भरभराकर गिरी अस्पताल की छत, फीडिंग करा रही 3 प्रसूता घायल, 90 साल पुरानी बिल्डिंग में बड़ा हादसा
बच्चों को स्तनपान करा रही 3 महिलाओं को चोट लगी है। एक महिला को सामान्य चोट लगी है, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हुई हैं। घायल महिलाओं को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
एसडीएम अखिलेश शर्मा ने कहा कि अस्पताल की बिल्डिंग 60-70 साल पुरानी है. अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि पूरी बिल्डिंग की जांच कराकर सुरक्षा के उपाय किए जाएं.
मध्य प्रदेश के भिंड जिला अस्पताल में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SCNU) वार्ड में बने दुग्धपान कक्ष की छत और फॉल्स सीलिंग अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय वहां सात महिलाएं अपने नवजात बच्चों को दूध पिला रही थीं। अचानक मलबा गिरने से पूरे वार्ड में चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में तीन महिलाएं और एक नवजात शिशु घायल हो गए, जबकि दो महिलाओं को गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में घायलों को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महिलाएं सामान्य रूप से अपने बच्चों को दूध पिला रही थीं, तभी अचानक छत से प्लास्टर झड़ने लगा और कुछ ही सेकंड में फॉल्स सीलिंग और छत का हिस्सा नीचे आ गिरा। वहां मौजूद स्टाफ और परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और महिलाओं व बच्चों को मलबे से बाहर निकाला। हादसे के बाद वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घायलों में ममता पवैया पत्नी भीकम पवैया (32) निवासी मोहर सिंह का पुरा और सुषमा पत्नी कमलेश नरवरिया (23) निवासी पुर शामिल हैं। दोनों महिलाओं को गंभीर चोटें आने के कारण तत्काल ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। एक नवजात शिशु को भी हल्की चोटें आई हैं। डॉक्टरों के अनुसार प्राथमिक उपचार के बाद सभी की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
वार्ड में मचा हड़कंप, बच्चों को तुरंत हटाया गया
हादसे के तुरंत बाद अस्पताल स्टाफ ने तेजी दिखाते हुए वार्ड में भर्ती अन्य नवजात बच्चों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया। अस्पताल प्रशासन को डर था कि कहीं भवन का अन्य हिस्सा भी कमजोर होकर गिर न जाए। नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों ने मिलकर बच्चों को गोद में उठाकर दूसरे वार्ड में पहुंचाया। कई महिलाएं हादसे के बाद डर और सदमे में दिखाई दीं।
घटना की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आर. एन. राजौरिया मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। इसके साथ ही एसडीएम अखिलेश शर्मा भी अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से भवन की स्थिति को लेकर रिपोर्ट मांगी है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि जिला अस्पताल की इमारत लंबे समय से जर्जर हालत में है। कई बार छत से प्लास्टर गिरने और दीवारों में दरार आने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने केवल ऊपरी मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते भवन की जांच और मरम्मत कराई जाती तो यह हादसा टल सकता था।
बताया जा रहा है कि अस्पताल का बड़ा हिस्सा आजादी से पहले का बना हुआ है। करीब 90 साल पुरानी इस इमारत में कई हिस्से बेहद कमजोर हो चुके हैं। कुछ साल पहले भवन को रंग-रोगन और मरम्मत कर नया रूप देने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन मूल ढांचा अब भी पुराना और असुरक्षित बना हुआ है। अस्पताल के कई वार्डों में पहले भी छत से प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
हादसे के बाद मरीजों के परिजनों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जर्जर भवन में नवजात बच्चों और प्रसूताओं को रखना बेहद खतरनाक है। परिजनों ने सवाल उठाया कि जब भवन की हालत खराब थी तो पहले से सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अस्पताल में कई जगह दीवारों में दरारें साफ दिखाई देती हैं, लेकिन इसके बावजूद मरीजों को उन्हीं वार्डों में भर्ती किया जा रहा है। हादसे के बाद कई मरीजों के परिजन अपने बच्चों को लेकर भयभीत नजर आए।
एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश
एसडीएम अखिलेश शर्मा ने कहा कि अस्पताल की बिल्डिंग काफी पुरानी है और इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि पूरी बिल्डिंग की सुरक्षा जांच कराकर आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही कमजोर हिस्सों को तत्काल खाली कराने और मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए विशेषज्ञों की टीम से भवन का निरीक्षण कराया जाएगा। फिलहाल हादसे वाले हिस्से को बंद कर दिया गया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। प्रदेश के कई जिला अस्पताल पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां मरीजों की सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है। खासतौर पर नवजात शिशु और प्रसूताओं जैसे संवेदनशील मरीजों को ऐसे भवनों में रखना गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट होना चाहिए। समय-समय पर भवन की मजबूती की जांच और मरम्मत अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े।
जांच और मरम्मत का आश्वासन
फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच कराने और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि भवन की पूरी स्थिति का मूल्यांकन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल बना हुआ है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस बार केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में ऐसा कोई बड़ा हादसा न हो।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस