आए।

यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि मंत्री सिलावट प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं और बीजेपी संगठन में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। ऐसे में अपनी ही पार्टी के विधायक को पहचानने में हुई चूक और फिर बयान बदलने की स्थिति ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया।

दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने विधायक चिंतामणि मालवीय पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मालवीय ने एक महिला के साथ कथित रूप से यौन शोषण किया और उसकी संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास भी हुआ। इन आरोपों के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया।

हालांकि, चिंतामणि मालवीय ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने रीना बौरासी को 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि सात दिन के भीतर लगाए गए आरोपों के समर्थन में प्रमाणित दस्तावेज पेश किए जाएं, अन्यथा उनके खिलाफ 10 करोड़ रुपए का मानहानि दावा और आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।

बीजेपी की ओर से फिलहाल इस पूरे विवाद पर आधिकारिक स्तर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मंत्री सिलावट का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे बीजेपी की अंदरूनी स्थिति और नेतृत्व के समन्वय की कमी से जोड़कर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ सकता है, क्योंकि एक तरफ गंभीर आरोप हैं तो दूसरी ओर मानहानि का कानूनी विवाद भी जुड़ गया है। ऐसे में दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।