राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT की जांच पूरी, सचिव से 3 घंटे बंद कमरे में पूछताछ — अयोध्या में दान और वित्तीय प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले की जांच जारी है. बताया जा रहा है कि इस मामले में एसआईटी की जांच का दायरा केवल फंड की गड़बड़ी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन की भी जांच की जा रही है.
अयोध्या राम मंदिर में मिले दान में हेराफेरी के आरोपों के बाद, मंदिर ट्रस्ट की गुजारिश पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक SIT बनाई थी. SIT ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर से जुड़े दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों से गहन पूछताछ की है। इस दौरान जांच एजेंसी ने कई अहम दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की, जबकि मंदिर ट्रस्ट के सचिव से करीब तीन घंटे तक बंद कमरे में विस्तृत पूछताछ की गई।
सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और अब अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपा जाएगा। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल पैदा कर दी है।
जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने के निर्देश
सूत्रों का कहना है कि SIT ने जांच के दौरान एक बड़ा कदम उठाते हुए मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को निर्देश दिया है कि वे जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ें। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न आए और सभी आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके।
जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई को और मजबूत करते हुए सभी पूछताछ और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को डिजिटल रूप में सुरक्षित करना शुरू कर दिया है। हर दिन की जांच रिपोर्ट तैयार कर उसे उच्च स्तर पर भेजा जा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच रही दैनिक रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार SIT अपनी जांच रिपोर्ट प्रतिदिन मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है। यह रिपोर्ट जांच की प्रगति, सामने आए तथ्यों और अब तक जुटाए गए सबूतों का विस्तृत विवरण देती है। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने से पहले सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या अधूरी जानकारी न रह जाए।
जांच टीम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूरे मामले में वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सभी पहलुओं को बारीकी से जांचा जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी स्पष्ट की जा सके।
आभूषणों और दान रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी
प्रारंभिक जांच में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित तौर पर विसंगतियां पाई गई हैं। SIT को इस संबंध में ट्रस्ट के पदाधिकारियों से स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है।
यह भी बताया जा रहा है कि दान के रूप में प्राप्त कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड और उनके भंडारण से जुड़े दस्तावेजों में कई जगहों पर मेल नहीं पाया गया है। हालांकि, आधिकारिक रूप से इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
कुंभ मेले के दौरान दान का बड़ा प्रवाह
जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है, जो कुंभ मेले के दौरान दान से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, उस अवधि में लगभग दो महीने तक प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे।
इस दौरान दान पेटियां मात्र दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। इतनी बड़ी मात्रा में दान आने के बावजूद उसके संग्रह, गिनती और लेखा-जोखा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि उस समय दान की गणना और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी।
जमीन खरीद और निर्माण सामग्री पर भी जांच
SIT की जांच केवल दान राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मंदिर ट्रस्ट द्वारा की गई जमीन खरीद और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है।
सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट ने अलग-अलग चरणों में लगभग 71 एकड़ जमीन खरीदी, जिसमें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत चुकाने के आरोप सामने आए हैं। कहा जा रहा है कि कुछ मामलों में जमीन को बाजार भाव से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदा गया।
इसके अलावा निर्माण सामग्री की खरीद, सप्लाई चेन और ठेकेदारों के चयन की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन सभी प्रक्रियाओं में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
सचिव से तीन घंटे की बंद कमरे में पूछताछ
जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक मंदिर ट्रस्ट के सचिव से की गई लंबी पूछताछ है। सूत्रों के अनुसार, SIT ने सचिव से करीब तीन घंटे तक बंद कमरे में कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे।
इन सवालों में दान की राशि के प्रबंधन, आभूषणों के रिकॉर्ड, जमीन खरीद प्रक्रिया और निर्माण कार्यों से जुड़े वित्तीय निर्णयों पर विस्तृत चर्चा की गई। हालांकि, पूछताछ के दौरान क्या निष्कर्ष निकले, इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक दलों में भी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) और आम आदमी पार्टी (आप) सहित कई विपक्षी दलों ने पहले ही इस मुद्दे को उठाया था और पारदर्शी जांच की मांग की थी।
विपक्ष का आरोप है कि धार्मिक संस्थानों के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हो सकती हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया है कि SIT को पूरी स्वतंत्रता दी गई है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
SIT का गठन और जांच प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर इस मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। इस टीम में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस., और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
टीम ने अपने गठन के बाद से लगातार दस्तावेजों की जांच, बयान दर्ज करने और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण किया है। जांच को पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए डिजिटल रिकॉर्डिंग और डेटा विश्लेषण का सहारा लिया जा रहा है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
अब सभी की नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल जांच एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं को बारीकी से परख रही है। अयोध्या में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और लोग SIT की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस