बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ने की नई पहल: वेतवा किनारे के 53 गांवों के 150 युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण, डीएम राजेश कुमार पाण्डेय की अनोखी योजना

उरई में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की पहल पर वेतवा नदी किनारे बसे 53 गांवों के 150 बेरोजगार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने की योजना शुरू की गई है। चयनित युवाओं को 4 से 6 माह तक विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और पलायन व गलत गतिविधियों पर रोक लगाना है।

बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ने की नई पहल: वेतवा किनारे के 53 गांवों के 150 युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण, डीएम राजेश कुमार पाण्डेय की अनोखी योजना

वेतवा किनारे के 53 गांवों के युवाओं को मिलेगा रोजगार प्रशिक्षण

डीएम राजेश कुमार पाण्डेय की पहल से 150 बेरोजगार युवाओं का होगा चयन

उरई। जनपद जालौन में बेरोजगारी की समस्या को दूर करने और ग्रामीण युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की सोच और प्रयासों से अब वेतवा नदी किनारे बसे 53 गांवों के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने जा रहे हैं। प्रशासन की इस योजना के तहत पहले चरण में 150 शिक्षित बेरोजगार युवाओं का चयन किया जाएगा, जिन्हें भारत सरकार से संबद्ध संस्था और विशेषज्ञ कंपनियों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद युवाओं को उनकी योग्यता और दक्षता के अनुसार रोजगार से जोड़ा जाएगा।

जिलाधिकारी का मानना है कि किसी भी जिले का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वहां के युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिले। यही सोच इस योजना की आधारशिला बनी है। वेतवा नदी किनारे बसे गांव लंबे समय से पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाते रहे हैं। यहां रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण युवाओं को मजबूरी में पलायन करना पड़ता है या फिर कुछ लोग गलत गतिविधियों की ओर भी बढ़ जाते हैं। प्रशासन अब इस स्थिति को बदलने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, चयनित युवाओं को 4 से 6 माह तक विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक और रोजगार आधारित होगा। युवाओं की शैक्षिक योग्यता, रुचि और कार्य क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें तकनीकी कार्यों से लेकर छोटे उद्योग, मशीन संचालन, कंप्यूटर कौशल, इलेक्ट्रिकल कार्य, मोबाइल रिपेयरिंग, कृषि आधारित रोजगार, सेवा क्षेत्र और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को शामिल किया गया है।

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि योजना का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके लिए भारत सरकार से अधिकृत कंपनियां और संस्थाएं युवाओं का प्रशिक्षण करेंगी। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को आधुनिक तकनीकों और रोजगार के नए अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।

उन्होंने कहा कि यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए लाभकारी साबित होगी, जो आर्थिक अभाव के कारण आगे की पढ़ाई या रोजगार के अवसरों से वंचित रह जाते हैं। प्रशासन चाहता है कि गांवों के युवा भी शहरों की तरह अवसर प्राप्त करें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएं।

इस पहल को लेकर गांवों में भी उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि युवाओं को गांव के आसपास ही रोजगार के अवसर मिलने लगेंगे तो पलायन कम होगा और क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। कई अभिभावकों ने जिलाधिकारी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार प्रशासन ने गांवों के युवाओं के भविष्य को लेकर इतनी गंभीरता दिखाई है।

प्रशासन का कहना है कि योजना का पहला चरण पूरी तरह सफल होने के बाद दूसरे और तीसरे चरण में भी इन्हीं गांवों के और युवाओं को शामिल किया जाएगा। इससे आने वाले समय में सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। यह योजना न केवल बेरोजगारी कम करेगी, बल्कि अपराध और गलत गतिविधियों में फंसने वाले युवाओं को भी नई दिशा देने का कार्य करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास आधारित योजनाएं सही तरीके से लागू हों तो गांवों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। वर्तमान समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित प्रशिक्षण युवाओं को तेजी से रोजगार दिलाने में मदद करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह रोजगार केंद्रित बनाया है।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चयन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ कराई जाए और वास्तविक जरूरतमंद तथा इच्छुक युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कंपनियों के साथ समन्वय भी स्थापित किया जा रहा है।

वेतवा किनारे के गांवों के लिए शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में जिले के लिए मॉडल योजना साबित हो सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो अन्य पिछड़े क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के रोजगार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। प्रशासन की इस कोशिश से युवाओं में उम्मीद जगी है कि अब उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि अपने ही क्षेत्र में बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिलेगा।