घुटनों तक पायजामा चढ़ाकर खेत में उतरे शिवराज, किसानों से बोले- धरती के साथ खिलवाड़ बंद करें, प्राकृतिक खेती ही भविष्य

यूपी पहुंचकर शिवराज सिंह ने कहा कि उत्तरप्रदेश आकर मन आनंद और प्रसन्नता से भर जाता हैं. यह देश का प्रमुख कृषि प्रदेश है, जहां देश का 38% गेहूं उत्पादन होता हैं.

घुटनों तक पायजामा चढ़ाकर खेत में उतरे शिवराज, किसानों से बोले- धरती के साथ खिलवाड़ बंद करें, प्राकृतिक खेती ही भविष्य

केंद्रीय मंत्री ने सबसे पहले आचार्य नरेंद्र देव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के कृषि प्रक्षेत्र में पहुंचकर किसानों से बातचीत की। उन्होंने मखाना, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती और ढैंचा की खेती से जुड़े मॉडलों का निरीक्षण किया। किसानों के बीच पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने खेत में उतरकर धान की पौध भी रोपी और धान रोपाई अभियान की शुरुआत की

कुमारगंज (अयोध्या)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज का दौरा कर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने का बड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग नहीं रोका गया तो आने वाले समय में धरती बंजर हो जाएगी और अन्न उत्पादन गंभीर संकट में पड़ सकता है। खेत में उतरकर धान की रोपाई करते हुए उन्होंने किसानों से अपील की कि अब समय धरती मां को बचाने का है और खेती को प्रकृति के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है।

'स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मिट्टी केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। यदि मिट्टी की सेहत खराब हो गई तो खेती का भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों के लगातार उपयोग से मिट्टी के मित्र जीव, विशेषकर केंचुए, तेजी से समाप्त हो रहे हैं। यही केंचुए मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।

उन्होंने कहा कि आज फल, सब्जियां और अनाज भी रसायनों के अत्यधिक प्रयोग के कारण प्रभावित हो रहे हैं। इससे मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसलिए प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और संतुलित पोषक तत्वों के प्रयोग को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

घुटनों तक पायजामा चढ़ाकर की धान की रोपाई

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने औपचारिक भाषण तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने घुटनों तक पायजामा चढ़ाया और किसानों के साथ खेत में उतरकर धान की रोपाई की। इस दौरान उन्होंने किसानों से खेती की समस्याओं पर चर्चा की और आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक ज्ञान को अपनाने की सलाह दी। उनका यह अंदाज किसानों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा।

इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय के डेयरी प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया, गायों को गुड़ और हरा चारा खिलाया तथा गोपालकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। प्राकृतिक खेती परिसर में उन्होंने मछलियों को दाना खिलाया और हल्दी की खेती का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

मिट्टी परीक्षण होगा अगला बड़ा अभियान

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि खेत बचाओ अभियान के बाद अब सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य देशभर में मिट्टी परीक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान को अपनी मिट्टी की गुणवत्ता की जानकारी होनी चाहिए ताकि आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग किया जा सके। इससे लागत भी घटेगी और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी।

उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली ने उत्तर प्रदेश के लिए एक विस्तृत कृषि कार्ययोजना तैयार की है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया है। इस योजना का उद्देश्य वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना, बढ़ते तापमान, सूखा, जलवायु परिवर्तन तथा अन्य कृषि चुनौतियों का समाधान करना है।

किसानों को आय बढ़ाने के दिए गुर

किसान चौपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री ने सात जिलों से आए 500 से अधिक किसानों से संवाद किया। उन्होंने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा कृषि विविधीकरण के माध्यम से आय बढ़ाने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि केवल परंपरागत खेती पर निर्भर रहने के बजाय डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन और पशुपालन को भी खेती का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है।

प्रदेश सरकार ने भेजे 60 हजार क्विंटल ढैंचे के बीज

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों में 60 हजार क्विंटल ढैंचे का बीज भेजा गया है। इसके अलावा किसानों को सात लाख मिनी किट निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने किसानों से धान की सीधी बुवाई (डायरेक्ट सीडिंग) तकनीक अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे उर्वरकों की खपत कम होगी, पानी की बचत होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती पर भी ध्यान देना चाहिए। सरकार ने प्रमाणित बीजों की कीमत आधी कर दी है ताकि किसानों की लागत कम हो और वे अधिक लाभ कमा सकें।

अल नीनो और जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता जरूरी

आईसीएआर, नई दिल्ली के महानिदेशक एम.एल. जाट ने कहा कि वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश की कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने किसानों को अल नीनो, जलवायु परिवर्तन और मौसम संबंधी चुनौतियों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बदलाव और वैज्ञानिक खेती किसानों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। यदि धरती का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा तो खेती में रसायनों की आवश्यकता भी कम होगी।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को देश में नंबर एक बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए लागत कम करना और उत्पादन बढ़ाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम का एक विशेष मॉडल भेजा है। इसमें तालाब में मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, बत्तख पालन, डेयरी और प्राकृतिक खेती को एक साथ जोड़ा गया है। गाय के गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद तैयार कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं का रुझान भी खेती की ओर बढ़ेगा।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष आचार्य श्याम बिहारी गुप्ता, आईसीएआर के महानिदेशक एम.एल. जाट, प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र कुमार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों का स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने खेत में उतरकर किसानों के साथ काम किया, प्राकृतिक खेती का संदेश दिया और स्पष्ट किया कि यदि भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है तो मिट्टी की सेहत बचाना सबसे पहली प्राथमिकता होगी। प्राकृतिक खेती, वैज्ञानिक तकनीक और एकीकृत कृषि मॉडल ही भविष्य की टिकाऊ खेती का आधार बनेंगे।