महंगाई की मार: मजदूर हितों के लिए उतरा बजरंग सेवादल संगठन, रवि दुबे ने उठाई आठ घंटे कार्य और वेतन वृद्धि की मांग
उधमसिंह नगर के रुद्रपुर में बजरंग सेवादल संगठन ने मजदूरों की समस्याओं और कथित शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। संगठन के जिला अध्यक्ष रवि दुबे ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूरों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने, 8 घंटे की निश्चित ड्यूटी लागू करने और महीने में 4 साप्ताहिक सवैतनिक अवकाश देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई फैक्ट्रियों में मजदूरों से तय समय से अधिक काम लिया जा रहा है
महंगाई की मार: मजदूर हितों के लिए उतरा बजरंग सेवादल संगठन
रवि दुबे ने उठाई 8 घंटे कार्य और वेतन वृद्धि की मांग
उधमसिंह नगर में मजदूरों के शोषण के खिलाफ खुला मोर्चा
बढ़ती महंगाई में मजदूरों का गुजर-बसर मुश्किल: रवि दुबे
दैनिक मजदूरी बढ़ाने और साप्ताहिक अवकाश की मांग तेज
रुद्रपुर (उधमसिंह नगर)। उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में बढ़ती महंगाई और मजदूरों के कथित शोषण को लेकर अब सामाजिक संगठन भी खुलकर सामने आने लगे हैं। जिले में सक्रिय बजरंग सेवादल संगठन ने मजदूरों की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करते हुए प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों पर श्रम कानूनों के पालन का दबाव बनाया है। संगठन के जिला अध्यक्ष रवि दुबे ने मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन का ऐलान करते हुए कहा कि यदि मजदूरों की मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
रुद्रपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों मजदूर विभिन्न फैक्ट्रियों और निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। मजदूरों का आरोप है कि उनसे निर्धारित समय से अधिक काम लिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं मिल रहा। बढ़ती महंगाई के बीच मजदूर परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी चुनौती बनता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर बजरंग सेवादल संगठन ने मजदूरों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है।
जिला अध्यक्ष रवि दुबे ने कहा कि मजदूर किसी भी उद्योग और अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं, लेकिन सबसे अधिक शोषण भी इन्हीं का किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि मजदूरों की आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। ऐसे में गरीब और मध्यम वर्गीय मजदूर परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई फैक्ट्रियों में मजदूरों से 10 से 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जबकि उन्हें पर्याप्त ओवरटाइम और सुविधाएं नहीं मिलतीं।
रवि दुबे ने मजदूरों की प्रमुख मांगों को रखते हुए कहा कि सबसे पहले दैनिक मजदूरी में तत्काल वृद्धि की जानी चाहिए ताकि मजदूर अपने परिवार का पालन-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मजदूरों को मिलने वाला वेतन बढ़ती महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। खाद्य सामग्री, बच्चों की शिक्षा, बिजली, किराया और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे मजदूर वर्ग आर्थिक रूप से टूटता जा रहा है।
उन्होंने दूसरी महत्वपूर्ण मांग के रूप में कार्यस्थलों पर आठ घंटे की निश्चित ड्यूटी लागू करने की बात कही। रवि दुबे ने कहा कि श्रम कानूनों में स्पष्ट रूप से कार्य समय निर्धारित है, लेकिन कई निजी कंपनियां इसका पालन नहीं कर रहीं। मजदूरों को अधिक समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी औद्योगिक इकाइयों में श्रम विभाग नियमित निरीक्षण करे और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।
संगठन ने तीसरी प्रमुख मांग के रूप में साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था को अनिवार्य करने की बात कही। रवि दुबे ने कहा कि मजदूरों से महीने में 26 दिन ही काम लिया जाए तथा उन्हें चार साप्ताहिक सवैतनिक अवकाश दिए जाएं। उनका कहना था कि लगातार काम करने से मजदूरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, इसलिए उन्हें आराम और परिवार के साथ समय बिताने का अधिकार मिलना चाहिए।
रवि दुबे ने प्रशासन और उद्योग प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि मजदूरों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग के अधिकारों की रक्षा करना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। यदि मजदूरों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में किया गया विरोध प्रदर्शन केवल शुरुआत है और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जाएगी।
उन्होंने कहा, “मजदूर भाइयों का कोई भी शोषण करेगा तो बजरंग सेवादल संगठन चुप नहीं बैठेगा। बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूरों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। हम चाहते हैं कि हर मजदूर को सम्मानजनक जीवन, उचित वेतन और पर्याप्त आराम मिले।”
मजदूरों के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग इस मुहिम से जुड़े। संगठन के साथ अफसार, मुकेश, टीकाराम, सोनू, सूरज, प्रदीप, रामबाबू, आकाश, प्रवीण, देवेन्द्र, आबिद, असीम, दौलतराम, जगवीर, सुमित, अमरसिंह, विजय, फारुक, आजाद, रविशंकर दुबे, उमेश, साहिल, संतोष, असलम, हासिब और अन्य कई मजदूरों ने अपनी आवाज उठाई। सभी ने मजदूर हितों की रक्षा और श्रम कानूनों के सख्ती से पालन की मांग की।
स्थानीय मजदूरों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में अब उन्हें सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने से उम्मीद जगी है कि उनकी आवाज शासन और प्रशासन तक पहुंचेगी। मजदूरों ने कहा कि वे केवल अपने अधिकार और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं।
उधर, इस पूरे मामले के बाद श्रमिक मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज हो सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और औद्योगिक इकाइयां मजदूरों की मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस